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4 min read | अपडेटेड September 22, 2026, 16:48 IST
सारांश
म्यूचुअल फंड एसोसिएशन की हालिया रिपोर्ट के अनुसार अगस्त में डेट फंड्स से 8,127 करोड़ रुपये की निकासी हुई है। ओवरनाइट फंड्स से बड़ा पैसा बाहर निकला है।

डेट फंड्स से आउटफ्लो के बीच निवेशकों का रुझान लिक्विड और मनी मार्केट फंड्स की तरफ बढ़ा है।
एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया यानी AMFI के ताजा आंकड़ों ने म्यूचुअल फंड बाजार की एक नई तस्वीर सामने रखी है। अगस्त के महीने में डेट म्यूचुअल फंड्स से कुल 8,127 करोड़ रुपये का नेट आउटफ्लो दर्ज किया गया है। जुलाई के महीने में जहां डेट फंड्स में 1.87 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का भारी इनफ्लो देखने को मिला था, वहीं अगस्त में स्थिति बदल गई। हालांकि, इन आंकड़ों को देखकर यह समझना गलत होगा कि निवेशकों ने फिक्स्ड इनकम या डेट मार्केट से पूरी तरह दूरी बना ली है। एम्फी के डेटा को गहराई से देखने पर पता चलता है कि यह केवल निकासी नहीं, बल्कि निवेशकों का एक कैटेगरी से दूसरी कैटेगरी में फंड ट्रांसफर है।
डेट फंड्स से हुए कुल आउटफ्लो का सबसे बड़ा कारण ओवरनाइट फंड्स में हुई बिकवाली रही। अगस्त में अकेले ओवरनाइट फंड्स से 30,654 करोड़ रुपये निकाले गए। जबकि जुलाई में इसी कैटेगरी में 40,413 करोड़ रुपये का बड़ा निवेश आया था। जानकारों का मानना है कि ओवरनाइट फंड्स में आने वाला ज्यादातर पैसा संस्थागत यानी कॉर्पोरेट निवेशकों का होता है। कंपनियां अपनी शॉर्ट-टर्म लिक्विडिटी और वर्किंग कैपिटल की जरूरतों को पूरा करने के लिए इस फंड में पैसा रखती हैं और जरूरत पड़ने पर निकाल लेती हैं। इसके अलावा वित्तीय प्रणाली में लिक्विडिटी बढ़ने से ओवरनाइट रेट्स में कमी आई, जिससे निवेशकों ने बेहतर रिटर्न के लिए दूसरे विकल्पों का रुख किया।
डेट कैटेगरी से 8,127 करोड़ रुपये निकलने के बावजूद निवेशकों का भरोसा लिक्विड और मनी मार्केट फंड्स पर कायम रहा। आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त में लिक्विड फंड्स में 19,934 करोड़ रुपये का नया निवेश आया। वहीं मनी मार्केट फंड्स ने भी 11,735 करोड़ रुपये आकर्षित किए। अल्ट्रा शॉर्ट ड्यूरेशन फंड्स में भी 4,257 करोड़ रुपये का इनफ्लो दर्ज किया गया। इसका सीधा मतलब है कि निवेशक लंबी अवधि के जोखिम से बचते हुए अपने पैसे को सुरक्षित और अधिक लिक्विड ऑप्शंस में रखना पसंद कर रहे हैं। इन कैटेगरी में कम समय में स्थिर रिटर्न मिलने की संभावना ज्यादा होती है।
ब्याज दरों में अनिश्चितता और बॉन्ड यील्ड में बढ़त के कारण ज्यादा ड्यूरेशन वाले फंड्स दबाव में नजर आए। अगस्त के दौरान गिल्ट फंड्स से 1,824 करोड़ रुपये की निकासी हुई, जबकि कॉर्पोरेट बॉन्ड फंड्स से 3,190 करोड़ रुपये बाहर निकले। वहीं शॉर्ट ड्यूरेशन फंड्स से भी 4,259 करोड़ रुपये का आउटफ्लो देखने को मिला। बाजार में ब्याज दरों को लेकर बने संशय के कारण निवेशक लंबी अवधि के बॉन्ड में लॉक-इन होने से बच रहे हैं।
भले ही अगस्त में नेट आउटफ्लो दर्ज हुआ हो, लेकिन ओपन एंडेड डेट फंड्स का कुल AUM यानी एसेट अंडर मैनेजमेंट जुलाई के मुकाबले लगभग स्थिर रहा और यह करीब 19.33 लाख करोड़ रुपये पर बना हुआ है। शॉर्ट टर्म रेट्स में नरमी से अल्ट्रा शॉर्ट और लिक्विड फंड्स के रिटर्न को फायदा मिला, जिससे टोटल AUM पर बड़ा असर नहीं पड़ा। इसके अलावा एम्फी ने पहली बार डेट ओरिएंटेड सेक्टोरल फंड्स का डेटा जारी किया, जिसमें 583 करोड़ रुपये का इनफ्लो देखने को मिला। एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले दिनों में जब तक ब्याज दरों का फ्यूचर ट्रेंड पूरी तरह साफ नहीं होता, तब तक निवेशक लिक्विड और मनी मार्केट फंड्स में ही अपना पैसा लगाना सही समझेंगे।
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