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4 min read | अपडेटेड September 24, 2026, 12:39 IST
सारांश
आज कई इंश्योरेंस स्टॉक्स लाल निशान पर ट्रेड कर रहे हैं। HDFC Life में 5 फीसदी से ज्यादा की गिरावट है। Max Financial Services का शेयर करीब 10 फीसदी लुढ़क गया है। इसके अलावा ICICI Prudential में भी हल्की गिरावट दिखी। SBI Life के शेयर मामूली बढ़त के साथ ट्रेड कर रहे थे।
शेयर सूची

PB Fintech और Turtlemint जैसे प्लेटफॉर्म का बिजनेस सीधे इंश्योरेंस पॉलिसी के डिस्ट्रीब्यूशन से जुड़ा है।
इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूशन से जुड़े शेयरों में आज 24 सितंबर को जबरदस्त बिकवाली हो रही है। पॉलिसीबाजार की पैरेंट कंपनी PB Fintech के शेयर 28 फीसदी टूट गए हैं। रिपोर्ट लिखे जाने के समय यह शेयर 1360.80 रुपये के भाव पर ट्रेड कर रहा था। इसके अलावा Turtlemint Fintech Solutions के शेयरों में भी 20 फीसदी की बड़ी गिरावट है और यह BSE पर 109.10 रुपये के भाव पर ट्रेड कर रहा है। इसके अलावा कई इंश्योरेंस शेयरों में भी जमकर बिकवाली हो रही है। दरअसल IRDAI इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूशन के पूरे सिस्टम में बदलाव के लिए नया प्रस्ताव लेकर आई है। इस खबर के बाद इन शेयरों में भारी बिकवाली हो रही है।
आज कई इंश्योरेंस स्टॉक्स लाल निशान पर ट्रेड कर रहे हैं। HDFC Life में 5 फीसदी से ज्यादा की गिरावट है। Max Financial Services का शेयर करीब 10 फीसदी लुढ़क गया है। इसके अलावा ICICI Prudential में भी हल्की गिरावट दिखी। SBI Life के शेयर मामूली बढ़त के साथ ट्रेड कर रहे थे।
PB Fintech और Turtlemint जैसे प्लेटफॉर्म का बिजनेस सीधे इंश्योरेंस पॉलिसी के डिस्ट्रीब्यूशन से जुड़ा है। ये कंपनियां पॉलिसी बेचने और उससे जुड़ी सर्विस देने के बदले कमाई करती हैं। ऐसे में डिस्ट्रीब्यूटर को मिलने वाले कमीशन या टेक रेट पर सीमा तय होने से इनकी प्रति-पॉलिसी कमाई प्रभावित हो सकती है। IRDAI ने कमीशन तय करने के लिए प्रोडक्ट, इंश्योरेंस की कैटेगरी, डिस्ट्रीब्यूशन चैनल, प्रोडक्ट की जटिलता और उसे बेचने में लगने वाली मेहनत जैसे फैक्टर्स को ध्यान में रखने का प्रस्ताव दिया है।
IRDAI ने इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूशन के पूरे सिस्टम में बदलाव के लिए ‘Recalibrating Economics of Insurance Distribution’ नाम से कंसल्टेशन पेपर जारी किया है। इसमें कमीशन, डिस्ट्रीब्यूशन लागत, कंपनियों के खर्च, ग्राहक सुरक्षा और डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़े नियमों को बदलने का प्रस्ताव है। हालांकि, अभी ये बदलाव अंतिम नियम नहीं हैं। IRDAI ने कंसल्टेशन पेपर पर 25 अक्टूबर तक सुझाव मांगे हैं।
नए प्रस्तावों का असर सिर्फ डिस्ट्रीब्यूटर्स तक सीमित नहीं है। IRDAI ने इंश्योरेंस कंपनियों के Expense of Management यानी EoM को लेकर भी बदलाव सुझाए हैं। लाइफ इंश्योरेंस कंपनियों के लिए कंपनी-लेवल EoM लिमिट को दो साल में Gross Direct Premium Income यानी GDPI के 15% और पांच साल में 12.5% तक लाने का प्रस्ताव है। वहीं जनरल इंश्योरेंस कंपनियों के लिए EoM लिमिट को पांच साल में Gross Written Premium के 30% से घटाकर घरेलू GDPI के 20% तक करने का प्रस्ताव है। इसका वास्तविक असर हर कंपनी पर अलग हो सकता है, क्योंकि उनकी लागत, प्रोडक्ट और डिस्ट्रीब्यूशन मॉडल एक जैसे नहीं हैं।
IRDAI ने इंश्योरेंस की बिक्री में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए कई उपाय सुझाए हैं। इनमें कमीशन स्ट्रक्चर को आसान तरीके से बताना और ग्राहक की जरूरत के हिसाब से पॉलिसी की उपयुक्तता सुनिश्चित करना शामिल है।
इसके अलावा वेबसाइट और ऐप पर इस्तेमाल होने वाले ‘Dark Patterns’ पर रोक लगाने का भी प्रस्ताव है। Dark Patterns ऐसे डिजाइन होते हैं, जो यूजर को किसी खास फैसले के लिए गुमराह या प्रभावित कर सकते हैं। रेगुलेटर चाहता है कि ग्राहक को प्रोडक्ट, कीमत और फीचर्स की जानकारी आसान भाषा में उपलब्ध हो।
बाजार में सबसे ज्यादा चिंता डिस्ट्रीब्यूशन से होने वाली कमाई पर संभावित असर को लेकर है। एक्सपर्ट्स के अनुसार नई बिजनेस कमीशन दरों में 10% की कटौती होने पर संबंधित कंपनियों की कमाई में 10-12% तक असर पड़ सकता है। IRDAI के प्रस्ताव अभी कंसल्टेशन स्टेज में हैं और अंतिम नियम आने के बाद ही कंपनियों पर वास्तविक प्रभाव स्पष्ट होगा।
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