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  1. 8th Pay Commission: 8वें वेतन आयोग के लिए 69,000 रुपये मिनिमम सैलरी की मांग, जानें और क्या है खास

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8th Pay Commission: 8वें वेतन आयोग के लिए 69,000 रुपये मिनिमम सैलरी की मांग, जानें और क्या है खास

Upstox

3 min read | अपडेटेड April 16, 2026, 09:38 IST

सारांश

केंद्रीय कर्मचारियों के लिए खुशखबरी है। 8वें वेतन आयोग को लेकर 51 पन्नों का मांग पत्र सौंपा गया है। इसमें न्यूनतम बेसिक पे को बढ़ाकर 69,000 रुपये करने और फिटमेंट फैक्टर को 3.833 करने की मांग की गई है।

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8वें वेतन आयोग की सिफारिशों से केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी में बड़ा बदलाव आ सकता है।

केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए एक बहुत बड़ी खबर सामने आ रही है। 8वें वेतन आयोग के गठन की चर्चाओं के बीच कर्मचारियों के संगठनों ने अपनी मांगों का पिटारा खोल दिया है। नेशनल काउंसिल-जेसीएम (NC-JCM) की स्टाफ साइड ने वेतन आयोग को 51 पन्नों का एक विस्तृत मांग पत्र यानी मेमोरेंडम सौंपा है। इस मेमोरेंडम में कर्मचारियों की सैलरी, पेंशन और भत्तों में भारी बढ़ोतरी का प्रस्ताव रखा गया है। अगर इन मांगों को मान लिया जाता है, तो सरकारी कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति में बहुत बड़ा सुधार देखने को मिल सकता है।

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न्यूनतम सैलरी में भारी बढ़ोतरी की मांग

कर्मचारी संगठनों की सबसे बड़ी और अहम मांग न्यूनतम बेसिक पे को लेकर है। मेमोरेंडम में प्रस्ताव दिया गया है कि 8वें वेतन आयोग के तहत न्यूनतम बेसिक पे को बढ़ाकर 69,000 रुपये किया जाना चाहिए। यह मांग पांच सदस्यों वाले परिवार के खाने, रहने, पढ़ाई, इलाज और अन्य जरूरी खर्चों के आधार पर तैयार की गई है। इसके साथ ही फिटमेंट फैक्टर को भी बढ़ाकर 3.833 करने का सुझाव दिया गया है। फिलहाल यह फैक्टर काफी कम है, जिसके बढ़ने से कर्मचारियों की बेसिक सैलरी और पेंशन में एकमुश्त बड़ी बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। संगठनों का मानना है कि यह कदम कर्मचारियों के जीवन स्तर को ऊंचा उठाने में मददगार साबित होगा।

इंक्रीमेंट और भत्तों पर नए प्रस्ताव

सैलरी के अलावा कर्मचारियों ने सालाना मिलने वाले इंक्रीमेंट पर भी अपना रुख साफ किया है। अभी तक सरकारी कर्मचारियों को 3 पर्सेंट की दर से सालाना इंक्रीमेंट मिलता है, लेकिन स्टाफ साइड ने इसे बढ़ाकर 6 पर्सेंट करने की मांग की है। उनका तर्क है कि मौजूदा समय में महंगाई और रहने के खर्च में जिस तरह से बदलाव आए हैं, उसे देखते हुए पुराना सिस्टम अब ठीक नहीं है। इसके साथ ही एचआरए यानी हाउस रेंट अलाउंस को लेकर भी नई सिफारिशें की गई हैं। एक्स कैटेगरी के शहरों के लिए 40 पर्सेंट, वाई कैटेगरी के लिए 35 पर्सेंट और जेड कैटेगरी के लिए 30 पर्सेंट HRA का प्रस्ताव रखा गया है। इससे शहरों में रहने वाले कर्मचारियों को बड़ी राहत मिलेगी।

पे लेवल्स में बदलाव की डिमांड

एनसी-जेसीएम ने पे स्ट्रक्चर में भी बड़े सुधारों की बात कही है। मांग पत्र में कई मौजूदा पे लेवल्स को आपस में मर्ज करने का सुझाव दिया गया है। जैसे लेवल 2 और 3 को मिलाकर एक ही लेवल 3 बनाने और लेवल 4 और 5 को मिलाकर लेवल 5 करने का प्रस्ताव है। इसी तरह लेवल 7, 8, 9 और 10 में भी बदलाव की बात कही गई है। इसके अलावा लेवल 5 के कर्मचारियों को एक बार के उपाय के तौर पर लेवल 6 में अपग्रेड करने की भी मांग की गई है। इन बदलावों का मकसद सैलरी स्ट्रक्चर को और आसान और पारदर्शी बनाना है ताकि कर्मचारियों को प्रमोशन और पे ग्रेड का सही फायदा मिल सके। स्टाफ साइड के सचिव शिव गोपाल मिश्रा ने बताया कि इस ड्राफ्ट को सभी संबंधित संगठनों के साथ शेयर कर दिया गया है। उन्होंने वेतन आयोग से मांग की है कि मेमोरेंडम जमा करने की आखिरी तारीख को 31 मई 2026 तक बढ़ा दिया जाए। इससे अलग-अलग विभागों को अपनी जरूरतों और मांगों को विस्तार से रखने का मौका मिलेगा।

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Upstox
Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

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