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4 min read | अपडेटेड September 24, 2026, 10:56 IST
सारांश
अमेरिका में 10 साल की ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड उछलकर 19 साल के उच्चतम स्तर (5.11%) पर पहुंच गई है। जब बॉन्ड यील्ड बढ़ती है, तो विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) भारतीय बाजारों जैसे जोखिम भरे एसेट्स से पैसा निकालकर अमेरिकी सुरक्षित सरकारी बॉन्ड में लगाने लगते हैं।

आज डॉलर के मुकाबले रुपये की वैल्यू में भी कमजोरी नजर आ रही है।
भारतीय शेयर बाजार में आज 24 सितंबर को बिकवाली का जबरदस्त दबाव दिख रहा है। आज के कारोबार में BSE Sensex में करीब 723 अंकों की बड़ी गिरावट रही और यह 74089.09 के स्तर तक लुढ़क गया। दूसरी तरफ Nifty 50 भी करीब 241 अंक टूटकर 23,205.45 के लेवल पर आ गया। जियो पॉलिटिकल टेंशन के बीच क्रूड ऑयल ने एक बार फिर 100 डॉलर प्रति बैरल का आंकड़ा पार कर लिया है। यहां हम समझेंगे कि बाजार में आज की गिरावट के लिए कौन से फैक्टर्स जिम्मेदार हैं।
IRDAI ने बीमा की बिक्री और डिस्ट्रीब्यूशन व्यवस्था में बड़े बदलाव का प्रस्ताव दिया है। इस खबर के बीच आज बाजार में कुछ सेक्टर्स में बिकवाली का जबरदस्त दबाव दिखा। आज ऑनलाइन इंश्योरेंस एग्रीगेटर्स और फिनटेक कंपनियों जैसे PB Fintech के शेयरों में बड़ी गिरावट आई है। इसके अलावा लाइफ इंश्योरेंस कंपनियों के शेयरों में भी बिकवाली का जबरदस्त दबाव है। इसके साथ ही कुछ बैंकिंग शेयर जैसे HDFC Bank और Axis Bank में भी गिरावट की आशंका है।
क्रूड ऑयल में पिछले कुछ दिनों की गिरावट के बाद अब एक बार फिर तेजी नजर आ रही है। आज ब्रेंट क्रूड ऑयल में मामूली गिरावट आई है, लेकिन यह 102.31 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई है। बता दें कि कुछ दिनों पहले इसका भाव 100 डॉलर के नीचे चला गया था। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अभी भी बरकरार है। तेल की बढ़ती कीमतों से दुनिया के तीसरे सबसे बड़े आयातक देश भारत को नुकसान होता है, क्योंकि इससे आयात का बिल बढ़ता है, महंगाई का डर बढ़ता है और कंपनियों के मुनाफे पर बुरा असर पड़ता है।
दरअसल, ट्रेडर्स की नजर इस बात पर है कि एशिया में तेल का इम्पोर्ट तेजी से बढ़ा है, जबकि मिडिल ईस्ट में तनाव अभी भी बना हुआ है। बता दें कि संयुक्त राष्ट्र (UN) की बैठक में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने अमेरिका और इजराइल पर दुनिया में अस्थिरता फैलाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, "अमेरिकी राष्ट्रपति हमें आतंकवादी कहते हैं, जबकि हम खुद आतंकवाद के शिकार रहे हैं।" उन्होंने यह भी कहा कि ईरान अपनी आखिरी सांस तक मुकाबला करता रहेगा।
अमेरिका में 10 साल की ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड उछलकर 19 साल के उच्चतम स्तर (5.11%) पर पहुंच गई है। जब बॉन्ड यील्ड बढ़ती है, तो विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) भारतीय बाजारों जैसे जोखिम भरे एसेट्स से पैसा निकालकर अमेरिकी सुरक्षित सरकारी बॉन्ड में लगाने लगते हैं। US ट्रेजरी यील्ड 2007 के बाद अपने सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है। इसके चलते भी बाजार पर दबाव बढ़ा है।
अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने हाल ही में ब्याज दरों में 0.25 फीसदी की बढ़ोतरी की थी। ब्याज दर बढ़ाने के साथ-साथ फेड चेयरमैन केविन वॉर्श और अन्य अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि अमेरिका में महंगाई को 2% के लक्ष्य पर लाने के लिए आने वाले समय में ब्याज दरें और भी बढ़ाई जा सकती है। ब्याज दरों में आगे और बढ़ोतरी की आशंका ने भी बाजार का सेंटीमेंट खराब किया है।
आज डॉलर के मुकाबले रुपये की वैल्यू में भी कमजोरी नजर आ रही है। रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 11 पैसे गिरकर 95.84 पर आ गया। इसकी वजह जियो-पॉलिटिकल अनिश्चितताओं के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड व डॉलर का मजबूत होना था। फॉरेक्स ट्रेडर्स ने कहा कि घरेलू इक्विटी बाजार में बिकवाली के दबाव और अमेरिकी मुद्रा के मजबूत होने की वजह से विदेशी पूंजी के आने के बावजूद रुपये को कोई सहारा नहीं मिल सका।
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