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  1. रेपो रेट बढ़ने के बाद अब EMI बढ़ाएं या लोन की अवधि? समझिए आपके लिए कौन सा विकल्प है सही

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रेपो रेट बढ़ने के बाद अब EMI बढ़ाएं या लोन की अवधि? समझिए आपके लिए कौन सा विकल्प है सही

Shubham Singh Thakur

4 min read | अपडेटेड October 14, 2026, 07:43 IST

सारांश

जब होम लोन की ब्याज दर बढ़ती है, तो बैंक आमतौर पर कर्ज लेने वाले को EMI बढ़ाने या लोन चुकाने की अवधि बढ़ाने का विकल्प दे सकता है। कुछ मामलों में दोनों में बदलाव भी किया जा सकता है। इसके अलावा, आप अपनी आर्थिक स्थिति के अनुसार लोन का कुछ हिस्सा पहले भी चुका सकते हैं।

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EMI बढ़ाने का फायदा यह है कि आपका लोन जल्दी खत्म हो सकता है और कुल ब्याज का खर्च कम हो सकता है।

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने हाल ही में रेपो रेट बढ़ाकर 5.50% कर दिया। इसके बाद होम लोन लेने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई है, क्योंकि ब्याज दरें बढ़ने से लोन चुकाना महंगा हो सकता है। अब तक HDFC Bank, Punjab National Bank (PNB), Indian Bank और Bank of Baroda (BoB) जैसे बैंकों ने अपनी लेंडिंग रेट बढ़ा दी हैं। आने वाले समय में दूसरे बैंक भी ब्याज दरें बढ़ा सकते हैं। अगर आपका होम लोन रेपो रेट जैसे बाहरी बेंचमार्क से जुड़ा है, तो ब्याज दर बढ़ने का असर आपकी EMI या लोन चुकाने की अवधि पर पड़ सकता है। हालांकि, यह बदलाव तुरंत लागू होना जरूरी नहीं है।

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ब्याज दर बढ़ने पर आपके पास क्या विकल्प हैं?

जब होम लोन की ब्याज दर बढ़ती है, तो बैंक आमतौर पर कर्ज लेने वाले को EMI बढ़ाने या लोन चुकाने की अवधि बढ़ाने का विकल्प दे सकता है। कुछ मामलों में दोनों में बदलाव भी किया जा सकता है। इसके अलावा, आप अपनी आर्थिक स्थिति के अनुसार लोन का कुछ हिस्सा पहले भी चुका सकते हैं।

EMI बढ़ाने का फायदा यह है कि आपका लोन जल्दी खत्म हो सकता है और कुल ब्याज का खर्च कम हो सकता है। लेकिन इसके लिए जरूरी है कि आपकी हर महीने की कमाई इतनी हो कि बढ़ी हुई EMI चुकाने के बाद घर के बाकी खर्चों पर दबाव न पड़े। दूसरी तरफ लोन की अवधि बढ़ाने से हर महीने की EMI कम रखी जा सकती है। इससे फिलहाल बजट संभालना आसान होता है, लेकिन लंबे समय तक ब्याज चुकाने के कारण कुल खर्च बढ़ सकता है।

60 लाख रुपये के होम लोन का उदाहरण समझें

अगर आपने 60 लाख रुपये का होम लोन लिया है और अभी 20 साल की अवधि बाकी है, तो 8.5% ब्याज दर पर आपकी EMI करीब 52,069 रुपये होगी। अगर आप अपनी लोन की अवधि लगभग 16 साल करते हैं, तो EMI बढ़कर करीब 57,269 रुपये हो जाएगी। इस तरह ब्याज दर में कोई और बदलाव न होने पर आप करीब 15 लाख रुपये का ब्याज बचा सकते हैं।

इसके उलट, अगर आप 20 साल की जगह 25 साल में लोन चुकाने का विकल्प चुनते हैं, तो EMI घटकर करीब 48,314 रुपये हो सकती है। इससे हर महीने राहत मिलेगी, लेकिन कुल ब्याज का खर्च लगभग 20 लाख रुपये बढ़ सकता है। अगर ब्याज दर 8.5% से बढ़कर 8.75% हो जाती है और लोन की अवधि 20 साल ही रखी जाती है, तो EMI 52,069 रुपये से बढ़कर 53,023 रुपये हो जाएगी।

आपके लिए कौन-सा विकल्प सही है?

अगर आपकी आमदनी नियमित है, इमरजेंसी के लिए पर्याप्त बचत है और बढ़ी हुई EMI आसानी से चुका सकते हैं, तो EMI बढ़ाना या समय-समय पर लोन का कुछ हिस्सा पहले चुकाना फायदेमंद हो सकता है। लेकिन अगर आपकी आमदनी सीमित है या घर के दूसरे खर्चों के कारण बजट पर दबाव है, तो अवधि बढ़ाना फिलहाल बेहतर विकल्प हो सकता है। हालांकि, रिटायरमेंट के करीब पहुंच रहे लोगों को खास तौर पर यह देखना चाहिए कि कमाई घटने के बाद भी वे EMI चुका पाएंगे या नहीं।

आखिर में, सही फैसला वही है जिसमें आपकी हर महीने की आर्थिक स्थिति भी संभली रहे और लंबे समय में ब्याज का बोझ भी कम हो। लोन जल्दी खत्म करने के चक्कर में अपनी इमरजेंसी बचत खत्म करना समझदारी नहीं होगी।

(डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। निवेशक के तौर पर फैसला लेने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें।)

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