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  1. Gold-Silver: फेस्टिव सीजन से पहले बदली हॉलमार्किंग फीस, ज्वेलर्स और खरीदारों पर क्या होगा असर?

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Gold-Silver: फेस्टिव सीजन से पहले बदली हॉलमार्किंग फीस, ज्वेलर्स और खरीदारों पर क्या होगा असर?

Upstox

3 min read | अपडेटेड September 16, 2026, 16:17 IST

सारांश

चांदी के आर्टिकल के लिए ज्वेलर्स को AHCs को ₹35 प्रति आर्टिकल देना होगा। एक कंसाइनमेंट पर न्यूनतम फीस ₹150 तय की गई है। वहीं, AHCs BIS की ओर से चांदी के आर्टिकल पर ₹3.50 प्रति आर्टिकल चार्ज करेंगे।

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Gold-Silver: यह बदलाव 14 सितंबर 2026 को जारी नोटिफिकेशन के तहत लागू होंगे।

त्योहारी सीजन शुरू होने से पहले भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने सोने और चांदी के आभूषणों की हॉलमार्किंग फीस में बदलाव किया है। यह बदलाव 14 सितंबर 2026 को जारी नोटिफिकेशन के तहत लागू होंगे। नए नियमों का असर ज्वेलर्स के साथ-साथ उन ग्राहकों पर भी पड़ सकता है, जो इस फेस्टिव सीजन में सोने या चांदी की ज्वेलरी खरीदने की तैयारी कर रहे हैं।

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Hallmarking क्या है?

BIS हॉलमार्किंग किसी भी कीमती धातु की शुद्धता पहचानने का एक तरीका है। सोने की ज्वेलरी पर हॉलमार्क से यह पता चलता है कि उसमें सोना कितना शुद्ध है, जैसे 22 कैरेट या 24 कैरेट। हॉलमार्क में तीन मुख्य चीजें होती हैं- BIS का लोगो, कैरेट या मिलेसिमल फाइननेस और छह अंकों का अल्फान्यूमेरिक Hallmark Unique Identification यानी HUID नंबर।

Gold Jewellery की नई फीस

2026 के संशोधित BIS हॉलमार्किंग नियमों के तहत ज्वेलर्स को मान्यता प्राप्त Assaying and Hallmarking Centres (AHCs) में सोने की ज्वेलरी भेजने पर ₹75 प्रति आर्टिकल हॉलमार्किंग फीस देनी होगी। हालांकि, एक कंसाइनमेंट के लिए न्यूनतम फीस ₹200 होगी।

AHCs की ओर से BIS के लिए सोने के आर्टिकल पर ₹7.50 प्रति आर्टिकल फीस ली जाएगी। इसके लिए भी एक कंसाइनमेंट पर कम से कम ₹20 चार्ज होगा। इन फीस पर लागू टैक्स अलग से लिया जाएगा।

Silver Jewellery की फीस

चांदी के आर्टिकल के लिए ज्वेलर्स को AHCs को ₹35 प्रति आर्टिकल देना होगा। एक कंसाइनमेंट पर न्यूनतम फीस ₹150 तय की गई है। वहीं, AHCs BIS की ओर से चांदी के आर्टिकल पर ₹3.50 प्रति आर्टिकल चार्ज करेंगे। इसका न्यूनतम चार्ज ₹15 प्रति कंसाइनमेंट होगा। यहां भी लागू टैक्स अलग से देना होगा।

Buyers पर क्या असर होगा?

सोने और चांदी की ज्वेलरी खरीदने वालों के लिए यह बदलाव इसलिए अहम है क्योंकि उन्हें सिर्फ सोने की कीमत नहीं, बल्कि मेकिंग चार्ज, हॉलमार्किंग और दूसरे चार्ज को मिलाकर अंतिम बिल देखना चाहिए। हॉलमार्किंग फीस ज्वेलर्स के लिए लागत का हिस्सा है, इसलिए इसका असर कुछ मामलों में ग्राहक के अंतिम बिल पर पड़ सकता है। हालांकि, ग्राहक के बिल पर इसका वास्तविक असर ज्वेलर की प्राइसिंग पर निर्भर करेगा।

कीमती धातु की ज्वेलरी पर 3% GST लागू है। राज्य के अंदर बिक्री होने पर इसमें 1.5% CGST और 1.5% SGST शामिल होता है, जबकि दूसरे राज्य में खरीद पर 3% IGST लगता है। सोने की शुद्धता चाहे जितनी हो, ज्वेलरी पर GST की यह दर समान रहती है।

Festive Season से पहले बदलाव

फीस में बदलाव का समय भी अहम है। सितंबर को आमतौर पर नवरात्रि, दशहरा और दिवाली से पहले ज्वेलरी खरीदारी की तैयारी का समय माना जाता है। इसके बाद वेडिंग सीजन भी शुरू होता है। ऐसे में ज्वेलर्स के लिए नई फीस इन्वेंट्री तैयार करने की लागत का एक हिस्सा होगी।

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Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

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