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4 min read | अपडेटेड October 23, 2026, 14:27 IST
सारांश
SBI ने अपने बयान में दोहराया कि ग्राहकों के बैंक खातों में जमा बैलेंस और उनका पैसा पूरी तरह सुरक्षित है। बैंक ने ग्राहकों को भरोसा दिलाने की कोशिश की है कि डेटा लीक की घटना का मतलब यह नहीं है कि उनके खाते से पैसे निकल गए हैं या बैंक में जमा उनकी रकम पर कोई खतरा है।

बैंक ने सलाह दी है कि वे सुरक्षित डिजिटल बैंकिंग के नियमों का पालन करें।
देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने ग्राहकों के डेटा लीक होने के मामले में शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को बयान जारी किया है। SBI ने कहा कि जिन ग्राहकों का डेटा लीक से प्रभावित होने की पहचान की गई है, उन्हें व्यक्तिगत रूप से ईमेल और/या वॉट्सऐप के जरिए इसकी जानकारी दे दी गई है। इससे पहले बैंक को इस बात के लिए आलोचना का सामना करना पड़ा था कि उसने स्टॉक एक्सचेंज को तो डेटा लीक की जानकारी दी, लेकिन प्रभावित ग्राहकों को सीधे इसकी सूचना नहीं दी।
SBI ने अपने बयान में दोहराया कि ग्राहकों के बैंक खातों में जमा बैलेंस और उनका पैसा पूरी तरह सुरक्षित है। बैंक ने ग्राहकों को भरोसा दिलाने की कोशिश की है कि डेटा लीक की घटना का मतलब यह नहीं है कि उनके खाते से पैसे निकल गए हैं या बैंक में जमा उनकी रकम पर कोई खतरा है।
हालांकि, ग्राहकों को इस मामले में सावधान रहने की जरूरत है। बैंक ने सलाह दी है कि वे सुरक्षित डिजिटल बैंकिंग के नियमों का पालन करें। किसी भी व्यक्ति के साथ अपना ओटीपी (OTP), पिन (PIN) या पासवर्ड साझा न करें। इसके अलावा, किसी अनजान नंबर से आने वाली संदिग्ध कॉल, मैसेज और ईमेल से भी सतर्क रहें। अगर कोई व्यक्ति बैंक अधिकारी बनकर गोपनीय जानकारी मांगता है, तो उस पर भरोसा करने से पहले उसकी पहचान की पुष्टि करना जरूरी है।
SBI ने कुछ दिनों पहले बताया था कि उसे अपने थ्रेट इंटेलिजेंस सर्विस प्रोवाइडर, डिफेंस साइबर एजेंसी और भारतीय कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (CERT-In) से अलर्ट मिला था। इस अलर्ट में डार्क वेब पर बैंक के ग्राहकों का डेटा सामने आने की आशंका जताई गई थी।
इसके बाद बैंक ने मामले की शुरुआती जांच की। बुधवार, 21 अक्टूबर 2026 को SBI ने स्टॉक एक्सचेंजों को इस घटना की जानकारी दी। बैंक ने बताया कि डार्क वेब पर उपलब्ध लगभग 3.75 लाख रिकॉर्ड की शुरुआती जांच के दौरान ग्राहकों से जुड़े 3,897 रिकॉर्ड ऐसे मिले, जिनमें व्यक्तिगत पहचान से संबंधित जानकारी (PII) शामिल थी।
बैंक के मुताबिक सामने आए डेटा में ग्राहकों के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर, जन्मतिथि, नाम, जेंडर, ईमेल आईडी और घर का पता शामिल था। इसके अलावा, बैंक की शाखा से जुड़ी जानकारी, सीआईएफ (CIF) पहचान संख्या, लीड आईडी और लोन या लीड रिकॉर्ड से संबंधित कुछ अन्य जानकारियां और फाइलों का मेटाडेटा भी इसमें मौजूद था।
इस तरह की जानकारी का गलत इस्तेमाल करके साइबर अपराधी ग्राहकों को निशाना बना सकते हैं। उदाहरण के लिए, कोई ठग बैंक कर्मचारी बनकर फोन कर सकता है और ग्राहक को उसके खाते या लोन से जुड़ी जानकारी बताकर भरोसे में लेने की कोशिश कर सकता है। इसके बाद वह ओटीपी, पासवर्ड या अन्य गोपनीय जानकारी हासिल करने का प्रयास कर सकता है।
SBI ने कहा है कि डेटा की असलियत और उसमें शामिल जानकारी की पूरी जांच करना अभी जरूरी है। बैंक यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि डेटा कहां से सामने आया, कितनी जानकारी प्रभावित हुई और इससे ग्राहकों तथा बैंक को किस तरह का जोखिम हो सकता है।
फिलहाल, बैंक ने प्रभावित ग्राहकों को व्यक्तिगत रूप से सूचना देने की बात कही है। ग्राहकों के लिए जरूरी है कि वे अपने बैंक खाते पर नजर रखें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की स्थिति में तुरंत बैंक से संपर्क करें। ध्यान रखें, बैंक की ओर से पैसा सुरक्षित होने की बात कही गई है, लेकिन डेटा लीक के बाद सतर्क रहना भी उतना ही जरूरी है।
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