पर्सनल फाइनेंस
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4 min read | अपडेटेड June 12, 2026, 13:18 IST
सारांश
करियर में आगे बढ़ने के लिए नौकरी बदलना एक अच्छा फैसला है। लेकिन रिजाइन देने के बाद नोटिस पीरियड में काम को हल्के में लेना भारी पड़ सकता है। अगर आप भी नोटिस पीरियड सर्व कर रहे हैं, तो अपने काम का सही हैंडओवर और फुल एंड फाइनल सेटलमेंट जैसी जरूरी चीजें जरूर निपटा लें।

रिजाइन देने के बाद नोटिस पीरियड में अपने जरूरी काम निपटाने का सही तरीका। | Image: Shutterstock
करियर में आगे बढ़ने और अच्छी ग्रोथ पाने के लिए समय-समय पर नौकरी बदलना एक बहुत ही नॉर्मल और सही फैसला माना जाता है। लेकिन अक्सर ऐसा देखा जाता है कि जैसे ही कोई कर्मचारी अपनी कंपनी में रिजाइन देता है, वह अपने काम और जिम्मेदारियों को लेकर काफी ढिलाई बरतने लगता है। आमतौर पर लोग नोटिस पीरियड को केवल आराम करने और दिन काटने का समय समझ लेते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपकी यह छोटी सी लापरवाही आपकी पिछली सालों की मेहनत पर पानी फेर सकती है और आपकी नई नौकरी में भी मुश्किलें खड़ी कर सकती है। असल में नोटिस पीरियड वह टाइम होता है जब आपको अपनी प्रोफेशनल इमेज को और भी ज्यादा मजबूत और साफ-सुथरा बनाना चाहिए।
रिजाइन देने के बाद आपका सबसे पहला और जरूरी काम अपनी पुरानी जिम्मेदारियों को सही तरीके से किसी दूसरे साथी या एम्प्लॉई को सौंपना होना चाहिए। अगर आप किसी प्रोजेक्ट के बीच में हैं या आपके पास कुछ ऐसी अहम फाइल्स और डेटा हैं जो केवल आपको पता हैं, तो उनकी एक डिटेल्ड और साफ रिपोर्ट बनाएं। अक्सर लोग बिना पूरी जानकारी दिए काम छोड़ देते हैं, जिससे पुरानी कंपनी और बाकी टीम को बाद में बहुत परेशानी होती है। ऐसे में कंपनी आपको जानकारी के लिए बार-बार फोन कर सकती है या फिर आपका एक्सपीरियंस लेटर और फुल एंड फाइनल का पैसा भी रोक सकती है। इसलिए काम का सही हैंडओवर देना बहुत जरूरी है।
ज्यादातर लोग पुरानी कंपनी छोड़ते वक्त केवल अपनी डेस्क से अपना पर्सनल सामान समेटते हैं, लेकिन जरूरी ऑफिशियल डॉक्यूमेंट्स को भूल जाते हैं। आपको नोटिस पीरियड के दौरान ही अपने एचआर से मिलकर कुछ खास डॉक्यूमेंट्स जरूर मांग लेने चाहिए। इनमें पिछले कम से कम 3 से 6 महीने की सैलरी स्लिप जरूर होनी चाहिए। इसके अलावा इनकम टैक्स रिटर्न भरने के लिए फॉर्म 16 और टैक्स पेपर्स भी बहुत जरूरी हैं। अपने रिकॉर्ड के लिए अपना जॉइनिंग और ऑफर लेटर भी पास रखें। सबसे खास चीज आपका एक्सपीरियंस और रिलिविंग लेटर है, जो आपकी अगली नौकरियों के लिए एक तरह से पासपोर्ट की तरह काम करता है, इसलिए इसे लेना कभी न भूलें।
हर कंपनी का एक सिस्टम और प्रोसेस होता है जिसे नो-ड्यूज कहा जाता है। इसमें आपको कंपनी के आईटी विभाग से लैपटॉप, कीबोर्ड और माउस वापस करने के लिए क्लीयरेंस लेना होता है। इसके साथ ही एडमिन से अपना आईडी कार्ड और चाबियां देने के लिए और अन्य विभागों से भी क्लीयरेंस की जरूरत पड़ती है। इसके साथ ही, अपने पीएफ खाते की जानकारी भी अपडेट कर लें और यह चेक कर लें कि आपका UAN नंबर आपके आधार से लिंक हो। कंपनी ने आपका पूरा योगदान पीएफ में जमा कर दिया हो, यह भी कन्फर्म कर लें। यह सब क्लियर होने के बाद ही आपको नो-ड्यूज सर्टिफिकेट मिलता है, जो आपके फुल एंड फाइनल सेटलमेंट के लिए बहुत जरूरी है।
नौकरी छोड़ने से पहले एक बात अच्छे से समझ लें कि अपनी रुकी हुई सैलरी, बोनस, ग्रेच्युटी अगर लागू हो और छुट्टियों के बदले मिलने वाले पैसे यानी लीव एनकैशमेंट का पूरा कैलकुलेशन एचआर और फाइनेंस टीम के साथ बैठकर कर लें। उनसे लिखित में या ईमेल पर पूछें कि आपका फाइनल पैसा कितने दिनों के भीतर आपके खाते में आ जाएगा। आमतौर पर कंपनियां इस प्रोसेस में 30 से 45 दिनों का समय लेती हैं। इसके अलावा अपनी तसल्ली के लिए एचआर मैनेजर का पर्सनल कॉन्टैक्ट नंबर या कोई ऑफिशियल ईमेल आईडी जरूर अपने पास रखें।
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