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बीएस-6 गाड़ियों वाले ध्यान दें! बार-बार प्रदूषण जांच का झंझट होगा खत्म, सरकार ला रही नया नियम

Upstox

4 min read | अपडेटेड July 28, 2026, 10:51 IST

सारांश

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने बीएस-6 व्हीकल मालिकों को बड़ी राहत देने का प्रस्ताव दिया है। नए ड्राफ्ट नियमों के तहत 6 साल तक की पुरानी बीएस-6 प्राइवेट गाड़ियों के लिए पीयूसीसी की वैलिडीटी 1 साल से बढ़ाकर 3 साल की जा सकती है।

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बीएस-6 गाड़ियों के लिए अब बार-बार प्रदूषण जांच कराने की जरूरत नहीं होगी। | Image: PTI

गाड़ी चलाने वालों के लिए एक बेहद राहत भरी खबर सामने आई है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने बीएस-6 गाड़ियों के लिए पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल सर्टिफिकेट यानी पीयूसीसी की वैलिडीटी बढ़ाने का ड्राफ्ट प्रपोजल जारी किया है। इस नए प्रस्ताव का मुख्य मकसद नई और कम प्रदूषण फैलाने वाली गाड़ियों के लिए बार-बार पीयूसीसी रिन्यूअल कराने के झंझट को कम करना है। अगर यह प्रस्ताव लागू हो जाता है तो 6 साल तक पुरानी बीएस-6 प्राइवेट गाड़ियों को अब हर साल नहीं, बल्कि तीन साल में सिर्फ एक बार ही पीयूसीसी टेस्ट कराना पड़ेगा।

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बीएस-6 प्राइवेट और ट्रांसपोर्ट व्हीकल के नए नियम

ड्राफ्ट नोटिफिकेशन के मुताबिक, पहली बार रजिस्ट्रेशन की तारीख से गाड़ी की उम्र के हिसाब से पीयूसीसी वैलिडीटी तय की जाएगी। बीएस-6 नॉन-ट्रांसपोर्ट यानी प्राइवेट गाड़ियों के मामले में 6 साल तक की पुरानी गाड़ियों के लिए पीयूसीसी की वैलिडीटी तीन साल रहेगी। 6 साल से ज्यादा और 10 साल तक पुरानी गाड़ियों के लिए यह वैलिडीटी एक साल रखी गई है। वहीं 10 साल से ज्यादा पुरानी प्राइवेट गाड़ियों के लिए पीयूसीसी हर छह महीने में रिन्यू कराना होगा। इसके अलावा बीएस-6 ट्रांसपोर्ट यानी कमर्शियल गाड़ियों के लिए नियम थोड़े अलग हैं। 6 साल तक पुरानी ट्रांसपोर्ट गाड़ियों के लिए दो साल, 6 से 10 साल पुरानी गाड़ियों के लिए एक साल और 10 साल से ज्यादा पुरानी कमर्शियल गाड़ियों के लिए छह महीने की वैलिडीटी का प्रस्ताव दिया गया है।

पुरानी गाड़ियों के लिए सख्त रहेंगे नियम

मंत्रालय के इस प्रस्ताव में पुरानी गाड़ियों के लिए पीयूसीसी रिन्यूअल के पुराने और छोटे समय सीमा वाले नियमों को ही बरकरार रखा गया है, क्योंकि ये गाड़ियां ज्यादा प्रदूषण फैलाती हैं। बीएस-4 स्टैंडर्ड वाली गाड़ियों के मालिकों को हर छह महीने में अपने पीयूसीसी का रिन्यूअल कराना जरूरी होगा। वहीं बीएस-1, बीएस-2 और बीएस-3 स्टैंडर्ड का पालन करने वाली गाड़ियों के लिए पीयूसीसी रिन्यूअल की समय सीमा हर तीन महीने तय की गई है।

ड्राफ्ट नोटिफिकेशन में यह भी साफ किया गया है कि नए नियम किस तरह लागू किए जाएंगे। नए रूल्स लागू होने से पहले जारी किए गए पीयूसीसी पर नए वैलिडीटी पीरियड का फायदा तभी मिलेगा, जब उन्हें नियम लागू होने के बाद पहली बार रिन्यू कराया जाएगा। इसके अलावा अगर कोई गाड़ी मालिक पीयूसीसी एक्सपायर होने के 10 दिन पहले रिन्यूअल कराता है, तो नया सर्टिफिकेट पुराने सर्टिफिकेट के खत्म होने की तारीख से ही लागू माना जाएगा। लेकिन अगर पीयूसीसी एक्सपायर होने के बाद रिन्यूअल कराया जाता है, तो नया सर्टिफिकेट रिन्यूअल कराने की तारीख से प्रभावी होगा।

क्या होते हैं बीएस एमिशन नॉर्म्स?

भारत स्टेज यानी बीएस एमिशन नॉर्म्स गाड़ियों से निकलने वाले कार्बन मोनोऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड, हाइड्रोकार्बन और पार्टिकुलेट मैटर जैसे हानिकारक तत्वों की अधिकतम सीमा तय करते हैं। ये मानक यूरोपीय एमिशन नॉर्म्स से जुड़े हुए हैं। देश में साल 2017 से बीएस-4 नियम लागू थे, जिसके बाद अप्रैल 2020 में भारत ने सीधे बीएस-6 नियमों को लागू किया था। भारत ने बीच में बीएस-5 को स्किप कर दिया था ताकि एमिशन कंट्रोल को तेजी से लागू किया जा सके। बीएस-6 गाड़ियां काफी कम प्रदूषण फैलाती हैं और इन्हें खास लो-सल्फर बीएस-6 फ्यूल पर चलाने के लिए डिजाइन किया गया है।

(डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें।)

लेखकों के बारे में

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Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

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