मार्केट न्यूज़
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4 min read | अपडेटेड June 27, 2026, 15:54 IST
सारांश
HDFC बैंक ने कहा कि उसे बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स या उसकी समितियों के रिकॉर्ड, मीटिंग के कागजात या बातचीत में ऐसा कोई सबूत नहीं मिला जो उनके बयान में उठाए गए मुद्दों का समर्थन करता हो।
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लीगल रिव्यू में HDFC बैंक को पूर्व चेयरमैन की चिंताओं को लेकर नहीं मिला कोई सबूत
प्राइवेट सेक्टर के एचडीएफसी बैंक ने कहा है कि दो बाहरी लॉ कंपनियों की एक इंडिपेंडेंट लीगल रिव्यू में पूर्व चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती के अपने रेजिग्नेशन लेटर या बाद के पब्लिक बयानों में जताई गई चिंताओं को साबित करने वाला कोई सबूत नहीं मिला। बैंक ने कहा कि 24 मार्च को घोषित इस समीक्षा में यह जांच की गई कि क्या चक्रवर्ती ने जो चिंता जतायी उसका कोई सबूत है? इस बात का पता लगाया गया कि क्या उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान कोई असहमति दर्ज कराई थी और क्या ऐसी किसी असहमति का समाधान किया गया था? चक्रवर्ती ने एथिकल चिंताओं का हवाला देते हुए देश के दूसरे सबसे बड़े बैंक एचडीएफसी बैंक के चेयरमैन पद से इस्तीफा दे दिया था। यह पहली बार था जब एचडीएफसी बैंक के किसी पार्ट-टाइम चेयरमैन ने बीच में ही पद छोड़ दिया, जिससे बैंक के कामकाज पर चिंताएं पैदा हुईं। एचडीएफसी बैंक के शेयरों में सोमवार को इसका असर देखने को मिल सकता है। एचडीएफसी के शेयर गुरुवार को .35% यानी कि 2.80 रुपये चढ़कर 796 रुपये पर क्लोज हुए थे।
चक्रवर्ती ने 17 मार्च के अपने इस्तीफे में कहा था, ‘मैंने पिछले दो सालों में बैंक के अंदर कुछ घटनाएं और जो तौर-तरीकों को देखा है, वह मेरे व्यक्तिगत मूल्यों और नैतिकता के हिसाब नहीं हैं। यही मेरे फैसले का आधार है।’ एचडीएफसी बैंक ने शुक्रवार को शेयर बाजार को दी सूचना में कहा कि यह समीक्षा विल्सन सोनसिनी गुडरिच एंड रोसाटी, पीसी और वाडिया गांधी एंड कंपनी ने तीन महीने में की है। इसमें कहा गया है कि लॉ कंपनियों ने चक्रवर्ती के इस्तीफे से पहले के दो सालों में बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स और समिति की बैठकों के ब्योरे और एजेंडा पत्रों की समीक्षा की, हजारों डॉक्यूमेंट्स की जांच की और समितियों के चेयरमैन, मैनेजिंग डायरेक्टर और चीफ एग्जिक्यूटिव ऑफिसर (CEO) और सीनियर एग्जिक्यूटिव्स समेत इंडिपेंडेंट डायरेक्टर्स से पूछताछ की। लॉ कंपनियों ने चक्रवर्ती से समीक्षा में भाग लेने के लिए कई बार अनुरोध किया, लेकिन उनका इंटरव्यू नहीं हो सका।
इसमें कहा गया है, ‘व्यापक कानूनी समीक्षा पूरी करने के बाद, लॉ कंपनियों ने पाया कि चक्रवर्ती के बयान और उनके इम्प्लिकेशन्स रिकॉर्ड और गवाहों के इंटरव्यू से साबित नहीं हुए।’ समीक्षा में पाया गया कि चक्रवर्ती ने जिन बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की मीटिंग्स में हिस्सा लिया उनके ब्योरों को व्यापक रूप से लिखा और उसकी समीक्षा के साथ अप्रूवल प्रोसेस का पालन किया जाता था। इससे उन्हें कोई भी असहमति या चिंता दर्ज करने का मौका मिलता था। बैंक ने कहा कि उसे बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स या उसकी समितियों के रिकॉर्ड, मीटिंग के कागजात या बातचीत में ऐसा कोई सबूत नहीं मिला जो उनके बयान में उठाए गए मुद्दों का समर्थन करता हो। बैंक ने कहा कि गवाहों से पूछताछ में भी चक्रवर्ती के आरोपों की पुष्टि नहीं हुई।
लॉ कंपनियों ने इस्तीफे के बाद चक्रवर्ती के सार्वजनिक बयानों में ‘दुबई मामले’ के जिक्र की भी जांच की। उन्हें ऐसा कोई सबूत नहीं मिला जिससे पता चले कि उन्होंने अपने निजी मूल्यों और नैतिकता से जुड़ी चिंताएं जताई हों या उस मामले या किसी अन्य मुद्दे पर बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स या उसकी समिति के फैसलों से असहमति जताई हो। एचडीएफसी बैंक ने 20 मार्च को अपनी दुबई अंतरराष्ट्रीय वित्तीय केंद्र (Dubai International Financial Centre, DIFC) ब्रांच में नए ग्राहक जोड़ने में कमियों के कारण तीन कर्मचारियों की सेवाएं खत्म कर दीं। गलत तरीके से बिक्री के आरोपों के बाद, लोकल रेगुलेटर दुबई फाइनेंशियल सर्विसेज अथॉरिटी ने पिछले साल सितंबर में एचडीएफसी बैंक को अपनी डीआईएफसी ब्रांच में नए ग्राहक जोड़ने से रोक दिया था। एचडीएफसी बैंक ने कानूनी समीक्षा के नतीजों का हवाला देते हुए कहा, ‘कुल मिलाकर, जो सबूत देखे गए वे चक्रवर्ती के बयान से मेल नहीं खाते हैं। बाहरी लॉ कंपनियों की समीक्षा में उस बयान का कोई ठोस आधार नहीं मिला।’
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