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5 min read | अपडेटेड July 31, 2026, 13:50 IST
सारांश
इस साल अब तक शेयर बाजार में काफी उतार-चढ़ाव देखा गया है। NSDL के आंकड़ों के अनुसार 30 जुलाई 2026 तक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने भारतीय इक्विटी बाजार से कुल 2,58,860 करोड़ रुपये निकाले हैं। हालांकि डेट सेगमेंट में निवेश देखा गया है। इस दौरान निफ्टी 50 में साल की शुरुआत से 6.60% की गिरावट आई है।

भारतीय शेयर बाजार में घरेलू संस्थागत निवेशकों की हिस्सेदारी बढ़कर रिकॉर्ड 21% पर पहुंची।
भारतीय शेयर बाजार के लिए जुलाई का महीना बेहद शानदार साबित हुआ है। बेहतर कॉरपोरेट नतीजों, विदेशी संस्थागत निवेशकों की बाजार में वापसी, पश्चिम एशिया में कम होते तनाव और चौतरफा खरीदारी के दम पर भारतीय शेयर बाजार में लगातार दूसरे महीने बढ़त दर्ज की गई। स्टॉक एक्सचेंज से मिले आंकड़ों के अनुसार, जुलाई के महीने में सेंसेक्स और निफ्टी 50 इंडेक्स में 2% की तेजी देखने को मिली है। विदेशी निवेशकों के दोबारा लौटने से बाजार के सेंटिमेंट को काफी मजबूती मिली है। लेकिन वहीं अगर आप इस साल अब तक के आंकड़ों पर नजर दौड़ाएं तो कहानी बदलती नजर आएगी।
NSE के 31 जुलाई 2026 के दोपहर 1:20 तक के आंकड़ों के मुताबिक निफ्टी 50 इंडेक्स 24,420.60 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। इस साल यानी 1 जनवरी 2026 को निफ्टी 26,146.55 के स्तर पर था। साल की शुरुआत से अब तक निफ्टी 50 में 1,725.95 प्वाइंट यानी 6.60% की गिरावट दर्ज की गई है। 31 जुलाई को कारोबार के दौरान निफ्टी का उच्चतम स्तर 24,427.85 और निचला स्तर 24,299.70 रहा, जबकि इसका पिछला बंद 24,317.15 था। अगर पूरे 52 हफ्तों की बात करें तो निफ्टी 50 का 52 हफ्ते का उच्चतम स्तर 26,373.20 और निचला स्तर 22,182.55 दर्ज किया गया है।
NSDL के एफपीआई मॉनिटर डेटा के अनुसार 30 जुलाई 2026 तक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने भारतीय इक्विटी बाजार से कुल 2,58,860 करोड़ रुपये की शुद्ध निकासी की है। महीने दर महीने के आंकड़ों पर नजर डालें तो जनवरी में इक्विटी से 35,962 करोड़ रुपये निकाले गए थे। फरवरी में 22,615 करोड़ रुपये की खरीदारी हुई, लेकिन मार्च में सबसे बड़ी बिकवाली देखने को मिली जब 1,17,775 करोड़ रुपये निकाले गए। इसके बाद अप्रैल में 60,847 करोड़ रुपये, मई में 32,963 करोड़ रुपये और जून में 49,340 करोड़ रुपये की बिकवाली हुई। जुलाई महीने में थोड़ी राहत मिली और एफपीआई ने इक्विटी में 15,412 करोड़ रुपये का निवेश किया।

अन्य सेगमेंट्स की बात करें तो हाइब्रिड कैटेगरी से एफपीआई ने कुल 1,846 करोड़ रुपये निकाले। म्यूचुअल फंड्स के मामले में इक्विटी म्यूचुअल फंड में 755 करोड़ रुपये का निवेश आया, जबकि डेट म्यूचुअल फंड से 368 करोड़ रुपये और हाइब्रिड म्यूचुअल फंड से 332 करोड़ रुपये निकाले गए। इसके अलावा म्यूचुअल फंड्स के अदर कैटेगरी में 291 करोड़ रुपये का निवेश देखा गया। अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड्स यानी एआईएफ में कुल 6 करोड़ रुपये का निवेश आया। कुल मिलाकर देखें तो 30 जुलाई 2026 तक सभी सेगमेंट्स को मिलाकर एफपीआई का कुल नेट इन्वेस्टमेंट माइनस 1,72,481 करोड़ रुपये रहा है। हालांकि जुलाई महीने में कुल मिलाकर 40,391 करोड़ रुपये का पॉजिटिव फ्लो देखने को मिला।
फरवरी के बाद यह पहला मौका है जब विदेशी संस्थागत निवेशक यानी एफआईआई भारतीय शेयर बाजार में नेट बायर बने हैं। नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड यानी NSDL के आंकड़ों के मुताबिक जुलाई में एफआईआई ने 15,412 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। इससे पहले जून में 49,340 करोड़ रुपये, मई में 32,963 करोड़ रुपये, अप्रैल में 60,847 करोड़ रुपये और मार्च में 1,17,775 करोड़ रुपये की भारी बिकवाली की गई थी।
विशेषज्ञों के अनुसार दक्षिण कोरिया और अन्य वैश्विक बाजारों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI से जुड़े शेयरों में भारी बिकवाली हुई, क्योंकि उनकी वैल्यूएशन काफी महंगी हो गई थी और उनके कर्ज के स्तर पर सवाल उठ रहे थे। इसी वजह से विदेशी निवेशकों का रुख फिर से भारत की तरफ हुआ है। आईएनवीएसेट पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज के बिजनेस हेड हर्षल दसानी के अनुसार एफआईआई की कैश मार्केट में बिकवाली घटकर इस साल के सबसे निचले स्तर 9,680 करोड़ रुपये पर आ गई और महीने के अंत में एफआईआई की सीधी खरीदारी के साथ डीआईआई की तरफ से भी 34,703 करोड़ रुपये का बड़ा निवेश देखा गया।
सालाना आधार पर DII ने निफ्टी 500 के 24 में से 19 सेक्टर्स में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई है। इसमें सबसे ज्यादा खरीदारी प्राइवेट बैंक्स, टेलीकॉम, रियल एस्टेट, टेक्नोलॉजी, हेल्थकेयर, इंश्योरेंस, ऑटोमोबाइल्स, पीएसयू बैंक्स, एनबीएफसी लैंडिंग, रिटेल और कैपिटल गुड्स में देखी गई। दूसरी ओर FII ने 19 सेक्टर्स में अपनी हिस्सेदारी घटाई है, जिनमें सबसे बड़ी गिरावट प्राइवेट बैंक्स, ईएमएस, एनबीएफसी नॉन-लैंडिंग, टेक्नोलॉजी, रियल एस्टेट, रिटेल, ऑटोमोबाइल्स, हेल्थकेयर, कंज्यूमर, ऑयल एंड गैस, इंश्योरेंस, सीमेंट और यूटिलिटीज में रही। निफ्टी 500 में FII और DII का ओनरशिप रेशियो 0.8 गुना पर स्थिर रहा। निफ्टी 500 के फ्री फ्लोट शेयर में FII का हिस्सा घटकर 33.6% रह गया, जबकि DII का हिस्सा बढ़कर 41.5% हो गया। पिछले एक साल में FII ने निफ्टी 500 की 59% कंपनियों में हिस्सेदारी घटाई, जबकि DII ने 73% कंपनियों में स्टेक बढ़ाया। निफ्टी 50 कंपनियों में FII ने 72% कंपनियों में हिस्सेदारी काटी, जबकि DII ने 82% कंपनियों में स्टेक बढ़ाया।
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