पर्सनल फाइनेंस
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3 min read | अपडेटेड October 14, 2026, 14:29 IST
सारांश
एमनेस्टी स्कीम का मकसद ऐसे पीएफ ट्रस्ट की स्थिति को नियमित करना है, जो इनकम टैक्स एक्ट, 1961 के तहत मान्यता प्राप्त हैं, लेकिन जिन्हें कर्मचारी भविष्य निधि और विविध प्रावधान अधिनियम, 1952 या सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के तहत जरूरी छूट का औपचारिक आदेश नहीं मिला है।

कुछ कंपनियां अपने कर्मचारियों के पीएफ का पैसा खुद बनाए गए ट्रस्ट के जरिए मैनेज करती हैं।
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने कंपनियों और अन्य पात्र संस्थानों से अपील की है कि वे पीएफ ट्रस्ट से जुड़ी एमनेस्टी स्कीम 2026 के तहत जल्द से जल्द आवेदन करें। इस योजना के तहत कुछ ऐसे संस्थानों को अपने प्रोविडेंट फंड (PF) ट्रस्ट की कानूनी स्थिति नियमित करने का एक मौका दिया जा रहा है, जिनके पास इनकम टैक्स कानून के तहत मान्यता तो है, लेकिन EPFO से जरूरी छूट का औपचारिक आदेश नहीं है। इस योजना के तहत आवेदन करने की आखिरी तारीख 28 दिसंबर 2026 है।
एमनेस्टी स्कीम का मकसद ऐसे पीएफ ट्रस्ट की स्थिति को नियमित करना है, जो इनकम टैक्स एक्ट, 1961 के तहत मान्यता प्राप्त हैं, लेकिन जिन्हें कर्मचारी भविष्य निधि और विविध प्रावधान अधिनियम, 1952 या सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के तहत जरूरी छूट का औपचारिक आदेश नहीं मिला है।
आसान भाषा में समझें तो कुछ कंपनियां अपने कर्मचारियों के पीएफ का पैसा खुद बनाए गए ट्रस्ट के जरिए मैनेज करती हैं। इसके लिए उन्हें संबंधित कानूनों के तहत जरूरी मंजूरी और छूट प्राप्त करनी होती है। अगर किसी ट्रस्ट को इनकम टैक्स के तहत मान्यता मिली है, लेकिन पीएफ से जुड़े कानून के तहत जरूरी छूट का आदेश नहीं मिला है, तो यह योजना उसे अपनी स्थिति नियमित करने का अवसर देती है।
EPFO की यह योजना सीमित अवधि के लिए लाई गई है। श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के मुताबिक, एमनेस्टी से जुड़े प्रावधान कर्मचारी भविष्य निधि योजना, 2026 के तहत शामिल किए गए थे। यह योजना 29 जून 2026 को अधिसूचित हुई थी। इसके बाद EPFO ने 11 जुलाई को एक सर्कुलर जारी कर आवेदन प्रक्रिया और इससे जुड़ी जरूरी शर्तों की जानकारी दी थी।
आवेदन के लिए छह महीने का समय दिया गया है, जो 28 दिसंबर 2026 को समाप्त होगा। इसलिए पात्र संस्थानों को आखिरी तारीख का इंतजार किए बिना आवेदन प्रक्रिया पूरी करने की सलाह दी गई है।
इस योजना के तहत सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020 के कुछ नियमों में भी छूट दी गई है। इनमें कर्मचारियों की न्यूनतम संख्या, पीएफ ट्रस्ट में जमा कुल रकम और तीन साल तक नियमों का पालन करने से जुड़ी शर्तें शामिल हैं।
इसका मतलब है कि पात्र संस्थानों को पीएफ ट्रस्ट की स्थिति नियमित करने के लिए इन शर्तों के मामले में कुछ राहत मिल सकती है। हालांकि, यह राहत योजना के निर्धारित प्रावधानों और पात्रता की शर्तों के अनुसार ही मिलेगी।
पीएफ ट्रस्ट की स्थिति नियमित होने के बाद संबंधित संस्थान दो विकल्पों में से किसी एक के तहत काम कर सकेंगे। पहला, वे छूट प्राप्त संस्थान यानी एग्जेम्प्ट एस्टैब्लिशमेंट के रूप में काम कर सकते हैं। इसमें कंपनी लागू शर्तों का पालन करते हुए अपने पीएफ ट्रस्ट का प्रबंधन खुद करती है। दूसरा विकल्प बिना छूट वाले संस्थान यानी अनएग्जेम्प्ट एस्टैब्लिशमेंट का है। इस व्यवस्था में कर्मचारियों के पीएफ का प्रबंधन EPFO के सामान्य प्रशासनिक ढांचे के तहत होता है।
इस तरह, एमनेस्टी स्कीम पात्र संस्थानों को अपने पीएफ ट्रस्ट की स्थिति स्पष्ट करने और भविष्य में लागू नियमों के अनुसार काम करने का अवसर देती है। कंपनियों के लिए जरूरी है कि वे आवेदन करने से पहले योजना की पात्रता और संबंधित शर्तों की जांच कर लें।
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