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  1. FY27 के लिए CBDT ने नोटिफाई किया कॉस्ट इन्फ्लेशन इंडेक्स, क्यों टैक्सपेयर्स के लिए यह इतना अहम?

पर्सनल फाइनेंस

FY27 के लिए CBDT ने नोटिफाई किया कॉस्ट इन्फ्लेशन इंडेक्स, क्यों टैक्सपेयर्स के लिए यह इतना अहम?

Namita Shukla

2 min read | अपडेटेड July 16, 2026, 11:59 IST

सारांश

कॉस्ट इन्फ्लेशन इंडेक्स का इस्तेमाल किसी कैपिटल एसेट्स की बिक्री पर कैपिटल गेन की कैलकुलेशन करते समय ‘सूचकांकित अधिग्रहण लागत’ (इंडेक्स्ड कॉस्ट ऑफ एक्विजिशन) निर्धारित करने के लिए किया जाता है।

लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन

CBDT ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए कॉस्ट इन्फ्लेशन इंडेक्स को 384 पर अधिसूचित किया (Photo: Shutterstock)

इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने अचल संपत्ति, सिक्योरिटीज और गहनों को बेचने से होने वाले लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन की कैलकुलेशन के लिए मौजूदा फाइनेंशियल ईयर का लागत मुद्रास्फीति सूचकांक (Cost Inflation Index, CII) बढ़ा दिया है। टैक्सपेयर्स कैपिटल एसेट्स को बेचने से होने वाले प्रॉफिट की कैलकुलेशन मुद्रास्फीति के प्रभाव के समायोजन के बाद करने के लिए लागत मुद्रास्फीति सूचकांक (सीआईआई) का इस्तेमाल करते हैं। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) की अधिसूचना के मुताबिक फाइनेंशियल ईयर 2026-27 के लिए लागत मुद्रास्फीति सूचकांक 384 निर्धारित किया गया है। फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के लिए सीआईआई 376 था। एएमआरजी ग्लोबल के प्रबंध भागीदार रजत मोहन ने कहा कि लागत मुद्रास्फीति सूचकांक की वार्षिक अधिसूचना यह दर्शाती है कि नए टैक्स सिस्टम के तहत, जहां भी सूचकांकण (इंडेक्सेशन) का लाभ जारी है, वहां सरकार मुद्रास्फीति समायोजन की निष्पक्ष व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।

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उन्होंने कहा कि इससे टैक्सपेयर्स, मूल्यांकनकर्ताओं (Evaluators) और टैक्स एक्सपर्ट्स को लिस्टेड कॉस्ट की कैलकुलेशन में क्लैरिटी मिलती है और व्याख्या से जुड़े विवाद कम होते हैं। लागत मुद्रास्फीति सूचकांक (सीआईआई) की अधिसूचना आयकर अधिनियम, 1961 के तहत हर साल जारी की जाती है।

CII का क्यों होता है इस्तेमाल?

इसका इस्तेमाल किसी कैपिटल एसेट्स की बिक्री पर कैपिटल गेन की कैलकुलेशन करते समय ‘सूचकांकित अधिग्रहण लागत’ (इंडेक्स्ड कॉस्ट ऑफ एक्विजिशन) निर्धारित करने के लिए किया जाता है। आमतौर पर किसी एसेट को ‘लॉन्ग टर्म कैपिटल एसेट’ की कैटेगरी में आने के लिए 36 महीने से अधिक समय तक रखा जाना जरूरी होता है। हालांकि, अचल संपत्ति और अनलिस्टेड शेयर के लिए यह पीरियड 24 महीने और लिस्टेड सिक्योरिटीज के लिए 12 महीने है।

चीजों की कीमतें समय के साथ बढ़ती हैं और मुद्रा की क्रय शक्ति घटती है, इसलिए सीआईआई का इस्तेमाल परिसंपत्तियों के मुद्रास्फीति-समायोजित खरीद मूल्य का निर्धारण करने के लिए किया जाता है, ताकि टैक्सेबल लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन की सही कैलकुलेशन की जा सके।

लेखकों के बारे में

Namita Shukla
Namita Shukla is a seasoned journalist with over 15 years of experience in Hindi media. She has worked with some of the most reputed news organizations, including Navbharat Times, Dainik Jagran, Aaj Tak, and Hindustan Times Hindi. Throughout her career, Namita has reported on a wide range of beats such as national affairs, sports, business, and entertainment, bringing clarity and depth to her reporting. In addition to her journalistic work, she is a certified fact-checker by both Google and Meta, underscoring her commitment to accuracy and ethical journalism in the digital age.

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