पर्सनल फाइनेंस
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5 min read | अपडेटेड September 16, 2026, 17:58 IST
सारांश
NPS वात्सल्य स्कीम बच्चों के फ्यूचर को आर्थिक रूप से सुरक्षित करने का एक बेहतरीन जरिया है। पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी यानी PFRDA द्वारा संचालित इस योजना में माता-पिता अपने नाबालिग बच्चों के नाम पर खाता खोल सकते हैं। इसमें 9.5% से 10% तक का रिटर्न मिलता है।

बच्चों के सुरक्षित भविष्य के लिए NPS वात्सल्य योजना में करें निवेश और उठाएं टैक्स छूट का फायदा।
अपने बच्चों के फ्यूचर को आर्थिक रूप से सुरक्षित और मजबूत बनाने के लिए सही समय पर सही जगह निवेश करना बहुत जरूरी होता है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए नेशनल पेंशन सिस्टम का एक खास हिस्सा NPS वात्सल्य योजना शुरू किया गया है। पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी यानी PFRDA द्वारा संचालित और प्रशासित यह योजना खासतौर पर नाबालिग बच्चों के लिए बनाई गई है। सितंबर 2024 में लॉन्च की गई इस स्कीम के तहत माता-पिता या अभिभावक अपने 18 साल से कम उम्र के बच्चों के नाम पर पेंशन खाता खोल सकते हैं और उसे ऑपरेट कर सकते हैं। इस योजना में जमा पैसे पर 9.5% से 10% तक का सालाना रिटर्न मिलता है। जब बच्चा 18 साल की उम्र यानी बालिग हो जाता है, तो वह इस खाते का एकमात्र लाभार्थी बन जाता है और इसे बहुत आसानी से एक रेगुलर NPS खाते में बदला जा सकता है।
NPS वात्सल्य योजना की पात्रता शर्तों की बात करें तो लाभार्थी का भारतीय नागरिक होना जरूरी है। इसके अलावा 18 साल से कम उम्र के नॉन-रेजिडेंट इंडियन यानी एनआरआई और ओवरसीज सिटिजन ऑफ इंडिया यानी ओसीआई बच्चे भी इस योजना के पात्र हैं। खाता खोलते समय अभिभावक या माता-पिता को ही नॉमिनी बनाया जाता है। NPS वात्सल्य में खाता खोलने के लिए कुछ जरूरी डाक्यूमेंट्स जमा करने होते हैं। इसमें नाबालिग बच्चे का बर्थ सर्टिफिकेट, संबंधित राज्य बोर्ड द्वारा जारी किया गया स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट या मैट्रिकुलेशन सर्टिफिकेट, नाबालिग का पासपोर्ट और पैन कार्ड शामिल है।
इस स्कीम में निवेश करने के लिए हर साल कम से कम 1,000 रुपये का योगदान करना अनिवार्य है। इसमें अधिकतम निवेश की कोई सीमा तय नहीं की गई है, यानी माता-पिता अपनी क्षमता के हिसाब से कितना भी पैसा लगा सकते हैं। हालांकि टैक्स लाभ की बात करें तो माता-पिता या अभिभावक को कुल मिलाकर 2 लाख रुपये तक का टैक्स बेनिफिट मिलता है। इसमें इनकम टैक्स एक्ट की धारा 80CCD(1B) के तहत 1.5 लाख रुपये और 50,000 रुपये की अतिरिक्त कटौती शामिल है। NPS खाते पर मिलने वाले सभी टैक्स लाभ NPS वात्सल्य खाते पर भी पूरी तरह से लागू होते हैं।
माता-पिता अपने बच्चे के कॉर्पस को इन्वेस्ट करने के लिए अलग-अलग ऑप्शंस में से चुन सकते हैं। पहला विकल्प डिफॉल्ट चॉइस का है, जो कि मॉडरेट लाइफसाइकिल फंड (LC-50) है, इसमें 50% पैसा इक्विटी में जाता है। दूसरा विकल्प ऑटो चॉइस का है, जिसमें एग्रेसिव लाइफसाइकिल फंड (LC-75 जिसमें 75% इक्विटी), मॉडरेट लाइफसाइकिल फंड (LC-50 जिसमें 50% इक्विटी) या कंजर्वेटिव लाइफसाइकिल फंड (LC-25 जिसमें 25% इक्विटी) को चुन सकते हैं। तीसरा विकल्प एक्टिव चॉइस का है, जहां अभिभावक खुद तय कर सकते हैं कि पैसा कहां लगेगा। इसमें इक्विटी में 75% तक, सरकारी सिक्योरिटीज में 100% तक, कॉरपोरेट डेट में 100% तक और अल्टरनेट एसेट में 5% तक निवेश का बंटवारा किया जा सकता है।
NPS वात्सल्य खाता खोलते समय बच्चे का अलग से बैंक खाता होना या संयुक्त बैंक खाता होना जरूरी नहीं है, लेकिन 18 साल से पहले आंशिक निकासी या स्कीम से बाहर निकलते समय बच्चे का बैंक खाता होना अनिवार्य है। योजना में शामिल होने की तारीख से तीन साल पूरे होने के बाद अभिभावक जमा की गई रकम का 25% तक आंशिक निकासी कर सकते हैं। यह सुविधा बच्चे के 18 साल का होने तक केवल तीन बार ही ली जा सकती है। यह आंशिक निकासी बच्चे की पढ़ाई, 75% से ज्यादा विकलांगता या गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए की जा सकती है। इसके लिए सेंट्रल रिकॉर्डकीपिंग एजेंसी यानी सीआरए पोर्टल के जरिए डिजिटल रिक्वेस्ट भेजी जा सकती है।
बच्चा जब 18 साल का हो जाता है, तो उसके पास स्कीम से बाहर निकलने या इसे रेगुलर NPS खाते में बदलने का विकल्प होता है। इसके लिए 18 साल का होने के तीन महीने के भीतर नया KYC कराना होता है, जिसके बाद पूरा कॉर्पस नए खाते में ट्रांसफर हो जाता है। बाहर निकलने पर कुल जमा कॉर्पस का कम से कम 80% हिस्सा एन्युटी खरीदने के लिए इस्तेमाल किया जाता है और बाकी बची रकम एकमुश्त मिल जाती है। हालांकि अगर कुल कॉर्पस 2.5 लाख रुपये या उससे कम है, तो पूरी रकम एक साथ निकाली जा सकती है। वहीं अगर बच्चे की मृत्यु हो जाती है, तो पूरा कॉर्पस नॉमिनी को वापस कर दिया जाता है। अगर माता-पिता में से किसी एक की मृत्यु होती है, तो दूसरे जिम्मेदार व्यक्ति को फ्रेश केवाईसी के साथ रजिस्टर करना होता है, और दोनों की मृत्यु की स्थिति में लीगल गार्जियन बिना किसी योगदान के बच्चे के बालिग होने तक इस स्कीम को जारी रख सकता है।
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