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3 min read | अपडेटेड October 14, 2026, 09:18 IST
सारांश
एमडीआर यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट वह शुल्क है, जो डिजिटल पेमेंट स्वीकार करने के बदले दुकानदार या कारोबारी को पेमेंट प्रोसेस करने वाले बैंक या कंपनी को देना होता है। यह शुल्क ग्राहक से सीधे नहीं लिया जाता, बल्कि मर्चेंट पर लागू होता है।

कुछ खास कैटेगरी के ट्रांजैक्शन के लिए अलग शुल्क निर्धारित किया गया है।
नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने यूपीआई (UPI) ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाने के फैसले को फिलहाल टाल दिया है। यह नियम 15 अक्टूबर 2026 से लागू होना था, लेकिन अब इसे दिवाली के तुरंत बाद लागू किया जाएगा। इसके लिए नई तारीख का ऐलान अलग से किया जाएगा। NPCI के इस फैसले के पीछे 3 बड़ी वजहें बताई जा रही है। इसका अहम कारण आने वाला त्योहारों का सीजन है। दिवाली के दौरान खरीदारी, रेस्टोरेंट और दुकानों पर लेन-देन बढ़ता है। ऐसे में दुकानदारों को राहत देने के लिए यह कदम उठाया गया है। त्योहारों के बीच पेमेंट से जुड़ी नई लागत लागू होने से कारोबारियों को परेशानी हो सकती थी। इसके अलावा दुकानदारों और पेमेंट सेवाएं देने वाली कंपनियों को बदलाव के लिए अधिक समय मिलेगा।
एमडीआर लागू करने के प्रस्ताव को लेकर रिटेल कारोबारियों के संगठनों ने विरोध जताया था। कुछ संगठनों ने 2 अक्टूबर को 'नो यूपीआई डे' मनाने का आह्वान भी किया था। हालांकि, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात के बाद यह विरोध वापस ले लिया गया। त्योहारी सीजन में दुकानों पर डिजिटल पेमेंट का इस्तेमाल बढ़ जाता है। ऐसे में शुल्क लागू करने की तारीख आगे बढ़ने से कारोबारियों को फिलहाल अतिरिक्त लागत से राहत मिलेगी।
एमडीआर यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट वह शुल्क है, जो डिजिटल पेमेंट स्वीकार करने के बदले दुकानदार या कारोबारी को पेमेंट प्रोसेस करने वाले बैंक या कंपनी को देना होता है। यह शुल्क ग्राहक से सीधे नहीं लिया जाता, बल्कि मर्चेंट पर लागू होता है।
एनपीसीआई के पिछले सर्कुलर के मुताबिक चुनिंदा पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) यूपीआई ट्रांजैक्शन पर 0.4% एमडीआर लगाने का प्रस्ताव था। यह चार्ज 2,000 रुपये से ज्यादा के ट्रांजैक्शन पर लागू होना था। यानी दुकानों, कारोबारियों और दूसरे मर्चेंट को किए जाने वाले चुनिंदा बड़े यूपीआई पेमेंट इसके दायरे में आते। इस चार्ज की अधिकतम सीमा 300 रुपये तय की गई है। 75,000 रुपये या उससे अधिक के ट्रांजैक्शन पर भी एमडीआर 300 रुपये से ज्यादा नहीं होगा।
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत कुछ खास कैटेगरी के ट्रांजैक्शन के लिए अलग शुल्क निर्धारित किया गया है। इनमें बिल पेमेंट, फ्यूल और एजुकेशन से जुड़े कुछ पेमेंट शामिल हैं। इन पर 5 रुपये का फ्लैट चार्ज लागू होगा। हालांकि, सभी यूपीआई ट्रांजैक्शन पर यह शुल्क नहीं लगेगा। एमडीआर चुनिंदा मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर लागू होगा। इसका मतलब है कि दोस्तों या परिवार के सदस्यों को किए जाने वाले सामान्य पर्सन-टू-पर्सन (P2P) यूपीआई ट्रांसफर को इस नियम के समान नहीं समझना चाहिए।
भारत में यूपीआई का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है। सितंबर 2026 में इसके जरिए औसतन रोजाना 80.2 करोड़ ट्रांजैक्शन हुए। इनका औसत दैनिक मूल्य 97,913 करोड़ रुपये रहा। सितंबर में कुल ट्रांजैक्शन की संख्या सालाना आधार पर 22.6% बढ़कर 24.07 अरब हो गई, जो पिछले साल इसी महीने 19.63 अरब थी। वहीं, ट्रांजैक्शन की कुल वैल्यू 18% बढ़कर 29.37 लाख करोड़ रुपये रही। अब एमडीआर लागू करने की नई तारीख दिवाली के बाद घोषित की जाएगी। तब तक प्रस्तावित शुल्क की मौजूदा संरचना में कोई बदलाव घोषित नहीं किया गया है।
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