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  1. Joint Home Loan: पति-पत्नी को टैक्स में हो सकता है बड़ा फायदा, लेकिन इन शर्तों को पूरा करना जरूरी

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Joint Home Loan: पति-पत्नी को टैक्स में हो सकता है बड़ा फायदा, लेकिन इन शर्तों को पूरा करना जरूरी

Shubham Singh Thakur

3 min read | अपडेटेड July 03, 2026, 18:07 IST

सारांश

Joint Home Loan: अगर पति-पत्नी दोनों कमाते हैं, घर के संयुक्त मालिक हैं और अपनी-अपनी आय से ईएमआई का भुगतान करते हैं, तो जॉइंट होम लोन न सिर्फ मासिक किस्तों का बोझ कम करता है बल्कि टैक्स में भी बड़ी बचत दिला सकता है।

Joint Home Loan

Joint Home Loan: परिवार एक साल में कुल 7 लाख रुपये तक की टैक्स कटौती का फायदा उठा सकता है।

Joint Home Loan: होम लोन के जरिए इनकम टैक्स में बड़ी बचत की जा सकती है। अगर पति और पत्नी दोनों नौकरी करते हैं और घर खरीदने के लिए साथ में होम लोन लेते हैं, तो वे टैक्स में अच्छी-खासी बचत कर सकते हैं। सही तरीके से प्लानिंग करने पर परिवार एक साल में कुल 7 लाख रुपये तक की टैक्स कटौती का फायदा उठा सकता है। हालांकि, सिर्फ जॉइंट होम लोन लेने से यह लाभ नहीं मिलता, इसके लिए आयकर विभाग की कुछ शर्तें भी पूरी करनी होती हैं।
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किस सेक्शन में मिलता है टैक्स लाभ?

पुरानी टैक्स व्यवस्था (Old Tax Regime) में होम लोन पर दो तरह की टैक्स छूट मिलती है। Section 24(b) के तहत स्वयं के रहने वाले घर के लिए होम लोन के ब्याज पर हर व्यक्ति 2 लाख रुपये तक की कटौती का दावा कर सकता है। वहीं Section 80C के तहत होम लोन की मूल राशि के भुगतान पर 1.5 लाख रुपये तक की टैक्स छूट मिलती है। अगर दोनों पति-पत्नी इन नियमों के पात्र हैं, तो दोनों अलग-अलग यह लाभ ले सकते हैं।

7 लाख रुपये तक की टैक्स कटौती

Section 24b के तहत प्रत्येक को-बॉरोअर वित्तीय वर्ष में चुकाए गए ब्याज पर ₹2 लाख तक की कटौती का दावा कर सकता है। दोनों मिलाकर ₹4 लाख होते हैं। इसके अलावा Section 80C के तहत प्रत्येक को-बॉरोअर प्रिंसिपल अमाउंट और स्टांप ड्यूटी पर ₹1.5 लाख तक की छूट पा सकता है। यह दोनों मिलाकर ₹3 लाख हो जाता है। इस तरह कुल अधिकतम फायदा ₹4 लाख (ब्याज) + ₹3 लाख (मूलधन) = ₹7 लाख प्रति वर्ष होता है। हालांकि इसका फायदा उठाने के लिए कुछ शर्तों को पूरा करना जरूरी है।

दोनों को अपनी आय से EMI चुकानी होगी

टैक्स छूट उसी हिस्से पर मिलती है, जिसकी ईएमआई का भुगतान व्यक्ति अपनी कमाई से करता है। यानी अगर पति और पत्नी दोनों अपनी-अपनी आय से होम लोन की किस्तें भरते हैं, तो वे अपने-अपने हिस्से के अनुसार टैक्स कटौती का लाभ ले सकते हैं।

दोनों का घर में मालिकाना हक होना जरूरी

सबसे जरूरी बात यह है कि सिर्फ होम लोन में को-बॉरोअर होना काफी नहीं है। टैक्स छूट पाने के लिए पति और पत्नी दोनों का नाम घर के सेल डीड (Sale Deed) या मालिकाना दस्तावेजों में होना चाहिए। अगर कोई व्यक्ति ईएमआई भर रहा है लेकिन कानूनी रूप से घर का मालिक नहीं है, तो वह टैक्स छूट का दावा नहीं कर सकता।

पुरानी टैक्स व्यवस्था चुनना जरूरी

यह पूरी टैक्स बचत की रणनीति तभी काम करती है, जब दोनों पति-पत्नी पुरानी टैक्स व्यवस्था चुनें। नई टैक्स व्यवस्था में स्वयं के रहने वाले घर पर Section 24(b) और Section 80C के तहत यह टैक्स छूट उपलब्ध नहीं होती। इसलिए अगर दोनों में से कोई भी नई टैक्स व्यवस्था चुनता है, तो उसे इन कटौतियों का लाभ नहीं मिलेगा।

अगर पति-पत्नी दोनों कमाते हैं, घर के संयुक्त मालिक हैं और अपनी-अपनी आय से ईएमआई का भुगतान करते हैं, तो जॉइंट होम लोन न सिर्फ मासिक किस्तों का बोझ कम करता है बल्कि टैक्स में भी बड़ी बचत दिला सकता है। साथ ही यह परिवार की लंबी अवधि की वित्तीय योजना को भी मजबूत बनाता है।

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