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4 min read | अपडेटेड November 02, 2026, 09:42 IST
सारांश
RIL का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 33.8% बढ़कर रिकॉर्ड ₹29,550 करोड़ पहुंच गया। वहीं, रेवेन्यू 27.8% बढ़कर ₹3.62 लाख करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर रहा। कंपनी का EBITDA भी 23.9% बढ़कर ₹62,409 करोड़ हो गया।
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Reliance Industries: रिलायंस के ऑयल-टू-केमिकल्स (O2C) बिजनेस ने सितंबर तिमाही में सबसे अच्छा प्रदर्शन किया।
रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL) के शेयरों में आज 02 नवंबर को शानदार तेजी नजर आ रही है। यह स्टॉक आज BSE पर 6 फीसदी की बढ़त के साथ 1234 रुपये के भाव पर पहुंच गया। दरअसल कंपनी ने FY27 की जुलाई-सितंबर तिमाही में मजबूत नतीजे जारी किए हैं। कंपनी ने इस तिमाही में अब तक का सबसे ज्यादा रेवेन्यू दर्ज किया। साथ ही मुनाफे में भी अच्छी बढ़ोतरी हुई। आज की तेजी के साथ कंपनी का मार्केट कैप बढ़कर 16.52 लाख करोड़ रुपये हो गया है। इस शेयर का 52-वीक हाई 1,611.20 रुपये है, जिसे इसने 05 जनवरी 2026 को छू लिया था। यानी अपने 52 वीक हाई से यह अभी भी करीब 24 फीसदी नीचे है। यहां हम जानेंगे कि रिजल्ट में ऐसा क्या खास है, जिसकी वजह से आज इसके शेयर 6% तक उछल गए।
RIL का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 33.8% बढ़कर रिकॉर्ड ₹29,550 करोड़ पहुंच गया। वहीं, रेवेन्यू 27.8% बढ़कर ₹3.62 लाख करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर रहा। कंपनी का EBITDA भी 23.9% बढ़कर ₹62,409 करोड़ हो गया। पहली छमाही में कंपनी का मुनाफा पहली बार ₹50,000 करोड़ के पार पहुंचा है।
रिलायंस के ऑयल-टू-केमिकल्स (O2C) बिजनेस ने सितंबर तिमाही में सबसे अच्छा प्रदर्शन किया। इस सेगमेंट का EBITDA तिमाही आधार पर 67% बढ़कर 25,203 करोड़ रुपये हो गया। बाजार को इसमें करीब 20% की बढ़ोतरी की उम्मीद थी।
O2C बिजनेस का EBITDA मार्जिन भी जून तिमाही के 8.4% से बढ़कर 10.8% हो गया। कंपनी के मुताबिक, ट्रांसपोर्टेशन फ्यूल की रिफाइनिंग मार्जिन में मजबूती से इस सेगमेंट को फायदा हुआ। ये मार्जिन सालाना आधार पर 3 से 3.7 गुना तक बढ़कर ऐतिहासिक ऊंचाई पर पहुंच गए। वहीं, पॉलिएस्टर कारोबार से जुड़े मार्जिन भी तीन साल के उच्चतम स्तर पर रहे।
रिलायंस के ऑयल और गैस सेगमेंट का रेवेन्यू जून तिमाही के 6,298 करोड़ रुपये से घटकर 6,020 करोड़ रुपये रह गया। EBITDA भी 4,973 करोड़ रुपये से घटकर 4,901 करोड़ रुपये पर आ गया। हालांकि, इस सेगमेंट का OPM 79% से सुधरकर 81.4% हो गया। कंपनी ने बताया कि KG-D6 गैस फील्ड से कम उत्पादन और कम कीमत मिलने का असर पड़ा। हालांकि, कोल-बेड मीथेन (CBM) बिजनेस में बेहतर उत्पादन और कीमतों से इसकी भरपाई करने में मदद मिली।
रिलायंस रिटेल वेंचर्स लिमिटेड (RRVL) का ग्रॉस रेवेन्यू 91,716 करोड़ रुपये रहा। कंज्यूमर ब्रांड्स बिजनेस के डीमर्जर के असर को एडजस्ट करने के बाद इसमें सालाना आधार पर 6.4% की बढ़ोतरी हुई। कंपनी के मुताबिक, इस बार त्योहारी सीजन दिसंबर तिमाही में शिफ्ट होने की वजह से रिटेल बिजनेस के प्रदर्शन पर असर पड़ा। एकमुश्त इम्पेयरमेंट चार्ज को छोड़कर EBITDA 6,228 करोड़ रुपये रहा। वहीं, EBITDA मार्जिन 7.8% रहा।
रिलायंस जियो का ऑपरेटिंग रेवेन्यू सितंबर तिमाही में बढ़कर 40,475 करोड़ रुपये हो गया। जून तिमाही में यह 39,173 करोड़ रुपये और पिछले साल की समान तिमाही में 36,332 करोड़ रुपये था। जियो का एवरेज रेवेन्यू पर यूजर (ARPU) भी बढ़कर 218.80 रुपये हो गया। जून तिमाही में यह 215.60 रुपये और पिछले साल की सितंबर तिमाही में 211.40 रुपये था। कंपनी के मुताबिक, नए ग्राहकों के जुड़ने, ARPU में बढ़ोतरी और डिजिटल सर्विसेज में अच्छी ग्रोथ से कारोबार को फायदा मिला।
गोल्डमैन सैक्स के मुताबिक O2C बिजनेस के मजबूत प्रदर्शन ने रिटेल कारोबार की कमजोरी की भरपाई कर दी। हालांकि, ब्रोकरेज को उम्मीद है कि तीसरी तिमाही में रिफाइनिंग मार्जिन कुछ कम हो सकते हैं। इसकी एक वजह बहुत बड़े कच्चे तेल के जहाजों (VLCC) का बढ़ता मालभाड़ा है। नई एनर्जी बिजनेस को लेकर ब्रोकरेज ने बताया कि रिलायंस की सोलर मॉड्यूल और सेल मैन्युफैक्चरिंग क्षमता फिलहाल 6 GW और 5 GW है। कंपनी इन्हें अगले साल की पहली छमाही में बढ़ाकर 20 GW करने की दिशा में काम कर रही है। बैटरी कारोबार की मैन्युफैक्चरिंग सुविधाओं को भी 2027 में शुरू करने और बढ़ाने की योजना है।
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