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  1. सेंसेक्स में तेजी, लेकिन निफ्टी 170 अंक लुढ़का, क्लोजिंग ऑक्शन के नए नियमों ने क्यों बदली बाजार की चाल?

मार्केट न्यूज़

सेंसेक्स में तेजी, लेकिन निफ्टी 170 अंक लुढ़का, क्लोजिंग ऑक्शन के नए नियमों ने क्यों बदली बाजार की चाल?

Shubham Singh Thakur

3 min read | अपडेटेड August 04, 2026, 10:42 IST

सारांश

सोमवार को कारोबार खत्म होने के समय निफ्टी 24,589 अंक पर था, लेकिन क्लोजिंग ऑक्शन के बाद यह 24,774.30 अंक पर बंद हुआ। यानी दोनों स्तरों में करीब 200 अंकों का अंतर रहा। वहीं, सेंसेक्स में ऐसा बड़ा अंतर नहीं दिखा और उसका अंतिम बंद भाव लगभग पहले जैसा ही रहा।

Stock Market

Stock Market: NSE का कहना है कि Nifty 50 में अचानक उछाल की वजह कोई गड़बड़ी नहीं है।

आज 4 अगस्त को भारतीय शेयर बाजार में BSE Sensex और Nifty 50 अलग-अलग तस्वीर देखने को मिली। एक ओर निफ्टी 50 में करीब 170 अंकों की गिरावट नजर आ रही है। वहीं दूसरी तरफ सेंसेक्स करीब 105 अंकों की बढ़त के साथ कारोबार करता दिखा। बता दें कि कारोबार के दौरान सेंसेक्स एक समय 500 अंक से ज्यादा चढ़ गया था। बाजार में यह अंतर क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) की नई व्यवस्था लागू होने के बाद देखने को मिला, जिसने दोनों प्रमुख इंडेक्स की चाल को प्रभावित किया।

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सोमवार को Nifty 50 में उठापटक

सोमवार को कारोबार खत्म होने के समय निफ्टी 24,589 अंक पर था, लेकिन क्लोजिंग ऑक्शन के बाद यह 24,774.30 अंक पर बंद हुआ। यानी दोनों स्तरों में करीब 200 अंकों का अंतर रहा। वहीं, सेंसेक्स में ऐसा बड़ा अंतर नहीं दिखा और उसका अंतिम बंद भाव लगभग पहले जैसा ही रहा। ऐसा आमतौर पर नहीं होता है, इसलिए निवेशकों को इससे हैरानी हुई। हालांकि इसके बाद NSE ने सर्कुलर जारी करके स्थिति स्पष्ट की है।

क्लोजिंग ऑक्शन क्या है और इसका असर क्यों दिखा?

नई व्यवस्था के तहत अब फ्यूचर्स और ऑप्शंस (F&O) वाले शेयरों में सामान्य कारोबार दोपहर 3:15 बजे खत्म हो जाता है। इसके बाद 20 मिनट का क्लोजिंग ऑक्शन होता है, जिसमें दिन का अंतिम बंद भाव तय किया जाता है। इस दौरान बड़े संस्थागत निवेशकों के ऑर्डर का असर ज्यादा दिखाई दे सकता है।

NSE का कहना है कि Nifty 50 में अचानक उछाल की वजह कोई गड़बड़ी नहीं है। नए सिस्टम में में 3:15 से 3:30 बजे तक लगातार ट्रेडिंग नहीं होती। इस दौरान खरीद और बिक्री के ऑर्डर इकट्ठा किए जाते हैं। फिर जिस कीमत पर सबसे ज्यादा ऑर्डर मैच होते हैं, वही क्लोजिंग प्राइस बनती है, जिसे प्राइस डिस्कवरी कहते हैं। इसलिए क्लोजिंग प्राइस, 3:15 बजे की ट्रेडिंग कीमत से अलग हो सकती है।

एशियाई बाजारों में भी रही कमजोरी

घरेलू बाजार पर एशियाई बाजारों की सुस्त शुरुआत का भी असर देखने को मिला। कच्चे तेल की कीमतों में बढ़त आई क्योंकि ईरान ने अमेरिका के साथ सीधे बातचीत से इनकार कर दिया है और कहा कि वह स्ट्रेट ऑफ हॉर्मूज के मुद्दे पर ओमान से बात कर रहा है।

वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ बातचीत जारी है और यह उसके लिए समझौता करने का आखिरी मौका हो सकता है। इस बीच जापान का निक्केई, चीन का शंघाई कंपोजिट, हांगकांग का हैंग सेंग और दक्षिण कोरिया का कोस्पी सभी गिरावट के साथ कारोबार कर रहे थे।

आगे निवेशकों को क्या देखना चाहिए?

एक्सपर्ट्स का मानना है कि क्लोजिंग ऑक्शन की नई व्यवस्था के कारण बाजार बंद होने के समय उतार-चढ़ाव पहले से ज्यादा बढ़ सकता है। बड़े निवेशकों की खरीद-बिक्री, शॉर्ट कवरिंग और पोजिशन बदलने का असर अब अंतिम क्लोजिंग पर ज्यादा दिखाई देगा। इसके अलावा मंगलवार को निफ्टी की वीकली एक्सपायरी भी है, इसलिए दिनभर बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है।

(डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें।)

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