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EPF: 5 साल से पहले निकासी पर लग सकता है टैक्स और TDS, पैसा निकालने से पहले जान लें ये नियम

Shubham Singh Thakur

5 min read | अपडेटेड June 10, 2026, 15:02 IST

सारांश

अगर आपने 5 साल की लगातार नौकरी पूरी कर ली है, तो EPF निकासी आमतौर पर पूरी तरह टैक्स-फ्री रहती है। लेकिन 5 साल से पहले निकासी करने पर टैक्स और TDS के नियम लागू हो सकते हैं। यहां इन नियमों के बारे में विस्तार से बताया गया है।

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जरूरत पड़ने पर कर्मचारी रिटायरमेंट से पहले भी EPF का पैसा निकाल सकते हैं। (Image: shutterstock)

एंप्लॉयीज प्रोविडेंट फंड यानी EPF नौकरीपेशा लोगों के लिए एक रिटायरमेंट सेविंग स्कीम है। इसका मकसद कर्मचारियों को रिटायरमेंट के बाद आर्थिक सुरक्षा देना है। हालांकि जरूरत पड़ने पर कर्मचारी रिटायरमेंट से पहले भी EPF का पैसा निकाल सकते हैं। लेकिन यहां एक बात समझना जरूरी है कि हर EPF निकासी टैक्स-फ्री नहीं होती। कई मामलों में इस पर टैक्स और TDS दोनों लग सकते हैं।

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अगर आपने 5 साल की लगातार नौकरी पूरी कर ली है, तो EPF निकासी आमतौर पर पूरी तरह टैक्स-फ्री रहती है। लेकिन 5 साल से पहले निकासी करने पर टैक्स और TDS के नियम लागू हो सकते हैं। यहां इन नियमों के बारे में विस्तार से बताया गया है।

कब निकाल सकते हैं EPF का पैसा?

EPFO के नियमों के मुताबिक कर्मचारी 55 साल की उम्र में रिटायरमेंट के बाद अपना पूरा EPF बैलेंस निकाल सकते हैं। अगर किसी की उम्र 54 साल हो चुकी है, तो वह अपने EPF कॉर्पस का 90% तक निकाल सकता है।

वहीं अगर कोई कर्मचारी नौकरी छूटने के बाद एक महीने तक बेरोजगार रहता है, तो वह अपने EPF का 75% हिस्सा निकाल सकता है। अगर बेरोजगारी दो महीने तक जारी रहती है, तो पूरा EPF बैलेंस निकाला जा सकता है। अच्छी बात यह है कि अगर आपका Aadhaar UAN से लिंक है और नियोक्ता ने आपकी KYC डिटेल्स मंजूर कर रखी हैं, तो EPF निकासी की प्रक्रिया ऑनलाइन भी पूरी की जा सकती है।

क्या पूरा पैसा ही निकाल सकते हैं?

नहीं। EPFO कुछ खास जरूरतों के लिए आंशिक निकासी की भी अनुमति देता है। उदाहरण के लिए मेडिकल इलाज, शादी, बच्चों की उच्च शिक्षा, घर खरीदने या बनाने, होम लोन चुकाने और घर की मरम्मत जैसे कामों के लिए EPF से कुछ रकम निकाली जा सकती है। हालांकि हर उद्देश्य के लिए अलग-अलग शर्तें लागू होती हैं।

EPF निकासी में कौन-कौन से हिस्से होते हैं?

जब आप EPF का पैसा निकालते हैं, तो उसमें तीन हिस्से शामिल होते हैं। पहला, कर्मचारी यानी आपकी अपनी जमा राशि। दूसरा, आपकी जमा राशि पर मिला ब्याज। तीसरा, नियोक्ता (Employer) का योगदान और उस पर मिला ब्याज। इन तीनों हिस्सों पर टैक्स के नियम अलग-अलग हो सकते हैं, इसलिए इन्हें समझना जरूरी है।

EPF निकासी पर टैक्स कैसे लगता है?

आपकी अपनी जमा राशि आमतौर पर निकासी के समय टैक्स के दायरे में नहीं आती। लेकिन इस राशि पर मिला ब्याज "Income From Other Sources" के तहत टैक्सेबल हो सकता है। वहीं नियोक्ता द्वारा जमा किया गया योगदान और उस पर मिला ब्याज "Salary Income" माना जाता है। इसलिए इसे आयकर रिटर्न (ITR) में सैलरी आय के रूप में दिखाना पड़ सकता है।

5 साल का नियम क्यों है सबसे अहम?

EPF निकासी पर टैक्स लगेगा या नहीं, यह काफी हद तक इस बात पर निर्भर करता है कि आपने लगातार कितने साल नौकरी की है। अगर आपने 5 साल की लगातार सेवा पूरी कर ली है और उसके बाद EPF का पैसा निकालते हैं, तो आमतौर पर पूरी निकासी टैक्स-फ्री होती है।

लेकिन अगर 5 साल पूरे होने से पहले EPF निकाल लिया जाता है, तो यह रकम टैक्सेबल हो सकती है। यहां एक अहम बात यह है कि अगर आपने नौकरी बदली है और पुराना EPF बैलेंस नए EPF खाते में ट्रांसफर कर दिया है, तो दोनों नौकरियों की अवधि जोड़कर 5 साल की गणना की जाती है। यहां तक कि 5 साल से कुछ दिन कम होने पर भी निकासी टैक्सेबल हो सकती है।

किन मामलों में 5 साल से पहले भी टैक्स छूट मिल सकती है?

कुछ विशेष परिस्थितियों में 5 साल पूरे न होने पर भी EPF निकासी टैक्स-फ्री रह सकती है। जैसे कि कर्मचारी की खराब स्वास्थ्य स्थिति (Ill Health), कंपनी का बंद हो जाना या ऐसी परिस्थितियां जिन पर कर्मचारी का कोई नियंत्रण न हो और जिसकी वजह से नौकरी समाप्त हो जाए।

अगर कोई कर्मचारी 5 साल की लगातार सेवा पूरी होने से पहले EPF से ₹50,000 से ज्यादा रकम निकालता है, तो EPFO TDS काट सकता है। यदि कर्मचारी ने PAN जमा किया है, तो 10% TDS कटेगा। लेकिन PAN नहीं देने पर TDS की दर बढ़कर 20% हो जाती है।

अगर कर्मचारी की कुल आय टैक्स योग्य सीमा से कम है, तो वह PAN के साथ Form 15G या Form 15H जमा कर सकता है। ऐसी स्थिति में EPFO TDS नहीं काटता। लेकिन अगर PAN दिया गया है और Form 15G/15H जमा नहीं किया गया है, तो 10% TDS लागू हो सकता है।

कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों के लिए क्या नियम हैं?

कई लोग शुरुआत में कॉन्ट्रैक्ट या अस्थायी कर्मचारी के तौर पर काम करते हैं और बाद में कंपनी के स्थायी कर्मचारी बन जाते हैं। ऐसे मामलों में 5 साल की EPF सेवा अवधि आमतौर पर उस तारीख से गिनी जाती है, जब कर्मचारी स्थायी पेरोल पर आया और उसके लिए EPF योगदान शुरू हुआ।

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