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4 min read | अपडेटेड October 23, 2026, 10:41 IST
सारांश
पहले निर्धारित समयसीमा में इस मात्रा का आयात करना था, लेकिन अब कारोबारियों को इसके लिए 31 दिसंबर तक का समय मिल गया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि समयसीमा बढ़ाने के अलावा पहले से लागू अन्य शर्तों में बदलाव नहीं किया गया है।
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चीनी आयात पर सरकार का बड़ा फैसला, अब 31 दिसंबर तक मिलेगी छूट (Photo: Shutterstock)
केंद्र सरकार ने कच्ची चीनी के ड्यूटी फ्री आयात की समयसीमा दो महीने बढ़ाकर 31 दिसंबर, 2026 कर दी है। इससे आयातकों, चीनी मिलों और रिफाइनरियों को निर्धारित कोटे के तहत चीनी मंगाने के लिए अतिरिक्त समय मिलेगा। पहले यह समयसीमा 31 अक्टूबर तक थी। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अधीन विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) ने 19 अक्टूबर को जारी अधिसूचना के जरिए यह बदलाव किया है। सरकार ने ड्यूटी फ्री आयात की कुल सीमा में कोई बदलाव नहीं किया है। इसके तहत टैरिफ रेट कोटा (टीआरक्यू) व्यवस्था के अंतर्गत 10 लाख मीट्रिक टन कच्ची चीनी का आयात बिना सीमा शुल्क किया जा सकता है। पहले निर्धारित समयसीमा में इस मात्रा का आयात करना था, लेकिन अब कारोबारियों को इसके लिए 31 दिसंबर तक का समय मिल गया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि समयसीमा बढ़ाने के अलावा पहले से लागू अन्य शर्तों में बदलाव नहीं किया गया है।
सरकार का यह कदम घरेलू बाजार में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने और कीमतों में तेजी के दबाव को कम करने के प्रयासों से जुड़ा है। भारत दुनिया में चीनी का सबसे बड़ा उपभोक्ता है। ऐसे में घरेलू उत्पादन, उपलब्ध भंडार और मांग के बीच संतुलन बनाए रखना महत्वपूर्ण है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकार ने अगस्त में घरेलू बाजार में चीनी की कीमतों में तेज बढ़ोतरी के बाद ड्यूटी फ्री आयात की अनुमति दी थी। हालांकि, आयात की लागत और घरेलू बाजार की कीमतों के बीच अंतर के कारण निर्धारित कोटे का पूरा उपयोग नहीं हो सका। उद्योग से जुड़े अनुमानों के अनुसार, 10 लाख टन के कोटे में से अक्टूबर के दूसरे हिस्से तक करीब तीन लाख टन चीनी का ही आयात हुआ था। ऐसे में समयसीमा बढ़ाने से शेष मात्रा मंगाने के लिए अतिरिक्त अवसर मिल सकता है।
चीनी उद्योग के सामने आगामी पेराई सत्र में उत्पादन को लेकर भी अनिश्चितताएं हैं। मौसम की परिस्थितियों, अल नीनो के संभावित प्रभाव और गन्ने की पैदावार से जुड़े जोखिमों के कारण उत्पादन प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। यदि घरेलू उत्पादन अनुमान से कम रहता है, तो बाजार में उपलब्धता बनाए रखने के लिए आयात की भूमिका बढ़ सकती है।
कच्ची चीनी को आयात के बाद रिफाइनरी में प्रसंस्कृत कर उपयोग योग्य चीनी में बदला जाता है। इससे आयातकों को घरेलू बाजार की जरूरतों के अनुरूप आपूर्ति करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि शेष कोटे के तहत कितनी चीनी का आयात होता है और वह कितनी जल्दी बाजार में पहुंचती है।
सरकार के इस फैसले का असर शुगर स्टॉक्स पर भी देखने को मिल रहा है। श्री रेणुका शुगर्स, बलरामपुर चीनी मिल्स और धामपुर शुगर मिल्स समेत तमाम शुगर स्टॉक्स आज रेड में ट्रेड हो रहे हैं। शुगर स्टॉक्स में 1 से 4% तक की गिरावट देखने को मिली है। ड्यूटी फ्री आयात से घरेलू सप्लाई बढ़ने और कीमतों पर दबाव पड़ने की स्थिति में चीनी मिलों की बिक्री प्राप्तियों और मुनाफे पर असर पड़ सकता है। दूसरी ओर, रिफाइनिंग और आयात से जुड़े कारोबार को अतिरिक्त अवसर मिल सकते हैं।
कुल मिलाकर, आयात की समयसीमा बढ़ाने का उद्देश्य निर्धारित कोटे का उपयोग आसान बनाना और घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता को सहारा देना है। आने वाले सप्ताहों में आयात की वास्तविक मात्रा और उत्पादन संबंधी आंकड़े इस कदम के प्रभाव को स्पष्ट करेंगे।
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