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4 min read | अपडेटेड July 31, 2026, 14:25 IST
सारांश
18 साल के सबसे खराब छमाही प्रदर्शन से उबरते हुए निफ्टी आईटी इंडेक्स में जुलाई के दौरान 19% का बड़ा उछाल आया है। ग्लोबल लेवल पर सेमीकंडक्टर शेयरों में बिकवाली के बाद निवेशकों का ध्यान आईटी और सॉफ्टवेयर कंपनियों की तरफ बढ़ा।

जुलाई में निफ्टी आईटी इंडेक्स ने दर्ज की 6 साल की सबसे बड़ी मंथली तेजी।
भारतीय शेयर बाजार में आईटी सेक्टर ने जुलाई के महीने में अपनी जबरदस्त वापसी से सभी को चौंका दिया है। वर्ष 2026 की पहली छमाही में 18 साल का सबसे खराब प्रदर्शन देखने के बाद, निफ्टी आईटी इंडेक्स ने जुलाई में लगभग 19% की तेजी दर्ज की। यह पिछले 6 सालों में इस इंडेक्स की एक महीने में हुई सबसे बड़ी बढ़त है। निवेशकों ने ग्लोबल मार्केट में महंगे हो चुके आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI से जुड़े सेमीकंडक्टर शेयरों से पैसा निकालकर तुलनात्मक रूप से सस्ते वैल्यूएशन वाले आईटी और सॉफ्टवेयर शेयरों में लगाना शुरू कर दिया है। इससे आईटी सेक्टर में चौतरफा खरीदारी देखने को मिली है।
निफ्टी आईटी इंडेक्स 1 जुलाई 2026 को अपने 52 हफ्ते के निचले स्तर 25,699 पर पहुंच गया था। हालांकि, इसके बाद इंडेक्स ने बहुत ही कम समय में निचले स्तरों से 21% से अधिक की जोरदार रिकवरी दिखाई। इससे पहले 2026 की पहली छमाही के दौरान इस इंडेक्स में करीब 31% की भारी गिरावट दर्ज की गई थी। जुलाई के महीने में आई यह तेजी केवल कुछ बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रही, बल्कि पूरे आईटी सेक्टर में व्यापक रूप से खरीदारी देखने को मिली है।
मिडकैप आईटी शेयरों की बात करें तो ओरैकल फाइनेंशियल सर्विसेज ने अपने 52 हफ्ते के निचले स्तर से 78% की शानदार तेजी दिखाई। वहीं सुबेक्स और रामको सिस्टम्स ने 75-75% का रिटर्न दिया। कोफोर्ज में 71%, सीई इंफो सिस्टम्स और सोनाटा सॉफ्टवेयर में 50-50% की बढ़त दर्ज की गई। इसके अलावा टाटा टेक्नोलॉजीज और मास्टेक 45-45% चढ़े, जबकि हेक्सावेयर टेक्नोलॉजीज और न्यूजैन सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजीज ने 40-40% की बढ़त हासिल की। पर्सिस्टेंट सिस्टम्स, सैजिलिटी और वक्रांगी में भी लगभग 30% की तेजी देखी गई। लार्जकैप सेगमेंट में एचसीएल टेक 31%, टेक महिंद्रा 28%, टीसीएस 23%, इन्फोसिस 16% और विप्रो 10% मजबूत हुआ।
जुलाई की शुरुआत में आईटी सेक्टर का वैल्यूएशन काफी आकर्षक हो गया था। अपने निचले स्तर पर यह सेक्टर लगभग 18 के पीई रेशियो पर ट्रेड कर रहा था, जो कि इसके 5 साल के औसत वैल्यूएशन 27 से काफी नीचे था। इसके अलावा ग्लोबल मार्केट में सेमीकंडक्टर शेयरों में गिरावट और चीन में चिपमेकिंग की प्रगति के बाद निवेशकों ने चिप कंपनियों से ध्यान हटाकर सॉफ्टवेयर और आईटी सर्विसेज कंपनियों की तरफ मोड़ लिया। दक्षिण कोरिया के कोस्पी और जापान के निकेई में गिरावट के साथ ही एक्सेंचर और कॉग्निजेंट जैसे ग्लोबल शेयरों में भी जुलाई के दौरान लगभग 20% की तेजी आई। ब्रोकरेज फर्म जेफरीज द्वारा आईटी सेक्टर की रेटिंग अंडरवेट से बढ़ाकर न्यूट्रल करने से भी बाजार का माहौल बदला।
जून तिमाही के नतीजों ने भी निवेशकों का भरोसा बढ़ाने में मदद की है। AI तकनीक को लेकर अब निवेशकों का मानना है कि भारतीय आईटी कंपनियां इससे प्रभावित होने की बजाय इसका फायदा उठाएंगी। टीसीएस ने बताया कि उसका AI बिजनेस लगभग 2.6 अरब डॉलर के सालाना रन रेट पर पहुंच गया है, जबकि इन्फोसिस ने बताया कि उसके कुल रेवेन्यू में AI से जुड़े काम की हिस्सेदारी करीब 8% है। हालांकि कुछ कंपनियों ने अपने पूरे साल के गाइडेंस में हल्की कटौती की है, लेकिन कंपनियों को नए ऑर्डर्स और डील्स मिलना जारी है, जिससे आईटी सर्विसेज की मांग को लेकर चिंताएं कम हुई हैं।
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