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4 min read | अपडेटेड August 28, 2026, 13:50 IST
सारांश
Rays of Belief के IPO में 125 करोड़ रुपये के 0.52 करोड़ नए इक्विटी शेयर जारी किए जाएंगे। वहीं इसमें ऑफर फॉर सेल (OFS) नहीं है। इसका मतलब है कि आईपीओ से होने वाली पूरी आय कंपनी को जाएगी। सब्सक्रिप्शन के बाद सफल निवेशकों को शेयरों का अलॉटमेंट 4 सितंबर को किया जाना है।

Moms Belief IPO: कंपनी का इरादा पब्लिक इश्यू के जरिए 125 करोड़ रुपये जुटाने का है।
Mom's Belief की पैरेंट कंपनी Rays of Belief अपना IPO लाने जा रही है। यह आईपीओ 1 सितंबर को खुलेगा और 3 सितंबर को बंद होगा। इसके लिए 227-239 रुपये प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया गया है। कंपनी का इरादा पब्लिक इश्यू के जरिए 125 करोड़ रुपये जुटाने का है। Rays of Belief एक फॉर-प्रॉफिट सोशल एंटरप्राइज है, जो न्यूरोडेवलपमेंटल डिसऑर्डर (NDD) से पीड़ित बच्चों के लिए व्यक्तिगत थेरेपी और ट्रीटमेंट प्लान प्रोवाइड करती है।
Rays of Belief के IPO में 125 करोड़ रुपये के 0.52 करोड़ नए इक्विटी शेयर जारी किए जाएंगे। वहीं इसमें ऑफर फॉर सेल (OFS) नहीं है। इसका मतलब है कि आईपीओ से होने वाली पूरी आय कंपनी को जाएगी। सब्सक्रिप्शन के बाद सफल निवेशकों को शेयरों का अलॉटमेंट 4 सितंबर को किया जाना है। वहीं BSE और NSE पर लिस्टिंग की संभावित तारीख 8 सितंबर तय की गई है।
Rays of Belief के IPO के लिए 62 शेयरों का लॉट साइज तय किया गया है। अपर प्राइस बैंड पर एक रिटेल निवेशक को इसमें कम से कम 14,818 रुपये का निवेश करना होगा। कंपनी 500 करोड़ रुपये का मार्केट कैपिटलाइजेशन हासिल करना चाहती है। मेफकॉम कैपिटल मार्केट्स लिमिटेड बुक रनिंग लीड मैनेजर है और केफिन टेक्नोलॉजीज लिमिटेड इश्यू का रजिस्ट्रार है।
कंपनी नए सेंटर खोलने और उनसे जुड़ी टेक्नोलॉजी व हार्डवेयर पर खर्च करने के लिए फ्रेश इश्यू से मिले 41.3 करोड़ रुपये का इस्तेमाल करेगी। इसके अलावा, भारत में मौजूदा सेंटरों के लीज भुगतान पर 14.4 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
कंपनी की अमेरिकी सब्सिडियरी Mom’s Belief US Inc में 10.2 करोड़ रुपये लगाए जाएंगे। इस रकम का इस्तेमाल अमेरिका में मौजूदा सेंटरों के लीज या लाइसेंस भुगतान के लिए किया जाएगा। इसके अलावा, ब्रांड की पहचान बढ़ाने और ज्यादा लोगों तक पहुंच बनाने वाले कार्यक्रमों पर 10.2 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
बची हुई रकम का इस्तेमाल दूसरी कंपनियों के अधिग्रहण के जरिए कारोबार बढ़ाने और सामान्य कॉरपोरेट जरूरतों के लिए किया जाएगा। हालांकि, कंपनी ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि वह किन कंपनियों का अधिग्रहण करेगी।
प्री-IPO राउंड में कंपनी ने ₹284–290 प्रति शेयर की कीमत पर पहले ही ₹5.8 करोड़ जुटा लिए थे। कंपनी ने ऑफर साइज़ का 75 फीसदी हिस्सा क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIBs) के लिए, 15 फीसदी नॉन-इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स के लिए और बाकी 10 प्रतिशत रिटेल इन्वेस्टर्स के लिए तय किया है।
Rays of Belief ऑटिज्म, एडीएचडी, डाउन सिंड्रोम, सेरेब्रल पाल्सी, बौद्धिक अक्षमता, लर्निंग डिसेबिलिटी और ग्लोबल डेवलपमेंटल डिले जैसी न्यूरोडेवलपमेंटल समस्याओं से जूझ रहे बच्चों के लिए उनकी जरूरत के हिसाब से उपचार और सहायता की योजनाएं तैयार करती है। इसके सेंटर भारत के 57 शहरों में 136 जगहों पर हैं।
कंपनी ने 2018 में अपना काम शुरू किया था और अब तक 58,000 से ज्यादा बच्चों को अपनी सेवाएं दे चुकी है। कंपनी के सभी सेंटर लीज पर लिए गए स्थानों पर चलते हैं। कार्विंग फ्यूचर्स के पास रेज ऑफ बिलीफ में 91.43 फीसदी हिस्सेदारी है। वहीं, पब्लिक शेयरहोल्डर्स के पास कंपनी की 8.28 प्रतिशत हिस्सेदारी है।
वित्तीय प्रदर्शन की बात करें तो मार्च 2026 में समाप्त वित्त वर्ष में कंपनी ने 82 करोड़ रुपये की टोटल इनकम दर्ज की। FY25 में यह आंकड़ा 36.54 करोड़ रुपये था। इसके अलावा कंपनी का नेट प्रॉफिट इसी अवधि के दौरान 5.88 करोड़ रुपये से घटकर 4.96 करोड़ रुपये पर आ गया।
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