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3 min read | अपडेटेड June 25, 2026, 15:44 IST
सारांश
डिजिटल इंडिया के इस दौर में अब देश का एजुकेशन सिस्टम भी तेजी से डिजिटल हो रहा है। छात्रों को मार्कशीट और सर्टिफिकेट के भारी बोझे से बचाने के लिए सरकार ने अपार आईडी (APAAR ID) की शुरुआत की है। इसे 'वन नेशन, वन स्टूडेंट आईडी' के नाम से भी जाना जाता है, जो हर छात्र को एक यूनीक डिजिटल पहचान देती है।

छात्रों को यूनीक डिजिटल पहचान देने वाला अपार आईडी कार्ड।
डिजिटल इंडिया के इस दौर में लगभग सभी चीजें ऑनलाइन होती जा रही हैं और ऐसे में देश का एजुकेशन सिस्टम भी तेजी से डिजिटल हो रहा है। अब छात्रों को अपनी मार्कशीट और सर्टिफिकेट्स की फाइलों का भारी बोझा लेकर घूमने की जरूरत नहीं होगी क्योंकि स्टूडेंट्स को इस परेशानी से बचाने के लिए सरकार ने अपार आईडी की शुरुआत की है। यह आईडी हर एक छात्र को एक यूनीक डिजिटल पहचान देती है जिसमें किसी भी बच्चे की पढ़ाई से जुड़ी सभी जरूरी जानकारी को एक ही जगह पूरी तरह सुरक्षित रखा जा सकता है।
यह एक स्पेशल डिजिटल स्टूडेंट आईडी है जिसे वन नेशन, वन स्टूडेंट आईडी के रूप में भी जाना जाता है। यह हर स्टूडेंट को एक यूनीक नंबर देती है जिसमें स्टूडेंट की एकेडमिक डिटेल्स जैसे मार्कशीट, डिग्री, सर्टिफिकेट, स्कॉलरशिप और बाकी अचीवमेंट्स का रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जा सकता है। आसान शब्दों में कहें तो यह स्टूडेंट्स की एक डिजिटल एकेडमिक प्रोफाइल है जो उनकी पूरी पढ़ाई-लिखाई के सफर का रिकॉर्ड संभालती है। पहले बच्चों को अलग-अलग क्लास और ऑर्गेनाइजेशन के डॉक्यूमेंट्स संभालकर रखने पड़ते थे और उनके खोने का डर रहता था लेकिन अपार आईडी इस दिक्कत को काफी हद तक कम कर देगी।
इस अपार आईडी के कई शानदार फायदे हैं क्योंकि इसमें छात्र के सभी जरूरी डॉक्यूमेंट्स एक ही जगह ऑनलाइन सुरक्षित रहते हैं और मार्कशीट या सर्टिफिकेट कहीं भी ऑनलाइन मिल जाते हैं। इसके होने से स्कूल या कॉलेज बदलने के दौरान रिकॉर्ड ट्रांसफर करना बेहद आसान हो जाता है और डॉक्यूमेंट्स के फटने या खोने का कोई डर नहीं रहता है। इसके साथ ही भविष्य में नौकरी के दौरान डॉक्यूमेंट्स का वेरिफिकेशन बहुत आसानी से हो सकेगा और छात्र इसे अपनी जरूरत के हिसाब से कहीं भी और कभी भी एक्सेस कर सकते हैं।
अपार आईडी बनवाने के लिए छात्र अपने स्कूल या कॉलेज की मदद ले सकते हैं जहां उन्हें आधार से जुड़ी जानकारी और जरूरी डॉक्यूमेंट्स जमा करने होते हैं। इसके अलावा छात्र खुद भी डिजीलॉकर प्लेटफॉर्म के जरिए अपनी आईडी जनरेट कर सकते हैं। इसके लिए सबसे पहले डिजीलॉकर के डैशबोर्ड पर जाकर सर्च डॉक्यूमेंट्स के ऑप्शन पर क्लिक करना होगा और फिर एजुकेशन सेक्शन के सर्च बार में एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट्स टाइप करना होगा। इसके बाद सामने आए अपार आईडी कार्ड के ऑप्शन पर क्लिक करते ही नाम, बर्थ डेट और जेंडर जैसी जरूरी डिटेल्स आधार डेटा से अपने आप आ जाएंगी। इसके बाद अपनी एकेडमिक डिटेल्स भरकर आइडेंटिटी टाइप में रोल नंबर या रजिस्ट्रेशन नंबर चुनना होगा और आइडेंटिटी वैल्यू में संबंधित नंबर लिखना होगा। आखिर में अपने संस्थान का नाम और एडमिशन का साल चुनकर सबमिट बटन दबाते ही यह कार्ड बन जाएगा जिसे पीएफडी कॉपी में डाउनलोड किया जा सकता है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह आता है कि क्या सभी छात्रों के लिए अपार आईडी बनवाना अनिवार्य है। आपको बता दें कि अपार आईडी का मुख्य मकसद छात्रों के रिकॉर्ड को सुरक्षित और डिजिटल बनाना है। किसी भी छात्र को अपार आईडी न होने की वजह से शिक्षा या एडमिशन से वंचित नहीं किया जा सकता है।
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