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  1. Taiwan के बाद South Korea भी निकला आगे, ग्लोबल मार्केट-कैप रैंकिंग में अब 7वें नंबर पर भारत

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Taiwan के बाद South Korea भी निकला आगे, ग्लोबल मार्केट-कैप रैंकिंग में अब 7वें नंबर पर भारत

Upstox

3 min read | अपडेटेड June 02, 2026, 13:21 IST

सारांश

Stock Market: दक्षिण कोरिया में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन बढ़कर करीब 5 ट्रिलियन डॉलर हो गया है, जबकि भारत का मार्केट कैप घटकर 4.8 ट्रिलियन डॉलर रह गया है।

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Stock Market: पिछले हफ्ते ताइवान भी भारतीय शेयर बाजार से आगे निकल गया था।

भारतीय शेयर बाजार की वैश्विक रैंकिंग में लगातार गिरावट देखने को मिल रही है। भारत दुनिया के सबसे बड़े शेयर बाजारों की लिस्ट में सातवें नंबर पर फिसल गया है। दक्षिण कोरिया ने भारत को पीछे छोड़ दिया है। इसके पहले पिछले हफ्ते ताइवान भी भारत से आगे निकल गया था। यानी कुछ ही समय में भारत पांचवें स्थान से फिसलकर सातवें स्थान पर पहुंच गया है।

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AI ने दी दक्षिण कोरियाई बाजार को मजबूती

ब्लूमबर्ग के आंकड़ों के अनुसार दक्षिण कोरिया में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप बढ़कर करीब 5 ट्रिलियन डॉलर हो गया है, जबकि भारत का मार्केट कैप घटकर 4.8 ट्रिलियन डॉलर रह गया है। दक्षिण कोरियाई बाजार में यह तेजी मुख्य रूप से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) थीम की वजह से आई है, जिसने वहां के टेक्नोलॉजी शेयरों को जबरदस्त बढ़ावा दिया है।

दक्षिण कोरिया की दिग्गज कंपनियां Samsung Electronics और SK Hynix AI और सेमीकंडक्टर कारोबार की बदौलत तेजी से बढ़ी हैं। इसी तरह ताइवान में TSMC का बाजार पर बड़ा प्रभाव है। इन देशों के शेयर बाजारों में कुछ बड़ी टेक कंपनियों का दबदबा है, जिसके कारण AI से जुड़ी तेजी का सीधा फायदा पूरे बाजार को मिला।

इसके उलट भारत को मार्केट एक्सपर्ट्स "एंटी-AI ट्रेड" कह रहे हैं। इसका मतलब है कि भारत के शेयर बाजार में टेक्नोलॉजी और AI से जुड़ी बड़ी कंपनियों का वजन तुलनात्मकर रूप से कम है, इसलिए वैश्विक AI बूम का उतना फायदा भारतीय बाजार को नहीं मिला। जहां दक्षिण कोरिया का KOSPI इंडेक्स इस साल करीब 99% चढ़ा है, ताइवान का प्रमुख इंडेक्स 55% और अमेरिका का टेक्नोलॉजी केंद्रित Nasdaq 21% ऊपर है, वहीं भारतीय शेयर बाजार लगभग 11% गिर चुका है।

भारत के सामने ये भी हैं चुनौतियां

भारत के सामने सिर्फ बाजार की कमजोरी ही नहीं, बल्कि कई आर्थिक चुनौतियां भी हैं। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने देश की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ाया है। भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए तेल महंगा होने से चालू खाता घाटा (CAD), राजकोषीय घाटा, महंगाई और आर्थिक वृद्धि सभी प्रभावित होते हैं।

इसके अलावा, मानसून को लेकर भी चिंताएं बढ़ गई हैं। मौसम विभाग (IMD) ने इस साल सामान्य से कम बारिश का अनुमान जताया है। यदि बारिश कमजोर रहती है तो कृषि उत्पादन, ग्रामीण मांग और आर्थिक विकास पर असर पड़ सकता है। साथ ही खाद्य महंगाई बढ़ने का भी खतरा रहेगा।

एक्सपर्ट्स का मानना है कि मार्च तिमाही (Q4FY26) के नतीजे तो ठीक रहे, लेकिन जून तिमाही (Q1FY27) चुनौतीपूर्ण हो सकती है। हालांकि, यदि पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव कम होते हैं और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आती है, तो यह भारतीय बाजार और अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी राहत साबित हो सकता है।

लेखकों के बारे में

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Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

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