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  1. संवत 2083 देगा मुनाफा या लगेगा झटका? जियोपॉलिटिकल टेंशन, FIIs और रुपये तय करेंगे बाजार का रुख

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संवत 2083 देगा मुनाफा या लगेगा झटका? जियोपॉलिटिकल टेंशन, FIIs और रुपये तय करेंगे बाजार का रुख

Shubham Singh Thakur

4 min read | अपडेटेड November 08, 2026, 09:53 IST

सारांश

दिवाली के मौके पर 8 नवंबर, रविवार को मुहूर्त ट्रेडिंग होने जा रही है। इस दौरान शेयर बाजार में एक घंटे का विशेष कारोबारी सत्र आयोजित किया जाएगा। इसे नए हिंदू वित्त वर्ष की शुरुआत भी माना जाता है।

Stock Market samvat 2083

Stock Market: नए संवत में घरेलू कंपनियों की कमाई और भू-राजनीतिक तनाव जैसे फैक्टर्स अहम होंगे।

Samvat 2083 Market Outlook: दिवाली के साथ ही हिंदू नववर्ष संवत 2083 की शुरुआत हो रही है। ऐसे में निवेशकों के मन में सबसे बड़ा सवाल है कि नए साल में शेयर बाजार का प्रदर्शन कैसा रहेगा। पिछले लगातार 7 कारोबारी दिनों से बाजार में खरीदारी का माहौल है। इस दौरान Sensex और Nifty 50 में करीब 10.30 फीसदी की रैली आ चुकी है। भारत की आर्थिक विकास दर को लेकर तस्वीर अच्छी दिख रही है, लेकिन दुनिया में चल रहे तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और ग्लोबल बाजारों की अनिश्चितता के कारण शेयर बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है।
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दिवाली के मौके पर 8 नवंबर, रविवार को मुहूर्त ट्रेडिंग होने जा रही है। इस दौरान शेयर बाजार में एक घंटे का विशेष कारोबारी सत्र आयोजित किया जाएगा। इसे नए हिंदू वित्त वर्ष की शुरुआत भी माना जाता है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि संवत 2083 में भारतीय शेयर बाजार का रुख सकारात्मक रह सकता है, लेकिन निवेशकों को सावधानी बरतनी होगी। अच्छी कंपनियों में निवेश और बाजार में गिरावट के दौरान सही मौके तलाशना फायदेमंद हो सकता है।

संवत 2083 में इन फैक्टर्स पर रहेगी नजर

एक्सपर्ट्स के मुताबिक नए संवत में घरेलू कंपनियों की कमाई, भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की कीमतें, इंफ्रास्ट्रक्चर पर सरकारी खर्च, ब्याज दरों में बदलाव और रुपये की चाल बाजार के लिए अहम रहेंगे। DIP Market के मैनेजिंग पार्टनर और CEO सैकत कुमार के मुताबिक, कंपनियों की कमाई में बढ़ोतरी, घरेलू खपत में सुधार और प्राइवेट सेक्टर का निवेश बाजार को आगे बढ़ा सकते हैं। वहीं, पश्चिम एशिया में तनाव, कच्चे तेल की कीमतें और अमेरिका की ट्रेड पॉलिसी का असर निवेशकों के भरोसे और विदेशी निवेश पर पड़ सकता है। अमेरिका में होने वाले मिडटर्म चुनाव भी वहां की व्यापार और सरकारी खर्च से जुड़ी नीतियों को प्रभावित कर सकते हैं।

विदेशी निवेश और महंगाई भी रहेंगी अहम

INVasset PMS के बिजनेस हेड हर्षल दसानी के मुताबिक, विदेशी निवेशकों ने 2026 में करीब 3 लाख करोड़ रुपये की बिकवाली की है। अक्टूबर के आखिरी सप्ताह में काफी समय बाद विदेशी निवेशकों की नेट खरीदारी देखने को मिली। अब सवाल है कि क्या यह खरीदारी आगे भी जारी रहेगी।

Tata Asset Management के सीनियर फंड मैनेजर चंद्रप्रकाश पडियार के मुताबिक ऊर्जा की कीमतों में महंगाई, सप्लाई चेन में रुकावट और अर्थव्यवस्था में सामान्य महंगाई बढ़ने से मांग प्रभावित हो सकती है। अल नीनो के कारण मौसम में बदलाव भी बाजार के लिए चुनौती बन सकता है। हालांकि, वित्त वर्ष 2027 में कंपनियों की कमाई में अच्छी ग्रोथ इन चुनौतियों का असर कम कर सकती है।

कच्चे तेल और रुपये की चाल बिगाड़ सकती है बाजार का मूड

एक्सपर्ट्स के मुताबिक अगर अमेरिका-ईरान तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमत लंबे समय तक 110 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर रहती है, तो भारतीय बाजार पर दबाव बढ़ सकता है। रुपये में कमजोरी और महंगाई के कारण RBI की उम्मीद से ज्यादा ब्याज दर बढ़ोतरी भी बाजार को नुकसान पहुंचा सकती है। इसके उलट, कच्चे तेल की कीमत 85 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आने और रुपये पर दबाव कम होने से बाजार को सहारा मिल सकता है।

मुहूर्त ट्रेडिंग में इन बातों का रखें ध्यान

दिवाली पर होने वाली मुहूर्त ट्रेडिंग को निवेश की शुरुआत के लिए शुभ माना जाता है। हालांकि, एक्सपर्ट्स का कहना है कि सिर्फ शुभ अवसर समझकर किसी शेयर में निवेश नहीं करना चाहिए। निवेश से पहले कंपनी का बिजनेस, उसकी कमाई और शेयर का वैल्यूएशन जरूर देखना चाहिए। लंबी अवधि के निवेशक अच्छे फंडामेंटल वाली कंपनियों में धीरे-धीरे निवेश कर सकते हैं। वहीं, नए निवेशकों को छोटी रकम से शुरुआत करने और लंबे समय तक निवेश बनाए रखने की सलाह दी गई है।

(डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें।)

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