return to news
  1. शेयर बाजार की भारी गिरावट में स्वाहा हुए अरबों रुपये, सिर्फ इस एक कंपनी की चमकी किस्मत

मार्केट न्यूज़

शेयर बाजार की भारी गिरावट में स्वाहा हुए अरबों रुपये, सिर्फ इस एक कंपनी की चमकी किस्मत

Upstox

4 min read | अपडेटेड May 18, 2026, 07:33 IST

सारांश

बीते पांच कारोबारी दिनों में भारतीय शेयर बाजार को बड़ा नुकसान हुआ है। सेंसेक्स और निफ्टी में ढाई पर्सेंट से ज्यादा की गिरावट आई, जिससे टॉप 10 में से 9 कंपनियों का मार्केट कैप 3.12 लाख करोड़ रुपए घट गया। रिलायंस को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है, जबकि भारती एयरटेल को बड़ा फायदा मिला है।

share-market-crash-reliance-loss-

शेयर बाजार में भारी गिरावट के बीच रिलायंस को लगा बड़ा झटका और एयरटेल को हुआ मुनाफा।

भारतीय शेयर बाजार के लिए पिछला हफ्ता बेहद खराब साबित हुआ है। बीते पांच कारोबारी दिनों में बाजार के भीतर ऐसी बड़ी गिरावट आई कि निवेशकों को बहुत मोटा नुकसान उठाना पड़ा है। आंकड़ों को देखें तो इस दौरान प्रमुख इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में ही ढाई पर्सेंट से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई है। इस बड़ी मंदी का सीधा असर शेयर बाजार की टॉप 10 सबसे बड़ी कंपनियों के वैल्यूएशन पर पड़ा है, जिसमें से नौ कंपनियों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ा है। बाजार में आए इस उतार-चढ़ाव ने निवेशकों की चिंता को काफी बढ़ा दिया है।

Open FREE Demat Account within minutes!
Join now

रिलायंस को लगा सबसे बड़ा झटका

देश की सबसे बड़ी कंपनियों के मार्केट कैपिटलाइजेशन में बीते पांच दिनों में कुल 3.12 लाख करोड़ रुपए की भारी कमी आई है। इस नुकसान की सबसे बड़ी गाज रिलायंस इंडस्ट्रीज पर गिरी है। अकेले रिलायंस इंडस्ट्रीज की मार्केट वैल्यू 1,34,445.77 करोड़ रुपए गिरकर 18,08,420.81 करोड़ रुपए पर आ गई है। इसके अलावा देश के सबसे बड़े सरकारी लेंडर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की वैल्यू में भी 52,245.3 करोड़ रुपए की कमी आई और यह घटकर 8,88,862.32 करोड़ रुपए रह गई। आईटी सेक्टर की बड़ी कंपनी टीसीएस को भी 47,415.04 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है और इसकी वैल्यू 8,19,062.65 करोड़ रुपए बची है। हालांकि, इस विपरीत माहौल में भी टेलीकॉम सेक्टर की दिग्गज कंपनी भारती एयरटेल की किस्मत चमक गई। एयरटेल का मार्केट वैल्यूएशन 42,470.13 करोड़ रुपए बढ़कर 11,60,525.16 करोड़ रुपए हो गया है।

इन दिग्गज कंपनियों का भी घटा वैल्यूएशन

बाजार में आई इस गिरावट से दूसरी बड़ी कंपनियां भी अछूती नहीं रहीं। देश की बड़ी एनबीएफसी कंपनी बजाज फाइनेंस की वैल्यू 27,892.28 करोड़ रुपए गिरकर 5,66,717.74 करोड़ रुपए रह गई। देश के सबसे बड़े प्राइवेट लेंडर एचडीएफसी बैंक का मार्केट कैप 20,630.01 करोड़ रुपए कम होकर 11,82,069.25 करोड़ रुपए बचा। इसी तरह दूसरे बड़े प्राइवेट लेंडर आईसीआईसीआई बैंक को 14,290 करोड़ रुपए का नुकसान उठाना पड़ा और उसका मार्केट कैप 8,92,385.39 करोड़ रुपए रह गया। इंफ्रा कंपनी लार्सन एंड टुब्रो का वैल्यूएशन 9,078.87 करोड़ रुपए घटकर 5,37,542.34 करोड़ रुपए रह गया। एफएमसीजी की सबसे बड़ी कंपनी हिंदुस्तान यूनिलीवर का वैल्यूएशन भी 3,970.8 करोड़ रुपए घट गया। इसके साथ ही देश की सबसे बड़ी इंश्योरेंस कंपनी एलआईसी का मार्केट कैप भी 2,182.12 करोड़ रुपए कम होकर 5,05,367.32 करोड़ रुपए रह गया है। इस पूरी गिरावट के बाद भी रिलायंस सबसे ज्यादा वैल्यू वाली कंपनी बनी हुई है।

विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली

बाजार के जानकारों का कहना है कि पश्चिम एशिया में चल रहे भूराजनीतिक तनाव, रुपए में लगातार कमजोरी और बढ़ती महंगाई की चिंताओं के बीच बाजार अपने तीन हफ्ते के कंसोलिडेशन फेज से बाहर निकलकर नीचे आ गए हैं। कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़कर 105 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गई हैं, जिससे कॉर्पोरेट मार्जिन पर दबाव बढ़ रहा है। इसके साथ ही विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों यानी एफपीआई ने भारतीय इक्विटी बाजार से भारी निकासी की है। अकेले मई के महीने में अब तक वे 27,048 करोड़ रुपए निकाल चुके हैं। साल 2026 में अब तक विदेशी निवेशकों द्वारा की गई कुल निकासी 2.2 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच चुकी है, जो साल 2025 के दौरान निकाले गए 1.66 लाख करोड़ रुपए से भी काफी अधिक है।

डॉलर की मजबूती और एआई का असर

इस साल फरवरी को छोड़कर बाकी सभी महीनों में विदेशी निवेशक लगातार बिकवाल बने रहे हैं। उन्होंने जनवरी में 35,962 करोड़ रुपए निकाले थे, जबकि फरवरी में वे खरीदार बने और 22,615 करोड़ रुपए का निवेश किया। इसके बाद मार्च में रिकॉर्ड 1.17 लाख करोड़ रुपए और अप्रैल में 60,847 करोड़ रुपए की शुद्ध निकासी हुई। जानकारों के मुताबिक, अमेरिकी डॉलर की मजबूती और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़त होने से निवेशक भारतीय बाजार से पैसा निकालकर सुरक्षित जगहों पर लगा रहे हैं। इसके अलावा पूरी दुनिया में इस समय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर फोकस करने वाली कंपनियों में निवेश बढ़ रहा है, जिसकी वजह से भी भारत जैसे बाजारों से फंड दूसरी तरफ ट्रांसफर हो रहे हैं। इस भारी बिकवाली और चालू खाता घाटे के बढ़ने से भारतीय रुपया भी कमजोर हुआ है, जो साल की शुरुआत में डॉलर के मुकाबले 90 पर था, लेकिन 15 मई को इसने 96 का स्तर तोड़ दिया और 96.14 के स्तर को छू लिया।

लेखकों के बारे में

Upstox
Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

अगला लेख