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4 min read | अपडेटेड September 17, 2026, 12:38 IST
सारांश
शेयर बाजार में NSE और हीरो मोटर्स के आईपीओ खुले हुए हैं। NSE आईपीओ पहले दिन 0.16 गुना और हीरो मोटर्स आईपीओ दूसरे दिन 0.86 गुना सब्सक्राइब हुआ है। NSE 43 के P/E रेश्यो पर आया है, जबकि हीरो मोटर्स का P/E रेश्यो 92.7 का है।

NSE और हीरो मोटर्स के आईपीओ में निवेशकों का मिला-जुला रुझान दिख रहा है। Image: Shutterstock
शेयर बाजार में इस हफ्ते दो बड़ी कंपनियों के आईपीओ में पैसा लगाने का मौका मिल रहा है। एक तरफ देश का सबसे बड़ा शेयर एक्सचेंज NSE का आईपीओ 17 सितंबर 2026 को सब्सक्रिप्शन के लिए खुल गया है, तो दूसरी तरफ ऑटो कंपोनेंट बनाने वाली कंपनी हीरो मोटर्स (Hero Motors) के आईपीओ का आज दूसरा दिन है। 17 सितंबर सुबह 11 बजे तक के आंकड़ों के अनुसार, NSE का आईपीओ अपने पहले दिन 0.16 गुना सब्सक्राइब हो चुका है। वहीं हीरो मोटर्स के आईपीओ को दूसरे दिन 0.86 गुना सब्सक्रिप्शन मिला है। दोनों कंपनियां अपने-अपने सेक्टर्स की बड़ी खिलाड़ी हैं, लेकिन इनके बिजनेस मॉडल, कमाई और वैल्यूएशन में काफी अंतर है।
NSE के 22,561.5 करोड़ रुपये के बड़े आईपीओ में पहले दिन सुबह तक सुस्त शुरुआत दिखी है। इसमें रिटेल कैटेगरी में 0.20 गुना, एनआईआई कैटेगरी में 0.25 गुना और क्यूआईबी में 0.00 गुना बोली लगी है। दूसरी तरफ हीरो मोटर्स के 1,000 करोड़ रुपये के आईपीओ को दूसरे दिन निवेशकों का अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है। इसमें रिटेल हिस्सा 1.48 गुना भर चुका है, जबकि एनआईआई कैटेगरी 0.56 गुना और क्यूआईबी हिस्सा 0.01 गुना सब्सक्राइब हुआ है। हीरो मोटर्स में छोटे रिटेल निवेशक तेजी से खरीदारी कर रहे हैं।
बिजनेस के मामले में NSE एक मार्केट एक्सचेंज दिग्गज है, जिसका कैश और F&O ट्रेडिंग में एकतरफा दबदबा है। फाइनेंशियल ईयर 2026 में NSE का ऑपरेशन से रेवेन्यू 16,601 करोड़ रुपये और नेट प्रॉफिट 10,302 करोड़ रुपये रहा था। NSE का बिजनेस मॉडल बहुत अधिक नेट प्रॉफिट मार्जिन वाला है। दूसरी तरफ हीरो मोटर्स एक ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी कंपनी है, जो बीएमडब्ल्यू और डुकाटी जैसी ग्लोबल कंपनियों के लिए पावरट्रेन सोल्यूशन्स, गियर्स और ईवी ट्रांसमिशन बनाती है। फाइनेंशियल ईयर 2026 में हीरो मोटर्स का ऑपरेशन से रेवेन्यू 1,188.35 करोड़ रुपये और नेट प्रॉफिट 41.17 करोड़ रुपये दर्ज किया गया था।
निवेशकों के लिए वैल्यूएशन सबसे अहम पहलू होता है। NSE के आईपीओ का प्राइज बैंड 1,700 रुपये से 1,785 रुपये प्रति शेयर तय किया गया है। 1,785 रुपये के ऊपरी प्राइज बैंड पर NSE का आईपीओ लगभग 43 के P/E रेश्यो पर आ रहा है। यह इसके कॉम्पिटिटर बीएसई के मुकाबले सही वैल्यूएशन पर दिख रहा है। दूसरी तरफ हीरो मोटर्स के आईपीओ का प्राइज बैंड 79 रुपये से 84 रुपये तय हुआ है। 84 रुपये के ऊपरी स्तर पर हीरो मोटर्स का P/E रेश्यो लगभग 92.7 बनता है। इसका मतलब है कि हीरो मोटर्स का आईपीओ अपनी कमाई की तुलना में काफी ज्यादा महंगे वैल्यूएशन पर आया है।
दोनों आईपीओ में निवेश से जुड़े रिस्क फैक्टर भी अलग-अलग हैं। हीरो मोटर्स के लिए सबसे बड़ा जोखिम उसका कस्टमर कंसंट्रेशन है। कंपनी के टॉप 10 ग्राहक उसके कुल रेवेन्यू का लगभग 72.9 पर्सेंट हिस्सा देते हैं। अगर किसी बड़े ग्राहक का ऑर्डर घटता है, तो कंपनी की कमाई पर बड़ा असर पड़ेगा। इसके अलावा हीरो मोटर्स पर लगभग 400 करोड़ रुपये का कर्ज भी है। वहीं NSE के लिए सबसे बड़ा रिस्क सेबी के रेगुलेटरी बदलाव हैं। हाल ही में एफएंडओ ट्रेडिंग के नियमों में हुए बदलावों से NSE की ट्रांजैक्शन चार्ज इनकम पर असर पड़ा है। हालांकि, मजबूत बैलेंस शीट और कैश मार्केट में एकाधिकार होने के कारण NSE में बिजनेस रिस्क कम नजर आता है।
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