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4 min read | अपडेटेड June 25, 2026, 17:02 IST
सारांश
ITR Filing 2026: इनकम टैक्स रिटर्न यानी ITR एक ऐसा दस्तावेज है, जिसमें आप पूरे वित्त वर्ष के दौरान हुई अपनी कमाई, दिए गए टैक्स, टैक्स बचाने के लिए किए गए निवेश, नुकसान और रिफंड से जुड़ी जानकारी सरकार को देते हैं।

अगर सही जानकारी और जरूरी दस्तावेज पहले से तैयार हों, तो ITR फाइल करना काफी आसान हो जाता है।
इनकम टैक्स रिटर्न यानी ITR एक ऐसा दस्तावेज है, जिसमें आप पूरे वित्त वर्ष के दौरान हुई अपनी कमाई, दिए गए टैक्स, टैक्स बचाने के लिए किए गए निवेश, नुकसान और रिफंड से जुड़ी जानकारी सरकार को देते हैं। ITR फाइल करने से टैक्स नियमों का पालन होता है और अगर आपका टैक्स ज्यादा कट गया है तो उसका रिफंड भी मिल सकता है।
रिटर्न भरने से पहले कुछ जरूरी दस्तावेज अपने पास रखना बेहतर रहता है। इनमें पैन कार्ड, आधार कार्ड, फॉर्म-16, बैंक स्टेटमेंट, फॉर्म 26AS, एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS), बैंक से मिले ब्याज के प्रमाण पत्र, बीमा प्रीमियम की रसीद, दान की रसीद (अगर कोई दान किया हो), शेयर बाजार में निवेश या ट्रेडिंग का विवरण, बैंक खाते की जानकारी और आधार से लिंक मोबाइल नंबर शामिल हैं। AIS में मौजूद जानकारी को अपने रिकॉर्ड से मिलाकर जरूर जांच लें।
सबसे पहले इनकम टैक्स विभाग के ई-फाइलिंग पोर्टल पर जाएं और अपने पैन, आधार या यूजर आईडी और पासवर्ड की मदद से लॉगिन करें। अगर पहली बार पोर्टल का इस्तेमाल कर रहे हैं तो पहले रजिस्ट्रेशन करना होगा।
लॉगिन करने के बाद 'e-File' सेक्शन में जाकर 'Income Tax Return' और फिर 'File Income Tax Return' पर क्लिक करें। वित्त वर्ष 2025-26 की आय के लिए असेसमेंट ईयर 2026-27 चुनें। इसके बाद नई फाइलिंग शुरू कर सकते हैं या अधूरी रिटर्न को आगे बढ़ा सकते हैं।
अब आपको बताना होगा कि आप किस श्रेणी में रिटर्न भर रहे हैं। आमतौर पर नौकरीपेशा लोग 'Individual' कैटेगरी चुनते हैं। सही कैटेगरी चुनने से आगे की प्रक्रिया आसान हो जाती है।
रिटर्न भरते समय सही ITR फॉर्म चुनना बेहद जरूरी है। अगर आपकी आय सिर्फ वेतन और ब्याज जैसी सामान्य स्रोतों से है, तो ITR-1 उपयुक्त हो सकता है। वहीं कैपिटल गेन, विदेशी संपत्ति या एक से ज्यादा मकानों से आय होने पर ITR-2 की जरूरत पड़ सकती है। बिजनेस या प्रोफेशन से आय वालों के लिए ITR-3 और प्रिजम्पटिव टैक्सेशन स्कीम चुनने वालों के लिए ITR-4 इस्तेमाल किया जाता है।
पोर्टल आपसे पूछेगा कि आप ITR क्यों भर रहे हैं। यह इसलिए हो सकता है क्योंकि आपकी आय टैक्स छूट सीमा से अधिक है, आपको टैक्स रिफंड चाहिए या फिर किसी नुकसान को अगले साल के लिए कैरी फॉरवर्ड करना चाहते हैं।
अब अपनी कमाई, निवेश और टैक्स बचत से जुड़ी जानकारी भरें। पोर्टल पर कई जानकारियां पहले से भरी हुई मिल सकती हैं, लेकिन उन्हें अपने दस्तावेजों से मिलाकर जरूर जांच लें।
रिटर्न सबमिट करने से पहले पूरी जानकारी एक बार ध्यान से पढ़ लें। नाम, पैन नंबर, बैंक अकाउंट, आय और कटौती से जुड़ी जानकारी सही है या नहीं, इसकी पुष्टि जरूर करें।
ITR भरने के बाद उसका ई-वेरिफिकेशन करना जरूरी होता है। रिटर्न जमा करने के 30 दिनों के भीतर इसे वेरिफाई करना होता है। अगर ऐसा नहीं किया गया तो रिटर्न अमान्य माना जा सकता है।
जो लोग ऑनलाइन रिटर्न नहीं भरना चाहते, वे इनकम टैक्स विभाग की वेबसाइट से ऑफलाइन यूटिलिटी डाउनलोड कर सकते हैं। इसमें सभी जानकारियां भरने के बाद फाइल अपलोड करनी होती है और फिर वेरिफिकेशन की प्रक्रिया पूरी करनी होती है।
पहली बार ITR भरना मुश्किल जरूर लग सकता है, लेकिन सही दस्तावेज और सही जानकारी के साथ यह काम आसानी से किया जा सकता है। सबसे जरूरी बात यह है कि सही फॉर्म का चुनाव करें, सभी जानकारियां ध्यान से भरें और समय पर ई-वेरिफिकेशन जरूर पूरा करें। इससे रिटर्न प्रोसेसिंग और रिफंड मिलने में किसी तरह की परेशानी नहीं होगी।
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