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  1. क्या आपके पास भी हैं EPF, NPS और MF? तो कहीं आप भी तो नहीं कर रहे ये बड़ी गलती

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क्या आपके पास भी हैं EPF, NPS और MF? तो कहीं आप भी तो नहीं कर रहे ये बड़ी गलती

विकास तिवारी

3 min read | अपडेटेड August 27, 2026, 14:59 IST

सारांश

यदि आपके पास ईपीएफ, एनपीएस और म्यूचुअल फंड तीनों हैं, तो भी यह जरूरी नहीं कि आपका पोर्टफोलियो सही से डाइवर्सिफाइड हो। केवल प्रोडक्ट्स की संख्या गिनने के बजाय यह देखना जरूरी है कि आपका पैसा वास्तव में इक्विटी और डेट में किस अनुपात में लगा है।

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ईपीएफ, एनपीएस और म्यूचुअल फंड में निवेश करते समय पोर्टफोलियो में इक्विटी और डेट का सही बैलेंस होना जरूरी है।

कई लोग EPF, NPS और म्यूचुअल फंड में पैसे लगाकर यह मान लेते हैं कि उनका निवेश पूरी तरह से सुरक्षित और डाइवर्सिफाइड है। हालांकि, असल में ऐसा नहीं भी हो सकता है। हो सकता है कि आप अपनी जानकारी के बिना शेयर बाजार यानी इक्विटी में बहुत बड़ा दांव लगा रहे हों, या फिर आपका ज्यादा पैसा डेट यानी फिक्स्ड इनकम में पड़ा हो, जिससे लंबे समय में आपके पोर्टफोलियो की ग्रोथ पोटेंशियल कम हो सकती है। ज्यादातर निवेशक केवल अपने पास मौजूद प्रोडक्ट्स की संख्या गिनते हैं, जबकि असली डाइवर्सिफिकेशन इस बात पर निर्भर करता है कि आपका पूरा पैसा इक्विटी, डेट और अन्य एसेट क्लास में किस तरह बंटा हुआ है।

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तीनों प्रोडक्ट्स का आपके पोर्टफोलियो में अलग काम

अपने पोर्टफोलियो का सही बैलेंस समझने के लिए EPF, NPS और म्यूचुअल फंड को तीन अलग डिब्बे मानने के बजाय उनके काम को समझना जरूरी है। एम्प्लॉई प्रॉविडेंट फंड यानी EPF मुख्य रूप से फिक्स्ड इनकम रिटायरमेंट प्रोडक्ट है। ज्यादातर नौकरीपेशा निवेशकों के लिए इसे पोर्टफोलियो के डेट वाले हिस्से के रूप में देखा जा सकता है, जो पोर्टफोलियो को स्थिरता प्रदान करता है। दूसरी तरफ, नेशनल पेंशन सिस्टम यानी NPS में निवेशक की पसंद के हिसाब से इक्विटी, कॉर्पोरेट बॉन्ड्स और सरकारी सिक्योरिटीज में निवेश होता है। NPS अब 100% तक इक्विटी में निवेश करने का ऑप्शन भी देता है। वहीं म्यूचुअल फंड सबसे लचीला विकल्प है, जहां आप इक्विटी, डेट या हाइब्रिड फंड्स का चुनाव कर सकते हैं।

पोर्टफोलियो में इक्विटी और डेट के ओवरलैप का गणित

NPS में इक्विटी का ऑप्शन चुनने के बाद इसका म्यूचुअल फंड के साथ ओवरलैप काफी बढ़ सकता है। मान लीजिए कि 35 साल का एक निवेशक है जिसके पास 10 लाख रुपये EPF में, 8 लाख रुपये इक्विटी ओरिएंटेड NPS में और 12 लाख रुपये इक्विटी म्यूचुअल फंड्स में हैं। कुल 30 लाख रुपये का यह पोर्टफोलियो कागज पर 3 अलग प्रोडक्ट्स में बंटा दिखता है, लेकिन NPS का इक्विटी एलोकेशन जोड़ने के बाद इसका बहुत बड़ा हिस्सा इक्विटी में निवेशित हो जाता है। इसके विपरीत, एक दूसरा निवेशक जिसके पास 15 लाख रुपये EPF में, 8 लाख रुपये डेट ओरिएंटेड NPS में और केवल 5 लाख रुपये इक्विटी म्यूचुअल फंड में हैं, उसका पोर्टफोलियो पूरी तरह से डेट की तरफ झुका हुआ है।

असली निवेश से तय होता है रिस्क

अगर आप NPS में ज्यादा इक्विटी चुनते हैं और साथ ही लार्ज कैप, फ्लेक्सी कैप या इंडेक्स म्यूचुअल फंड्स में भी निवेश करते हैं, तो आप अलग-अलग रास्तों से एक ही जगह पर इक्विटी का दांव लगा रहे होते हैं। पहले उदाहरण वाला निवेशक बहुत ज्यादा रिस्क ले रहा है, जबकि दूसरे निवेशक का पैसा लंबी अवधि में महंगाई दर को पछाड़ने में पीछे छूट सकता है। इसलिए केवल अलग-अलग प्रोडक्ट्स इकट्ठा करने से रिस्क कम नहीं होता है, बल्कि उन प्रोडक्ट्स के भीतर मौजूद असली एसेट एलोकेशन से रिस्क तय होता है। अपने पूरे पोर्टफोलियो में इक्विटी और डेट के सही संतुलन की नियमित जांच करना बेहद जरूरी है।

लेखकों के बारे में

विकास तिवारी
Vikash Tiwary is a finance journalist with 6+ years of newsroom experience. He is currently growing Upstox Hindi, crafting data-driven stories on stocks, personal finance, mutual funds, and global markets, while exploring how AI can simplify finance. His work spans Zee Business, TV9 Bharatvarsh, ABP News, India TV, and Inshorts. He also holds NISM certification.

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