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4 min read | अपडेटेड September 24, 2026, 09:58 IST
सारांश
प्रस्ताव में इंश्योरेंस कंपनियों और बड़े डिस्ट्रीब्यूशन संस्थानों को अपनी कमीशन पॉलिसी और स्ट्रक्चर को आसान भाषा में बताने की बात कही गई है। कुछ कमर्शियल इंश्योरेंस पॉलिसी में भी कमीशन से जुड़ी जानकारी देने का प्रस्ताव है।

IRDAI इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूशन के मौजूदा ढांचे को आसान बनाने का प्रस्ताव लेकर आया है।
इंश्योरेंस रेगुलेटर IRDAI ने बीमा की बिक्री और डिस्ट्रीब्यूशन व्यवस्था में बड़े बदलाव का प्रस्ताव रखा है। इस प्रस्ताव से ग्राहकों को फायदा होने की उम्मीद है। रेगुलेटर ने बुधवार को ‘Recalibrating Economics of Insurance Distribution’ नाम से कंसल्टेशन पेपर जारी किया। इसका मकसद इंश्योरेंस खरीदने और सर्विस लेने की प्रक्रिया को ज्यादा पारदर्शी, प्रतिस्पर्धी और ग्राहक-केंद्रित बनाना है। हालांकि, ये अभी सिर्फ प्रस्ताव हैं। IRDAI ने इस पर हितधारकों से सुझाव मांगे हैं और कमेंट देने की आखिरी तारीख 25 अक्टूबर 2026 है।
प्रस्ताव में इंश्योरेंस कंपनियों और बड़े डिस्ट्रीब्यूशन संस्थानों को अपनी कमीशन पॉलिसी और स्ट्रक्चर को आसान भाषा में बताने की बात कही गई है। कुछ कमर्शियल इंश्योरेंस पॉलिसी में भी कमीशन से जुड़ी जानकारी देने का प्रस्ताव है। इससे ग्राहक यह समझ सकेंगे कि पॉलिसी की कीमत में डिस्ट्रीब्यूशन से जुड़ी लागत किस तरह शामिल है।
IRDAI कमीशन की सीमा में भी बदलाव चाहता है। यह सीमा पॉलिसी के प्रकार, बिजनेस सेगमेंट, डिस्ट्रीब्यूशन चैनल, प्रोडक्ट की जटिलता और उसे बेचने व सर्विस करने में लगने वाली मेहनत जैसे फैक्टर के आधार पर तय हो सकती है।
IRDAI इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूशन के मौजूदा ढांचे को आसान बनाने का प्रस्ताव लेकर आया है। इसका मकसद ग्राहकों के लिए यह समझना आसान करना है कि वे किसके जरिए इंश्योरेंस पॉलिसी खरीद रहे हैं और उस डिस्ट्रीब्यूटर या इंटरमीडियरी की क्या भूमिका है। इससे पॉलिसी खरीदते समय ग्राहक को ज्यादा स्पष्ट जानकारी मिल सकती है।
IRDAI ने इंश्योरेंस की मिस-सेलिंग रोकने के लिए भी कई प्रस्ताव दिए हैं। इसमें ग्राहक की जरूरत को ध्यान में रखने की बात शामिल है। साथ ही सभी तरह के डायरेक्ट और इनडायरेक्ट, मौद्रिक और गैर-मौद्रिक रिवॉर्ड को कमीशन की परिभाषा में लाने का प्रस्ताव है।
बैंक और NBFC कर्मचारियों को इंश्योरेंस बेचने के लिए वॉल्यूम या रिवॉर्ड आधारित इंसेंटिव देने पर रोक लगाने का भी प्रस्ताव है। इसके अलावा पॉलिसी को बेचने वाले व्यक्ति की पहचान को पॉलिसी से जोड़ने और मिस-सेलिंग की घटनाओं की जानकारी सार्वजनिक करने का प्रस्ताव है। गलत बिक्री पाए जाने पर कमीशन वापस लेने की व्यवस्था भी लाई जा सकती है।
IRDAI ने दूसरे वित्तीय प्रोडक्ट या सर्विस के साथ इंश्योरेंस को जबरन बंडल करने पर भी सख्ती का प्रस्ताव रखा है। इससे ग्राहकों को अपनी जरूरत के हिसाब से इंश्योरेंस चुनने की ज्यादा स्वतंत्रता मिल सकती है।
IRDAI ने इंश्योरेंस कंपनियों की लागत और डिस्ट्रीब्यूशन खर्च को कम करने के लिए भी बदलाव सुझाए हैं। रेगुलेटर का कहना है कि लंबे समय में स्ट्रक्चरल कॉस्ट कम होने से इंश्योरेंस सस्ता हो सकता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि नियम लागू होते ही पॉलिसी के प्रीमियम अपने आप कम हो जाएंगे।
प्रस्ताव में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देने पर भी जोर है। Bima Sugam जैसे मार्केट इन्फ्रा इंस्टीट्यूशंस और पब्लिक इंश्योरेंस रजिस्ट्री (PIR) के इस्तेमाल को बढ़ाने का प्रस्ताव है। इससे पॉलिसी खरीदने, तुलना करने, पोर्टेबिलिटी और सर्विस से जुड़े कामों को डिजिटल तरीके से आसान बनाने में मदद मिल सकती है।
कुल मिलाकर, IRDAI का फोकस सिर्फ इंश्योरेंस प्रोडक्ट बदलने पर नहीं, बल्कि उसे बेचने और सर्विस देने के तरीके को ज्यादा पारदर्शी और ग्राहक-केंद्रित बनाने पर है। इन प्रस्तावों पर मिलने वाले सुझावों के बाद आगे की प्रक्रिया तय होगी।
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