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3 min read | अपडेटेड August 28, 2026, 10:17 IST
सारांश
प्राइवेट इक्विटी दिग्गज वॉरबर्ग पिंकस ने ब्लॉक डील के जरिए अपोलो टायर्स में अपनी 4.25% हिस्सेदारी 1,175 करोड़ रुपये में बेच दी है। इन शेयरों को आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल म्यूचुअल फंड, एसबीआई लाइफ और बजाज लाइफ इंश्योरेंस ने खरीदा है। जानिए डील और कंपनी के पहली तिमाही के नतीजों की पूरी डिटेल।

ब्लॉक डील में वॉरबर्ग पिंकस द्वारा हिस्सेदारी बेचने और बड़े संस्थागत निवेशकों द्वारा शेयर खरीदने के बाद अपोलो टायर्स फोकस में है।
गुरुग्राम आधारित प्रमुख टायर निर्माता कंपनी अपोलो टायर्स लिमिटेड के शेयर शुक्रवार 28 अगस्त को शेयर बाजार में खास फोकस में रहने वाले हैं। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज यानी एनएसई (NSE) पर हुए ब्लॉक डील के डेटा के मुताबिक, प्राइवेट इक्विटी दिग्गज वॉरबर्ग पिंकस ने ओपन मार्केट ट्रांजैक्शन के जरिए अपोलो टायर्स में अपनी 4.25% हिस्सेदारी लगभग 1,175 करोड़ रुपये में बेच दी है। वॉरबर्ग पिंकस ने यह बिकवाली अपनी सहयोगी इकाई एमराल्ड सेज इनवेस्टमेंट लिमिटेड के जरिए की है। इसका असर आज शेयर पर भी देखा जा रहा है। एक फीसदी की तेजी के साथ ट्रेड कर रहा है।
ब्लॉक डील के आंकड़ों के अनुसार, वॉरबर्ग पिंकस की सहयोगी कंपनी एमराल्ड सेज इनवेस्टमेंट लिमिटेड ने अपोलो टायर्स के कुल 2,70,10,000 शेयर बेचे हैं, जो कंपनी की कुल इक्विटी का 4.25% हिस्सा है। यह सौदा 435 रुपये प्रति शेयर के औसत भाव पर हुआ, जिससे इसकी कुल वैल्यू 1,174.93 करोड़ रुपये रही। इस ट्रांजैक्शन के बाद अपोलो टायर्स में एमराल्ड सेज इनवेस्टमेंट की हिस्सेदारी घटकर 5.68% रह गई है, जो पहले 9.93% थी।
इन शेयरों को खरीदने के लिए बाजार के कई बड़े इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स आगे आए। इसमें सबसे बड़े खरीदार के रूप में आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल म्यूचुअल फंड उभरा, जिसने 829.98 करोड़ रुपये में 1.9 करोड़ से ज्यादा शेयर यानी 3% हिस्सेदारी खरीदी है। इसके अलावा एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस ने 245 करोड़ रुपये में 56.32 लाख शेयर और बजाज लाइफ इंश्योरेंस ने 99.96 करोड़ रुपये में 22.98 लाख शेयर खरीदे हैं। ब्लॉक डील के बाद एनएसई पर अपोलो टायर्स का शेयर मामूली बढ़त के साथ 444.40 रुपये पर बंद हुआ।
अपोलो टायर्स ने 30 जून 2026 को खत्म हुई चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही यानी क्यू1 एफवाई27 (Q1 FY27) के दौरान अपने कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट में कई गुना का बड़ा उछाल दर्ज किया है। कम बेस इफेक्ट और सभी मार्केट सेगमेंट्स में मजबूत बिक्री की बदौलत कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट बढ़कर 348.87 करोड़ रुपये पर पहुंच गया है, जो एक साल पहले इसी दौरान 12.88 करोड़ रुपये था। पिछले साल के मुनाफे में नीदरलैंड्स प्लांट के रीस्ट्रक्चरिंग और इम्पेयरमेंट से जुड़ा 273 करोड़ रुपये का असर शामिल था।
चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में अपोलो टायर्स का ऑपरेशन से रेवेन्यू बढ़कर 7,397.79 करोड़ रुपये रहा, जो एक साल पहले 6,560.76 करोड़ रुपये था। कंपनी के कुल खर्च भी बढ़कर 7,012.03 करोड़ रुपये रहे। कंपनी के चेयरमैन ओंकार कंवर ने बताया कि सभी मार्केट सेगमेंट्स में मजबूत मांग और मैन्युफैक्चरिंग नेटवर्क में उच्च क्षमता के लगातार इस्तेमाल से कंपनी को रेवेन्यू में अच्छी ग्रोथ मिली है।
अपोलो टायर्स भारत की अग्रणी टायर निर्माता कंपनी है, जिसके पास कुल 7 मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स हैं। इनमें से 5 भारत में, 1 नीदरलैंड्स में और 1 हंगरी में स्थित हैं। कंपनी अपने प्रोडक्ट्स को अपोलो और व्रेडेस्टीन (Vredestein) ब्रांड्स के तहत 100 से ज्यादा देशों में बेचती है। कंपनी का टर्नओवर 2.3 बिलियन डॉलर है और यह दुनिया के टॉप 20 टायर निर्माताओं में शामिल है। कंपनी के पास जर्मनी के राइफेनकॉम जीएमबीएच (Reifencom GmbH) और नीदरलैंड्स के अपोलो व्रेडेस्टीन बीवी का मालिकाना हक है।
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