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  1. FD पर मिलने वाले ब्याज पर कैसे लगता है टैक्स? ITR फाइल करते वक्त इन 4 स्टेप्स को जरूर समझें

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FD पर मिलने वाले ब्याज पर कैसे लगता है टैक्स? ITR फाइल करते वक्त इन 4 स्टेप्स को जरूर समझें

Upstox

3 min read | अपडेटेड July 21, 2026, 13:58 IST

सारांश

अगर आपने भी FD में इनवेस्टमेंट किया है, तो ITR फाइल करते वक्त सही टैक्स स्लैब के हिसाब से ब्याज की जानकारी देना जरूरी है। पुराने टैक्स रिजीम में सीनियर सिटिजन्स के लिए 80TTB और 5 साल की FD पर 80C का फायदा मिलता है।

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फिक्स्ड डिपॉजिट यानी FD पर मिलने वाला ब्याज पूरी तरह से टैक्सेबल होता है।

भारत में बचत करने वाले लोगों के बीच फिक्स्ड डिपॉजिट यानी FD सबसे पॉपुलर इनवेस्टमेंट ऑप्शंस में से एक है। लेकिन कई लोगों को लगता है कि बैंक अगर TDS काटना शुरू कर देता है तो इस कमाई पर टैक्स खत्म हो जाता है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि FD से मिलने वाला ब्याज पूरी तरह से टैक्सेबल होता है। इसलिए इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करते वक्त इसका सही कैलकुलेशन करना बेहद जरूरी है। अगर ब्याज की जानकारी को छुपाया गया या गलत रिपोर्ट किया गया, तो इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की तरफ से नोटिस आ सकता है या एक्स्ट्रा टैक्स की डिमांड हो सकती है।

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FD के ब्याज की सही गिनती करना है जरूरी

ITR फाइलिंग की शुरुआत में सबसे पहले आपको पूरे फाइनेंशियल ईयर में सभी FD से मिले कुल ब्याज का हिसाब लगाना होगा। इसके लिए आप बैंक स्टेटमेंट, FD इंटरेस्ट सर्टिफिकेट, फॉर्म 26AS, एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) और टैक्सपेयर इंफॉर्मेंशन स्टेटमेंट (TIS) का इस्तेमाल कर सकते हैं। इन सभी रिकॉर्ड्स को चेक करने से कोई भी ब्याज छूटने का चांस नहीं रहता है। ब्याज की कुल रकम निकालने के बाद इसे 'इनकम फ्रॉम ऑदर सोर्स' के हेड में जोड़ा जाता है। ध्यान रहे कि बैंक द्वारा TDS काटने के बाद मिली नेट रकम के बजाय आपको कुल ग्रॉस ब्याज की जानकारी रिपोर्ट करनी होगी।

टैक्स स्लैब और TDS का एडजस्टमेंट

FD पर मिलने वाला ब्याज आपके ऊपर लागू होने वाले टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्सेबल होता है। चाहे आप ओल्ड टैक्स रिजीम चुनें या न्यू टैक्स रिजीम, यह आपके स्लैब रेट पर ही निर्भर करता है। उदाहरण के लिए अगर कोई व्यक्ति 30% के टैक्स ब्रैकेट में आता है, तो उसकी FD के ब्याज पर भी 30% टैक्स लगेगा। सेक्शन 194A के तहत बैंक तय सीमा पार होने पर 10% TDS काटते हैं। फॉर्म 26AS या AIS में दिखे इस TDS को आप टैक्स क्रेडिट के रूप में क्लेम कर सकते हैं। अगर आपका स्लैब रेट 10% से ज्यादा है तो आपको एक्स्ट्रा टैक्स देना होगा, और अगर आपकी टैक्स लायबिलिटी कम बनती है तो आप रिफंड क्लेम कर सकते हैं।

टैक्स स्लैब के नियम और उपलब्ध छूट

नए और पुराने टैक्स रिजीम में टैक्स स्लैब अलग-अलग हैं। 3 लाख रुपये तक की इनकम पर दोनों रिजीम में शून्य टैक्स है। 3 से 4 लाख रुपये की इनकम पर न्यू रिजीम में शून्य और ओल्ड में 5% टैक्स है। 4 से 5 लाख पर दोनों में 5%, जबकि 5 से 7.5 लाख रुपये और 7.5 से 8 लाख रुपये पर न्यू में 5% और ओल्ड में 20% टैक्स लगता है। 8 से 10 लाख रुपये पर न्यू में 10% और ओल्ड में 20% टैक्स बनता है। 10 से 12 लाख रुपये की इनकम पर न्यू में 10% और ओल्ड में 30% टैक्स लागू होता है। 12 से 16 लाख पर न्यू में 15%, 16 से 20 लाख पर न्यू में 20%, 20 से 24 लाख पर न्यू में 25% और 24 लाख रुपये से ऊपर दोनों रिजीम में 30% टैक्स लगता है। ओल्ड रिजीम चुनने वाले सीनियर सिटिजन्स को सेक्शन 80TTB के तहत 50,000 रुपये तक की छूट मिलती है। इसके अलावा 5 साल की टैक्स सेविंग FD पर सेक्शन 80C के तहत 1.5 लाख रुपये तक का डिडक्शन क्लेम किया जा सकता है।

लेखकों के बारे में

Upstox
Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

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