पर्सनल फाइनेंस
.png)
5 min read | अपडेटेड September 17, 2026, 15:05 IST
सारांश
ईपीएफओ वेज सीलिंग में 12 साल बाद बड़ा बदलाव किया गया है। 15,000 रुपये से लेकर 25,000 रुपये प्रति महीना सैलरी कमाने वाले कर्मचारी अब अनिवार्य रूप से पीएफ, आईपीएस पेंशन और ईडीएलआई इंश्योरेंस के दायरे में आएंगे।

ईपीएफओ की नई वेज सीलिंग लागू होने से 51 लाख से ज्यादा कर्मचारियों को मिलेगा पेंशन और इंश्योरेंस का फायदा।
विश्वकर्मा पूजा के दिन 17 सितंबर 2026 से देश के लाखों नौकरीपेशा लोगों के लिए EPFO का नया नियम लागू हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने एम्प्लॉइज प्रोविडेंट फंड ऑर्गेनाइजेशन यानी ईपीएफओ के तहत अनिवार्य कवरेज के लिए वेज सीलिंग को 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये प्रति महीना करने की मंजूरी दी है। सरकार के इस बड़े फैसले से 51 लाख से ज्यादा अतिरिक्त कर्मचारियों को सीधे तौर पर सोशल सिक्योरिटी का सुरक्षा कवच मिलेगा। आइए 10 बड़ी बातों के जरिए समझते हैं कि इस फैसले से आपकी सैलरी, पेंशन और पीएफ बचत पर क्या असर पड़ने वाला है।
सरकार ने ईपीएफओ की नई वेज सीलिंग को 17 सितंबर 2026 से लागू कर दिया है। 16 सितंबर को केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में इस प्रस्ताव को हरी झंडी दी गई थी। इस फैसले के बाद से ही देश भर के उन सभी संस्थानों में नया नियम प्रभावी हो गया है जो ईपीएफओ के तहत आते हैं।
नए नियमों के तहत अनिवार्य EPFO कवरेज के लिए सैलरी की सीमा में 10,000 रुपये की बढ़ोतरी की गई है। पहले यह लिमिट 15,000 रुपये प्रति महीना थी, जिसे अब बढ़ाकर 25,000 रुपये प्रति महीना कर दिया गया है। इससे कम या इतनी सैलरी पाने वाले कर्मचारी अब EPFO के दायरे में ऑटोमेटिक शामिल होंगे।
पहले जो नए कर्मचारी 15,000 रुपये से अधिक की शुरुआती सैलरी पर नौकरी में शामिल होते थे, वे अनिवार्य पीएफ और पेंशन सुरक्षा से बाहर रह जाते थे। अब 15,000 रुपये से लेकर 25,000 रुपये प्रति महीना सैलरी ब्रैकेट में आने वाले 51 लाख से ज्यादा कर्मचारियों को कानूनन सोशल सिक्योरिटी का पूरा लाभ दिया जाएगा।
नए वेज सीलिंग नियम के तहत शामिल होने वाले कर्मचारियों का पीएफ खाता खुलेगा। इसमें कर्मचारी और कंपनी दोनों की तरफ से योगदान दिया जाएगा। इससे कर्मचारियों की भविष्य के लिए एक बड़ी बचत तैयार होगी, जिस पर EPFO की तय दरों के हिसाब से ब्याज का लाभ भी मिलता रहेगा।
यह बदलाव सिर्फ पीएफ बचत तक सीमित नहीं है। वेज सीलिंग बढ़ने से कर्मचारियों को एम्प्लॉइज पेंशन स्कीम यानी आईपीएस का सुरक्षा कवच भी मिलेगा। 15,000 से 25,000 रुपये की सैलरी वाले कर्मचारी अब पेंशन फंड में योगदान के हकदार होंगे, जिससे रिटायरमेंट के बाद उन्हें हर महीने तय पेंशन राशि मिल सकेगी।
EPFO मेंबर्स को एम्प्लॉइज डिपॉजिट लिंक्ड इंश्योरेंस यानी ईडीएलआई योजना के तहत लाइफ इंश्योरेंस की सुविधा भी मिलती है। नई लिमिट लागू होने से 51 लाख से ज्यादा कर्मचारियों को ईपीएफ मेंबरशिप के साथ ही बीमा का भी ऑटोमेटिक लाभ मिलने लगेगा, जिसके लिए कर्मचारी को अलग से कोई प्रीमियम नहीं देना होता।
नई वेज सीलिंग लागू होने से कर्मचारी की इन-हैंड यानी टेक-होम सैलरी पर कितना असर पड़ेगा, यह उनके सैलरी स्ट्रक्चर पर निर्भर करेगा। जो कर्मचारी अब पहली बार EPFO के अनिवार्य दायरे में आएंगे, उनकी सैलरी से पीएफ कटौती होगी। इससे हाथ में आने वाली सैलरी में थोड़ा बदलाव आ सकता है, लेकिन उनकी कुल बचत और पेंशन फंड मजबूत होगा।
सरकार की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक मौजूदा EPFO मेंबर्स को किसी भी तरह के नए रजिस्ट्रेशन की जरूरत नहीं है। जो नए कर्मचारी 15,000 से 25,000 रुपये की सैलरी में आते हैं, उन्हें कंपनियां अपने आप EPFO पोर्टल पर नामांकित करेंगी। श्रम एवं रोजगार मंत्रालय और EPFO इसे लागू करने की प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी कर रहे हैं।
इस फैसले को लागू करने के लिए सरकार को अपने बजट से अतिरिक्त रकम खर्च करनी होगी। अनुमान के मुताबिक इस फैसले से सरकार का सालाना वित्तीय खर्च लगभग 11,339 करोड़ रुपये हो जाएगा, जो पहले करीब 10,250 करोड़ रुपये था। वहीं अगले पांच सालों में इस योजना पर कुल अनुमानित खर्च लगभग 56,696 करोड़ रुपये आएगा।
EPFO की वेज सीलिंग में आखिरी बार सितंबर 2014 में बदलाव किया गया था, जब इसे 15,000 रुपये किया गया था। साल 2004 से 2014 तक इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ था। पिछले 12 सालों में कर्मचारियों की सैलरी और राज्यों में न्यूनतम वेतन बढ़ा है। इसी वजह से समय के साथ बढ़ती आय और औपचारिक रोजगार के विस्तार को देखते हुए सरकार ने यह सीमा बढ़ाई है।
संबंधित समाचार
लेखकों के बारे में
.png)
अगला लेख