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5 min read | अपडेटेड July 20, 2026, 18:01 IST
सारांश
असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए इनकम टैक्स रिटर्न भरने वाले टैक्सपेयर्स के लिए सीबीडीटी ने नया नियम जारी किया है। अब रिटर्न फाइल करते समय अपने सभी बैंक खातों की जानकारी देना पूरी तरह जरूरी होगा।

इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करते समय सभी बैंक खातों की जानकारी देना अब हुआ जरूरी।| Image: Shutterstock
असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए इनकम टैक्स रिटर्न यानी आईटीआर फाइल करने वाले टैक्सपेयर्स को कई बातों का ध्यान रखना होता है। सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्स यानी सीबीडीटी के नए नियमों के अनुसार अब रिटर्न भरते समय आपको अपने सभी बैंक खातों की जानकारी देना पूरी तरह से अनिवार्य कर दिया गया है। अगर आप अब तक केवल अपने मुख्य सैलरी अकाउंट या रोजमर्रा के इस्तेमाल वाले खाते की डिटेल्स देकर निश्चिंत हो जाते थे, तो यह आपकी एक बड़ी भूल साबित हो सकती है। टैक्स विभाग अब हर एक एक्टिव और इनएक्टिव खाते पर पैनी नजर रख रहा है।
सीबीडीटी के इस नए फैसले के बाद टैक्सपेयर्स को पिछले फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के दौरान चालू रहे हर एक बैंक अकाउंट की पूरी डिटेल्स फॉर्म में भरनी होगी। इसके दायरे में आपके सभी सेविंग्स अकाउंट, करंट अकाउंट और यहां तक कि वे खाते भी आएंगे जिन्हें आपने इस दौरान बंद करवा दिया है। अगर आप किसी भी बैंक खाते की जानकारी को छिपाते हैं या उसे गलत तरीके से भरते हैं, तो टैक्स विभाग की तरफ से आपको स्पष्टीकरण का नोटिस जारी किया जा सकता है। इनकम टैक्स विभाग के नियमों के मुताबिक भारत में मौजूद हर उस बैंक खाते की जानकारी देना जरूरी है जो पिछले साल किसी भी समय चालू था। बहुत से लोग यह सोचते हैं कि जिस खाते में कोई बड़ा लेन-देन नहीं हुआ है, उसे छोड़ सकते हैं, लेकिन यह सोच बिल्कुल गलत है।
नियमों के तहत आपको अपने उन सभी एक्टिव सेविंग्स और करंट अकाउंट्स की जानकारी देनी होगी जिनका आप रोजाना इस्तेमाल करते हैं। इसके साथ ही अगर आपने साल 2025-26 के बीच कोई खाता बंद भी करवा दिया है, तो भी उसकी डिटेल्स देनी होगी क्योंकि नियम में साफ तौर पर साल के दौरान किसी भी समय चालू रहे खाते की बात कही गई है। अगर आपका किसी व्यक्ति के साथ जॉइंट अकाउंट है और आप उसमें एक खाताधारक हैं, तो उसकी जानकारी देना भी उतना ही जरूरी है। हालांकि टैक्सपेयर्स को एक बड़ी राहत भी दी गई है। आप केवल उन खातों की जानकारी देने से बच सकते हैं जिन्हें बैंक की तरफ से आधिकारिक रूप से डॉरमेंट यानी पूरी तरह निष्क्रिय घोषित कर दिया गया है। किसी खाते का सिर्फ लंबे समय से इस्तेमाल न होना उसे डॉरमेंट नहीं बनाता है।
अगर आपका कोई टैक्स रिफंड बनता है, तो सही बैंक अकाउंट की जानकारी के बिना वह आपके पास नहीं पहुंच पाएगा। इनकम टैक्स विभाग आपके रिटर्न को प्रोसेस करने के बाद आपके वैलिडेटेड बैंक खाते में ही पैसे ट्रांसफर करता है। इसके लिए कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना होगा जैसे आपका बैंक खाता आपके पैन कार्ड से जुड़ा होना चाहिए और वह खाता इनकम टैक्स के ई-फाइलिंग पोर्टल पर पहले से वैलिडेट होना चाहिए। बैंकों के आपस में विलय के कारण बदले हुए IFSC कोड को भी एक बार जरूर चेक कर लें। अगर आप बंद हो चुका खाता चुनते हैं या गलत IFSC कोड भरते हैं, तो आपका रिफंड अटक जाएगा और आपको फिर से नई रिक्वेस्ट डालनी पड़ेगी।
आईटीआर फॉर्म में सिर्फ बैंक खाते का नंबर देना ही काफी नहीं है, बल्कि उस खाते में जमा पैसों पर मिलने वाले ब्याज को भी टैक्स फॉर्म में सही जगह दिखाना होगा। टैक्सपेयर्स को सेविंग्स अकाउंट, फिक्स्ड डिपॉजिट यानी FD और रेकरिंग डिपॉजिट यानी RD से मिलने वाले ब्याज को 'इनकम फ्रॉम अदर सोर्सेज' के तहत दिखाना चाहिए। भले ही बैंक ने आपका टीडीएस न काटा हो, फिर भी वह ब्याज आपकी कुल कमाई का हिस्सा माना जाता है और उस पर टैक्स लग सकता है। इसलिए रिटर्न दाखिल करने से पहले अपने बैंक स्टेटमेंट को फॉर्म 26AS और एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट यानी एआईएस के साथ जरूर मिला लें।
इस नए नियम से आम नौकरीपेशा लोगों और छोटे बिजनेस चलाने वाले लोगों को अपनी टैक्स फाइलिंग में अब बहुत अधिक सावधानी बरतनी होगी। पहले लोग केवल अपने मुख्य सैलरी खाते की जानकारी देकर रिटर्न फाइल कर देते थे, लेकिन अब ऐसा करने पर टैक्स विभाग की तरफ से डेटा मिसमैच का नोटिस आ सकता है। डिजिटल ट्रैकिंग मजबूत होने से अब टैक्स चोरी करना पूरी तरह नामुमकिन हो जाएगा।
टैक्सपेयर्स को रिटर्न फाइल करने से ठीक पहले अपने सभी एक्टिव और बंद खातों की एक लिस्ट बना लेनी चाहिए। बैंक से पूरे साल का स्टेटमेंट या पासबुक अपडेट करवाना चाहिए ताकि ब्याज की सही रकम का पता चल सके। इसके साथ ही इनकम टैक्स पोर्टल पर जाकर यह भी चेक करें कि आपका कौन सा अकाउंट रिफंड के लिए वैलिडेट है। एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट में दिख रहे बैंक ब्याज और अपने पासबुक के ब्याज का मिलान जरूर करें। अगर कोई पुराना सैलरी अकाउंट पड़ा हुआ है जिसका अब इस्तेमाल नहीं होता, तो भी उसे आईटीआर फॉर्म में जरूर दिखाएं। सीबीडीटी के इन नियमों के तहत टैक्स फाइलिंग में पारदर्शिता को सबसे ज्यादा महत्व दिया गया है। एक छोटी सी भूल भी आपके रिफंड को रोक सकती है या टैक्स नोटिस की वजह बन सकती है, इसलिए अपनी सभी बैंक डिटेल्स को पहले से ही दुरुस्त रखना समझदारी होगी।
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