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SEBI का Demat 2.0: अब Tokenised कॉर्पोरेट बॉन्ड्स की होगी टेस्टिंग, यहां मिलेंगे आपके सवालों के जवाब

Shubham Singh Thakur

3 min read | अपडेटेड September 11, 2026, 16:26 IST

सारांश

Demat 2.0 का सबसे बड़ा संभावित फायदा तेज सेटलमेंट है। बॉन्ड जारी होने के समय पहले जहां फंड मिलने में आमतौर पर 2-3 दिन लग सकते थे, वहीं पायलट में जारीकर्ता को उसी दिन पैसा मिलने की व्यवस्था की जा सकती है।

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सेकेंडरी मार्केट में भी निवेशकों को ट्रांजैक्शन के बाद फंड जल्दी मिल सकता है।

मार्केट रेगुलेटर सेबी (SEBI) ने ‘Demat 2.0’ नाम से एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया है। इसका मकसद कॉरपोरेट बॉन्ड को Tokenised Form में जारी करने, रखने, खरीदने-बेचने और सेटलमेंट की प्रक्रिया को टेस्ट करना है। इसके लिए Distributed Ledger Technology (DLT) का इस्तेमाल किया जाएगा।

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सरल भाषा में समझें तो कॉरपोरेट बॉन्ड को एक डिजिटल टोकन के रूप में रिकॉर्ड किया जाएगा। हालांकि, इससे बॉन्ड की कानूनी पहचान नहीं बदलेगी। उसका ISIN, ब्याज दर (Coupon), मैच्योरिटी, रेटिंग, सुरक्षा और निवेशक के अधिकार पहले जैसे ही रहेंगे। बदलाव सिर्फ उस तकनीक में होगा, जिसके जरिए बॉन्ड की ओनरशिप और ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड किए जाएंगे।

क्या नया Demat Account खोलना होगा?

नहीं। Demat 2.0 के लिए अलग से नया सामान्य डीमैट अकाउंट खोलने की जरूरत नहीं होगी। यह निवेशक के मौजूदा डीमैट अकाउंट का ही विस्तार होगा और मौजदा KYC का इस्तेमाल किया जाएगा। इसके साथ निवेशक को अपने बैंक के साथ CBDC यानी e₹ वॉलेट की जरूरत होगी। इसके लिए किसी अलग तकनीकी सेटअप की आवश्यकता नहीं होगी।

क्या Tokenised Bonds के लिए नया एक्सचेंज होगा?

नहीं। SEBI के पायलट में अलग से कोई नया एक्सचेंज या अलग ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म बनाने का प्रस्ताव नहीं है। बॉन्ड की मौजूदा मार्केट व्यवस्था का ही इस्तेमाल किया जाएगा। बॉन्ड जारी करने के लिए मौजूदा स्टॉक एक्सचेंज के इलेक्ट्रॉनिक बिडिंग प्लेटफॉर्म (EBP) का इस्तेमाल होगा। बॉन्ड को डिपॉजिटरी की ओर से ISIN मिलेगा, जिसे पायलट के तहत Tokenised ISIN के तौर पर चिह्नित किया जाएगा।

निवेशकों को क्या फायदा होगा?

Demat 2.0 का सबसे बड़ा संभावित फायदा तेज सेटलमेंट है। बॉन्ड जारी होने के समय पहले जहां फंड मिलने में आमतौर पर 2-3 दिन लग सकते थे, वहीं पायलट में जारीकर्ता को उसी दिन पैसा मिलने की व्यवस्था की जा सकती है।

सेकेंडरी मार्केट में भी निवेशकों को ट्रांजैक्शन के बाद फंड जल्दी मिल सकता है। ब्याज और बॉन्ड की मैच्योरिटी पर मिलने वाली रकम e₹ वॉलेट में तय तारीख पर स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट के जरिए अपने आप जमा की जा सकती है।

अब तक ₹1,025 करोड़ के बॉन्ड जारी

पायलट के पहले चरण में अब तक तीन Tokenised Corporate Bond जारी हुए हैं। REC ने 7 सितंबर 2026 को ₹500 करोड़, L&T ने 9 सितंबर को ₹500 करोड़ और IIFL ने 9 सितंबर को ₹25 करोड़ जुटाए।

Demat 2.0 को तीन चरणों में आगे बढ़ाया जाएगा। पहले चरण में संस्थागत निवेशकों के साथ बॉन्ड जारी होंगे। दूसरे चरण में रिटेल निवेशकों को सेकेंडरी मार्केट ट्रेडिंग में शामिल किया जाएगा। तीसरे चरण में अन्य रेगुलेटेड संस्थाओं और वित्तीय साधनों तक इसका विस्तार किया जाएगा। फिलहाल रिटेल निवेशक इसमें हिस्सा नहीं ले सकते। उन्हें बाद के चरण में शामिल करने की योजना है।

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