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4 min read | अपडेटेड August 27, 2026, 11:46 IST
सारांश
प्राइमरी मार्केट में आज 27 अगस्त को स्काईवेज एयर, सिंबायोटेक फार्मा लैब और हाय-टेक इंजीनियर्स के आईपीओ पर बोली लगाने का आखिरी दिन है। सबस्क्रिप्शन के ताजा आंकड़ों में हाय-टेक इंजीनियर्स को सबसे ज्यादा 92.95 गुना रिस्पॉन्स मिला है।

आज इन तीनों आईपीओ में पैसा लगाने का आखिरी दिन है।
प्राइमरी मार्केट में आज 27 अगस्त 2026 को हलचल काफी तेज बनी हुई है। स्काईवेज एयर, सिंबायोटेक फार्मा लैब और हाय-टेक इंजीनियर्स के आईपीओ में दांव लगाने का आज आखिरी दिन है। तीन दिनों की बिडिंग के बाद चौथे दिन दोपहर तक तीनों ही आईपीओ को निवेशकों की तरफ से अच्छा रिस्पॉन्स मिला है। खासकर हाय-टेक इंजीनियर्स के आईपीओ में बोलियों की जबरदस्त बरसात देखने को मिली है। अगर आप भी आखिरी दिन इन आईपीओ में पैसे लगाने की योजना बना रहे हैं, तो आपके लिए तीनों कंपनियों का सबस्क्रिप्शन स्टेटस, पैसों का यूज और इनसे जुड़े रिस्क फैक्टर्स को समझना बहुत जरूरी है।
हाय-टेक इंजीनियर्स के आईपीओ को चौथे दिन दोपहर तक कुल 92.95 गुना सबस्क्रिप्शन मिल चुका है। इसमें रिटेल निवेशकों के हिस्से को 102.01 गुना बोलियां मिली हैं, जबकि नॉन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स यानी एनआईआई कैटेगरी में 193.17 गुना सबस्क्रिप्शन दर्ज किया गया है। वहीं क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स यानी क्यूआईबी कैटेगरी में 1.93 गुना आवेदन आए हैं। हाइड्रोलिक फिटिंग्स बनाने वाली यह कंपनी आईपीओ से मिलने वाले फ्रेश इश्यू के पैसों का यूज अपने प्लांट के विस्तार के लिए कैपिटल एक्सपेंडिचर और कर्ज के भुगतान में करेगी। वहीं इसके रिस्क फैक्टर्स की बात करें तो कंपनी की कमाई चुनिंदा बड़े ग्राहकों पर निर्भर है, कच्चे माल यानी स्टील की कीमतों में उतार-चढ़ाव का इस पर सीधा असर पड़ता है और ऑटो व कंस्ट्रक्शन जैसे साइक्लिकल सेक्टर्स से भी रिस्क जुड़ा हुआ है।
लॉजिस्टिक्स और फ्रेट फॉरवर्डिंग का काम करने वाली कंपनी स्काईवेज एयर का आईपीओ चौथे दिन दोपहर तक कुल 10.89 गुना भर चुका है। इस इश्यू में रिटेल कैटेगरी को 11.99 गुना और एनआईआई कैटेगरी को 22.08 गुना सबस्क्रिप्शन मिला है, जबकि क्यूआईबी हिस्से में 0.53 गुना बोलियां आई हैं। कंपनी आईपीओ से मिलने वाली रकम का यूज अपने बकाए कर्ज को चुकाने और वर्किंग कैपिटल की जरूरतों को पूरा करने में करेगी। इसके रिस्क फैक्टर्स की बात करें तो कंपनी का बिजनेस ग्लोबल ट्रेड और फ्रेट रेट्स पर काफी हद तक निर्भर करता है। इसके अलावा कंपनी का नेट प्रॉफिट मार्जिन काफी कम है, वर्किंग कैपिटल की जरूरतें ज्यादा हैं और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में तगड़ा कॉम्पिटिशन भी एक बड़ा रिस्क है।
स्टेरॉयडल एपीआई बनाने वाली कंपनी सिंबायोटेक फार्मा लैब का आईपीओ चौथे दिन दोपहर तक 11.62 गुना सब्सक्राइब हो चुका है। इस आईपीओ में एनआईआई कैटेगरी को सबसे ज्यादा 33.84 गुना और रिटेल हिस्से को 7.98 गुना सबस्क्रिप्शन मिला है, जबकि क्यूआईबी हिस्से में 1.34 गुना बोलियां दर्ज की गई हैं। कंपनी आईपीओ से मिलने वाले फ्रेश इश्यू के फंड का यूज अपने कर्ज का भुगतान करने और जनरल कॉर्पोरेट उद्देश्यों को पूरा करने में करेगी। इसके प्रमुख रिस्क फैक्टर्स में चुनिंदा मुख्य प्रॉडक्ट्स और बड़े ग्राहकों पर ज्यादा निर्भरता शामिल है। इसके अलावा कंपनी का बिजनेस एक्सपोर्ट मार्केट और रेगुलेटरी नियमों पर निर्भर करता है, जबकि इसके मैन्युफैक्चरिंग प्लांट भी मुख्य रूप से मध्य प्रदेश में ही केंद्रित हैं।
तीनों ही कंपनियां अपने आईपीओ से मिलने वाले फंड का एक बड़ा हिस्सा कर्ज चुकाने में करने जा रही हैं, जिससे इनकी बैलेंस शीट मजबूत होगी और ब्याज का बोझ कम होगा। हालांकि, निवेशकों को अंतिम दिन बोली लगाने से पहले कंपनियों के वैल्यूएशन, बिजनेस मॉडल, वर्किंग कैपिटल की जरूरतों और उनके रिस्क फैक्टर्स का सही आकलन कर लेना चाहिए। तीनों कंपनियों के शेयर 1 सितंबर 2026 को शेयर बाजार में लिस्ट होने की उम्मीद है।
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