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4 min read | अपडेटेड October 19, 2026, 16:10 IST
सारांश
आज के कारोबार में Bajaj Hindusthan Sugar के शेयर 5.59 फीसदी गिरकर 20.08 रुपये के भाव पर आ गए। Shree Renuka Sugars में 7 फीसदी की गिरावट है। इसके अलावा Balrampur Chini Mills में 3.33 फीसदी, EID Parry में 3.22 फीसदी और Dhampur Sugar में 4 फीसदी से ज्यादा की कमजोरी देखी गई।
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चीनी कंपनियों के शेयरों पर दबाव की मुख्य वजह एथेनॉल उत्पादन से जुड़ा सरकारी फैसला है।
चीनी कंपनियों के शेयरों में आज 19 अक्टूबर को बिकवाली का जबरदस्त दबाव है। आज कई शेयरों के भाव 6 फीसदी तक टूट गए हैं। दरअसल, रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक सरकार ने एथेनॉल बनाने के लिए चीनी के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है। रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि सरकार ने सप्लाई वर्ष 2026-27 के लिए गन्ने के रस, चीनी के सिरप और बी-हैवी मोलासेस से बनने वाले एथेनॉल की खरीद को अपने नए टेंडर से बाहर कर दिया है। इस फैसले का असर चीनी कंपनियों की कमाई और एथेनॉल उत्पादन में किए गए निवेश पर पड़ सकता है। आइए समझते हैं कि सरकार ने यह फैसला क्यों लिया और इससे चीनी कंपनियों पर क्या असर हो सकता है।
आज के कारोबार में Bajaj Hindusthan Sugar के शेयर 5.59 फीसदी गिरकर 20.08 रुपये के भाव पर आ गए। Shree Renuka Sugars में 7 फीसदी की गिरावट है। इसके अलावा Balrampur Chini Mills में 3.33 फीसदी, EID Parry में 3.22 फीसदी, Triveni Engineering and Industries में 1.54 फीसदी और Dhampur Sugar में 4 फीसदी से ज्यादा की कमजोरी देखी गई।
चीनी कंपनियों के शेयरों पर दबाव की मुख्य वजह एथेनॉल उत्पादन से जुड़ा सरकारी फैसला है। इससे कंपनियों के पास गन्ने और उससे बनने वाले उत्पादों को चीनी या एथेनॉल बनाने में इस्तेमाल करने की आजादी सीमित हो सकती है। ऐसे में कंपनियों के लिए बाजार की मांग और कीमतों के हिसाब से उत्पादन का फैसला लेना मुश्किल हो सकता है।
सरकारी तेल विपणन कंपनियों यानी ओएमसी (OMCs) ने पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने के लिए सप्लाई वर्ष 2026-27 का नया टेंडर जारी किया है। यह सप्लाई वर्ष नवंबर 2026 से अक्टूबर 2027 तक चलेगा। भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) ने 16 अक्टूबर को यह टेंडर जारी किया था।
इस टेंडर में गन्ने के रस, चीनी के सिरप और बी-हैवी मोलासेस से बने एथेनॉल की खरीद शामिल नहीं है। इसके अलावा, मक्का से बनने वाले एथेनॉल के लिए खरीद मूल्य भी घटाकर 68.86 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है, जो पहले 71.86 रुपये प्रति लीटर था। टेंडर के तहत लगभग 1100 करोड़ लीटर एथेनॉल की खरीद के लिए बोलियां मांगी गई हैं। इसका उद्देश्य पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिलाने की जरूरत को पूरा करना है।
भारत दुनिया में चीनी की सबसे ज्यादा खपत करने वाला देश है। सरकार चाहती है कि घरेलू बाजार में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता बनी रहे और कीमतों पर नियंत्रण रखा जा सके। त्योहारी सीजन के दौरान भारत में चीनी की कीमतें 10% से ज्यादा बढ़ चुकी हैं। इससे खाद्य महंगाई बढ़ने की चिंता भी पैदा हुई है। इसके अलावा, प्रमुख चीनी उत्पादक राज्यों में कमजोर बारिश के कारण उत्पादन प्रभावित होने की आशंका जताई गई है।
चीनी कंपनियां गन्ने से केवल चीनी ही नहीं बनातीं, बल्कि उससे एथेनॉल का उत्पादन भी करती हैं। एथेनॉल की मांग बढ़ने से कंपनियों को अतिरिक्त कमाई का अवसर मिलता है। इसके लिए कई कंपनियों ने उत्पादन क्षमता बढ़ाने में निवेश भी किया है।
अब चीनी से बनने वाले एथेनॉल की सरकारी खरीद पर रोक लगने से कंपनियों के लिए इन क्षमताओं का इस्तेमाल करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। इससे उनके मुनाफे और निवेश पर मिलने वाले रिटर्न पर दबाव पड़ने की आशंका है।
भारत पेट्रोल में 20% तक एथेनॉल मिलाने की व्यवस्था यानी ई20 (E20) को देशभर में अपना चुका है। इसका उद्देश्य कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना और प्रदूषण घटाना है। हालांकि, नए फैसले के बाद एथेनॉल उत्पादन के लिए मक्का और अन्य अनाज जैसे विकल्पों की अहमियत बढ़ सकती है। अब एथेनॉल की उपलब्धता, उसकी खरीद कीमत और उत्पादन क्षमता यह तय करने में अहम होंगे कि देश की एथेनॉल ब्लेंडिंग जरूरतें किस तरह पूरी की जाती हैं।
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