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  1. $114 के करीब पहुंचा क्रूड ऑयल, US फेड के डर और FIIs की भारी बिकवाली के बीच टूटा बाजार

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$114 के करीब पहुंचा क्रूड ऑयल, US फेड के डर और FIIs की भारी बिकवाली के बीच टूटा बाजार

Shubham Singh Thakur

4 min read | अपडेटेड October 23, 2026, 11:19 IST

सारांश

क्रूड ऑयल के भाव में तेजी का सिलसिला आज भी जारी है। आज ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 0.73 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ 114 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई है। सऊदी अरब पर हुए हमलों के बाद मध्य पूर्व से तेल की आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।

Stock Market

Stock Market: अमेरिका-ईरान के बीच चल रहे संघर्ष को करीब 9 महीना हो चुका है।

Stock Market: भारतीय शेयर बाजार में आज 23 अक्तूबर को बिकवाली का जबरदस्त दबाव है। आज के कारोबार में BSE Sensex में करीब 760 अंकों की गिरावट देखी गई और यह 72,487.47 के स्तर तक लुढ़क गया। दूसरी तरफ Nifty 50 भी करीब 280 अंक टूटकर 22407.05 के लेवल पर आ गया। जियो पॉलिटिकल टेंशन के बीच क्रूड ऑयल के भाव में आज एक बार फिर उछाल आया है। इसके अलावा विदेशी निवेशकों (FIIs) की बिकवाली भी जारी है, जिसने मार्केट सेंटीमेंट पर असर डाला है। यहां बताया गया है कि बाजार में आज यह गिरावट क्यों आई है।
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क्रूड ऑयल की बढ़ती कीमतें

क्रूड ऑयल के भाव में तेजी का सिलसिला आज भी जारी है। आज ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 0.73 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ 114 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई है। सऊदी अरब पर हुए हमलों के बाद मध्य पूर्व से तेल की आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के लाल सागर स्थित यानबू बंदरगाह पर हमला किया है। इसके साथ ही देश के एक तेल क्षेत्र और हवाई अड्डे को निशाना बनाया गया है।

अमेरिका-ईरान के बीच चल रहे संघर्ष को करीब 9 महीना हो चुका है। इसके कारण इस साल ब्रेंट ऑयल की कीमतों में 85% से अधिक की वृद्धि हुई है। द न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका और इजराइल ने अगले महीने की शुरुआत में होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के बाद ईरान पर फिर से हमले करने की योजना तैयार की है। इन वजहों से बाजार पर दबाव बढ़ा है।

FIIs की बिकवाली

विदेशी निवेशकों (FIIs) की लगातार बिकवाली ने भी बाजार का मूड खराब किया है। 22 अक्तूबर को FIIs ने भारतीय बाजार में 3,458.70 करोड़ रुपये के शेयर बेचे हैं। इसके अलावा 19 अक्तूबर को 1,148.64 करोड़ रुपये और 15 अक्तूबर को 5,285.37 करोड़ रुपये के शेयर बेचे गए।

US फेड रेट हाइक का डर

अमेरिकी सेंट्रल बैंक फेडरल रिजर्व (Fed) की आगामी पॉलिसी बैठक को लेकर निवेशक सतर्क हैं। ब्याज दरों में आगे बढ़ोतरी होने या लंबे समय तक ऊंची दरें रहने की आशंका बनी हुई है। रॉयटर्स के सर्वे में शामिल लगभग सभी अर्थशास्त्रियों का मानना ​​है कि फेडरल रिजर्व इस महीने ब्याज दरों में बढ़ोतरी नहीं करेगा, बल्कि दिसंबर में दरों को बढ़ाएगा।

16-20 अक्टूबर के बीच हुए रॉयटर्स के सर्वे में शामिल 100 में से 94 अर्थशास्त्रियों का मानना ​​है कि केंद्रीय बैंक 27-28 अक्टूबर की अपनी बैठक में फेडरल फंड रेट को 3.75%-4.00% की रेंज में ही रखेगा, जो कि बाजार की उम्मीदों के अनुरूप है। यह बैठक नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनावों (मिडटर्म इलेक्शन) से कुछ ही दिन पहले होगी।

हालांकि, सभी 100 अर्थशास्त्रियों को उम्मीद है कि दिसंबर में ब्याज दरें बढ़ाई जाएंगी। पिछले महीने के सर्वे में ऐसा मानने वालों की संख्या आधी से भी कम थी, जो अब काफी बढ़ गई है। सितंबर में फेडरल ओपन मार्केट कमिटी ने सर्वसम्मति से ब्याज दरों में 25 बेसिस पॉइंट्स की बढ़ोतरी की थी।

रुपये पर दबाव

पिछले कुछ समय में डॉलर के मुकाबले रुपये की वैल्यू में लगातार कमजोरी देखी गई। हालांकि आज शुक्रवार को शुरुआती कारोबार में कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और विदेशी फंड की निकासी के बीच रुपया एक सीमित दायरे में रहा। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले यह 3 पैसे बढ़कर 94.78 पर पहुंच गया। फॉरेक्स ट्रेडर्स ने बताया कि वैश्विक स्तर पर डॉलर की मजबूती और ब्रेंट क्रूड की कीमतों के 114 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बने रहने जैसे व्यापक आर्थिक दबावों के कारण रुपया दबाव में है।

(डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें।)

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