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4 min read | अपडेटेड July 13, 2026, 14:28 IST
सारांश
अगर आप नौकरी के साथ पार्ट टाइम काम या फ्रीलांसिंग करके पैसा कमाते हैं, तो आपको अपनी इस कमाई पर भी टैक्स देना होता है। बहुत से लोग सिर्फ सैलरी को इनकम मानते हैं, जो एक बड़ी गलती है।

नौकरी के साथ होने वाली पार्ट टाइम कमाई पर लगने वाले टैक्स का पूरा गणित समझें। | Image: Shutterstock
बहुत से लोग अपनी रेगुलर नौकरी से तो अच्छा पैसा कमाते ही हैं, साथ ही वीकेंड पर फ्रीलांसिंग, यूट्यूब या किसी कंपनी को कंसल्टिंग देकर भी एक्स्ट्रा कमाई कर लेते हैं। लेकिन जब इनकम टैक्स रिटर्न यानी आईटीआर भरने का समय आता है, तो कई लोग सिर्फ अपनी सैलरी को ही अपनी पूरी इनकम मान लेते हैं। यहीं सबसे बड़ी गलती हो जाती है। इनकम टैक्स के नियमों के मुताबिक, आपकी हर तरह की कमाई को टैक्स कैलकुलेशन में शामिल करना बहुत जरूरी होता है। चाहे पैसा आपकी रेगुलर नौकरी से आया हो या फिर किसी पार्ट टाइम काम से, इसे छिपाना भारी पड़ सकता है। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि पार्ट टाइम इनकम पर टैक्स कैसे लगता है और इसे आईटीआर में कैसे दिखाना होता है।
इनकम टैक्स के नियमों के अनुसार, आपकी सभी तरह की कमाई को जोड़कर कुल टैक्सेबल इनकम निकाली जाती है। इसका सीधा मतलब है कि आपकी सैलरी और पार्ट टाइम इनकम दोनों को जोड़ा जाता है और फिर जो रकम बनती है उस पर टैक्स लगाया जाता है। ऐसा बिल्कुल नहीं है कि नौकरी की कमाई पर अलग टैक्स और पार्ट टाइम कमाई पर अलग टैक्स लगेगा। दोनों को जोड़ने के बाद आपकी कुल इनकम जिस भी टैक्स स्लैब में आएगी, आपको उसी के हिसाब से टैक्स देना होगा।
नई टैक्स व्यवस्था में नौकरी करने वाले लोगों को 75 हजार रुपये का स्टैंडर्ड डिडक्शन मिलता है। मान लीजिए किसी व्यक्ति की सालाना सैलरी 12 लाख 75 हजार रुपये है और पार्ट टाइम कमाई 5 लाख रुपये है। इस तरह कुल कमाई 17 लाख 75 हजार रुपये हो जाएगी। इसमें से 75 हजार रुपये का स्टैंडर्ड डिडक्शन घटाने के बाद टैक्सेबल इनकम 17 लाख रुपये बचेगी। नए स्लैब के हिसाब से चार लाख रुपये तक कोई टैक्स नहीं लगेगा। इसके बाद चार से आठ लाख पर 5%, आठ से 12 लाख पर 10%, 12 से 16 लाख पर 15% और 16 से 17 लाख रुपये पर 20% टैक्स लगेगा। इस तरह कुल टैक्स 1 लाख 40 हजार रुपये बनेगा और 4% सेस जोड़कर कुल टैक्स देनदारी करीब 1 लाख 45 हजार 600 रुपये हो जाएगी। अगर कंपनी ने कोई टीडीएस काटा है, तो वह रकम इसमें एडजस्ट हो जाएगी।
आपकी पार्ट टाइम इनकम ITR में कहां दिखेगी, यह आपकी कमाई के तरीके पर निर्भर करता है। अगर आपकी पार्ट टाइम जॉब है तो यह इनकम फ्रॉम अदर सोर्सेज में आएगी। वहीं अगर आप फ्रीलांसिंग या कंसल्टिंग कर रहे हैं, तो यह बिजनेस इनकम मानी जाएगी। अगर आपकी कमाई सिर्फ अदर सोर्सेज से है तो आपको आमतौर पर ITR 2 भरना होगा, जबकि फ्रीलांसिंग या बिजनेस सर्विस के लिए ITR 3 भरना पड़ सकता है।
अगर आपकी कुल टैक्स देनदारी 10 हजार रुपये से ज्यादा बनती है, तो आपको एडवांस टैक्स देना जरूरी हो जाता है। अक्सर साइड इनकम पर कोई टीडीएस नहीं कटता, इसलिए आपको खुद एडवांस टैक्स जमा करना पड़ सकता है। एडवांस टैक्स साल के दौरान ही चार किस्तों में देना होता है। पहली किस्त 15 जून तक कम से कम 15%, दूसरी 15 सितंबर तक 45%, तीसरी 15 दिसंबर तक 75% और 15 मार्च तक पूरा 100% टैक्स जमा करना होता है। अगर आप ऐसा नहीं करते हैं, तो इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 234B और 234C के तहत आपको ब्याज के रूप में पेनाल्टी भरनी पड़ सकती है।
नौकरी करने वाले लोगों को यह ध्यान रखना चाहिए कि कंपनी सिर्फ आपकी सैलरी पर ही टीडीएस काटती है। इसलिए पार्ट टाइम कमाई का टैक्स आपको खुद मैनेज करना होगा। आपके फॉर्म 16 में भी आमतौर पर सिर्फ नौकरी से जुड़ी जानकारी होती है, इसलिए साइड इनकम को ITR में अलग से दिखाना बहुत जरूरी है। आज के समय में एआईएस यानी एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट के जरिए टैक्स विभाग के पास आपकी सारी वित्तीय जानकारी मौजूद होती है, इसलिए कोई भी कमाई छुपाने पर आपको बाद में बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
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