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4 min read | अपडेटेड November 03, 2026, 11:04 IST
सारांश
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया कि ईरान समझौता करना चाहता है। वहीं, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने भी कहा कि उनका देश बातचीत के लिए तैयार है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी कहा कि अमेरिका के साथ समझौता संभव है, लेकिन इसके लिए अमेरिका को ईमानदारी और अच्छी नीयत दिखानी होगी।

शेयर बाजार में निवेश करने वाले लोगों के बीच LTCG टैक्स में राहत को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
भारतीय शेयर बाजार में तेजी का सिलसिला आज 03 नवंबर को लगातार चौथे कारोबारी दिन जारी है। आज के कारोबार में BSE Sensex में करीब 790 अंकों की रैली नजर आई और यह 76,482 के स्तर पर पहुंच गया। दूसरी तरफ Nifty 50 भी करीब 210 अंक बढ़कर 23,650.40 के लेवल पर पहुंच गया। पिछले 4 दिनों में शेयर बाजार 4 फीसदी से ज्यादा उछल चुका है। दरअसल, LTCG टैक्स को खत्म करने की चर्चा तेज हो गई है। इसके साथ ही क्रूड ऑयल के भाव में आज गिरावट दिख रही है। यहां हम जानेंगे कि बाजार में आज की रैली के लिए कौन से फैक्टर्स जिम्मेदार हैं।
पिछले कारोबारी सत्र में कच्चे तेल की कीमतों में करीब 8% की बड़ी गिरावट आई थी। आज 3 नवंबर को भी तेल की कीमतों में कमजोरी जारी है। आज ब्रेंट क्रूड ऑयल का भाव करीब 104 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है। इसकी सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत से समझौते की उम्मीद बढ़ना है। बाजार को लग रहा है कि दोनों देशों के बीच तनाव कम हो सकता है, जिससे दुनिया में तेल की सप्लाई प्रभावित होने का खतरा घटेगा।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया कि ईरान समझौता करना चाहता है। वहीं, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने भी कहा कि उनका देश बातचीत के लिए तैयार है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी कहा कि अमेरिका के साथ समझौता संभव है, लेकिन इसके लिए अमेरिका को ईमानदारी और अच्छी नीयत दिखानी होगी। ईरान चाहता है कि अमेरिका उस पर लगे प्रतिबंध हटाए, मिडिल ईस्ट में अपनी सैन्य मौजूदगी कम करे और ईरान की नाकेबंदी खत्म करे। इन मुद्दों पर बातचीत के लिए मध्यस्थ देश भी प्रयास कर रहे हैं।
शेयर बाजार में निवेश करने वाले लोगों के बीच LTCG टैक्स में राहत को लेकर चर्चा तेज हो गई है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) टैक्स में संभावित राहत का संकेत दिया है। SBI Research की नई रिपोर्ट के मुताबिक अगर सरकार इस टैक्स को पूरी तरह खत्म करती है, तो वित्तीय स्थिति पर बहुत ज्यादा असर नहीं पड़ेगा। रिपोर्ट का अनुमान है कि इस टैक्स को खत्म करने से वित्त वर्ष 2027-28 में सरकार को करीब 40,000 से 50,000 करोड़ रुपये के रेवेन्यू का नुकसान हो सकता है। हालांकि, सरकार के पास इस नुकसान को सहने की पर्याप्त गुंजाइश है। इस खबर के चलते भी बाजार का सेंटीमेंट बेहतर हुआ है।
विदेशी निवेशकों की हाल ही में लगातार खरीदारी ने भी बाजार का माहौल बेहतर किया है। 02 नवंबर को FIIs ने 3114.68 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे हैं। इसके अलावा FIIs ने 28 अक्तूबर को 871.83 करोड़ रुपये और 27 अक्तूबर को 4,240.39 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे थे।
RIL ने FY27 की सितंबर तिमाही में शानदार नतीजे जारी किए हैं, जिससे बाजार का सेंटीमेंट बेहतर हुआ है। इसके चलते बीते कारोबारी दिन यह शेयर 11.60 फीसदी तक उछल गया। RIL का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 33.8% बढ़कर रिकॉर्ड ₹29,550 करोड़ पहुंच गया। वहीं, रेवेन्यू 27.8% बढ़कर ₹3.62 लाख करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर रहा। कंपनी का EBITDA भी 23.9% बढ़कर ₹62,409 करोड़ हो गया। पहली छमाही में कंपनी का मुनाफा पहली बार ₹50,000 करोड़ के पार पहुंचा है।
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