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4 min read | अपडेटेड August 13, 2026, 09:20 IST
सारांश
जॉइंट स्टेटमेंट के मुताबिक जियो क्रेडिट भारत की तेजी से बढ़ने वाली गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) में शामिल है। कंपनी की प्रबंधन अधीन परिसंपत्तियां केवल दो साल के परिचालन में 30 जून, 2026 तक 30,667 करोड़ रुपये हो गयी हैं।

जियो फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड के शेयरों में हलचल (Photo: Shutterstock)
जियो फाइनेंशियल सर्विसेज लि. और बैंक ऑफ अमेरिका ने जियो क्रेडिट लि. में जॉइंट वेंचर के लिए समझौता किया है। इसके तहत बैंक ऑफ अमेरिका 1.9 अरब डॉलर (करीब 18,268 करोड़ रुपये) में जियो क्रेडिट में 49.9% तक हिस्सेदारी खरीदेगा। शेयर बाजार को बुधवार को दी गई सूचना में कहा गया है कि इसके तहत बैंक ऑफ अमेरिका (बोफा) तरजीही शेयर अलॉटमेंट और वारंट के जरिए मुकेश अंबानी प्रवर्तित कंपनी की कर्ज देने वाली इकाई जियो क्रेडिट में हिस्सेदारी हासिल करेगा। इस डेवलपमेंट के बाद आज जियो फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड के शेयरों में तेजी देखने को मिली है। बुधवार को जियो फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड के शेयर .83% यानी कि 2.10 रुपये प्रति शेयर चढ़कर 255 रुपये प्रति शेयर पर क्लोज हुए थे। वहीं आज मार्केट खुलते ही जियो फाइनेंशियल सर्विसेज के शेयर 1% से ज्यादा उछलकर 257-258 रुपये प्रति शेयर पर ट्रेड होना शुरू हुए।
दोनों कंपनियों ने कहा कि यह जॉइंट वेंचर जियो फाइनेंशियल सर्विसेज की डिजिटल पहुंच और भारतीय मार्केट की समझ को बैंक ऑफ अमेरिका की ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज विशेषज्ञता के साथ जोड़ेगा। अधिकारियों ने क्लिर किया कि यह बैंक ऑफ अमेरिका का एक प्रमुख मार्केट में फाइनेंशियल निवेश है और इसे उसके रिटेल लेंडिंग बिजनेस में प्रवेश के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। दो साल पुरानी जियो क्रेडिट अब तक छोटे कारोबारियों और रिटेल ग्राहकों पर केंद्रित रही है और होम लोन जैसे प्रोडक्ट्स उपलब्ध करा रही है।
जॉइंट स्टेटमेंट के मुताबिक जियो क्रेडिट भारत की तेजी से बढ़ने वाली गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) में शामिल है। कंपनी की प्रबंधन अधीन परिसंपत्तियां केवल दो साल के परिचालन में 30 जून, 2026 तक 30,667 करोड़ रुपये हो गयी हैं। हालांकि, कंपनी ने अभी तक व्यक्तिगत कर्ज जैसे बिना गारंटी वाले लोन और कंज्यूमर फाइनेंस सेक्टर में एंट्री नहीं मारी है। जबकि शुरुआत में इन्हें उसके प्रमुख टारगेटेड एरिया में माना जा रहा था। यह डील जियो की विभिन्न कारोबार के लिए ग्लोबल कंपनियों के साथ साझेदारी करने की रणनीति को और मजबूत करता है। इससे पहले जियो ने भारत में बीमा कारोबार के लिए जर्मनी की कंपनी आलियांज और म्यूचुअल फंड कारोबार में एंट्री के लिए अमेरिका की एसेट मैनेजमेंट कंपनी ब्लैकरॉक के साथ साझेदारी की थी।
समझौते के तहत बैंक ऑफ अमेरिका की अनुषंगी एनबी होल्डिंग्स तरजीही शेयर के जरिये 6,613 करोड़ रुपये तक के निवेश से 4.29 करोड़ इक्विटी शेयर खरीदेगी। इससे उसे जियो क्रेडिट में 26.50% हिस्सेदारी मिलेगी। इसके बाद एनबी होल्डिंग्स 11,655 करोड़ रुपये में 7.56 करोड़ वारंट की सदस्यता लेगी। प्रत्येक वारंट को 18 महीने के भीतर एक इक्विटी शेयर में बदला जा सकेगा। वारंट खरीदते समय 25% फंड का भुगतान करना होगा और बचे फंड शेयर में बदलने के समय देना होगा। वारंट के इक्विटी शेयरों में बदलने के बाद एनबी होल्डिंग्स, अमेरिका के पास जियो क्रेडिट की चुकता इक्विटी पूंजी में 49.90% हिस्सेदारी होगी।
जियो फाइनेंशियल सर्विसेज की मूल कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक मुकेश अंबानी ने कहा, ‘विकसित भारत की यात्रा के लिए ऐसा फाइनेंशियल सिस्टम जरूरी है जो बड़े पैमाने, भरोसे और समावेश पर आधारित हो। जियो फाइनेंशियल सर्विसेज और बैंक ऑफ अमेरिका की साझेदारी प्रौद्योगिकी और ग्लोबल विशेषज्ञता के जरिये भारतीयों के लिए कर्ज को अधिक आसान, पारदर्शी और सुलभ बनाने की दिशा में अहम कदम है।’ बैंक ऑफ अमेरिका के चेयर और मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) ब्रायन मोयनिहान ने कहा, ‘भारत दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण वृद्धि बाजारों में से एक है और यह निवेश उसके भविष्य में हमारे भरोसे को दर्शाता है। जियो फाइनेंशियल ने बहुत कम समय में उल्लेखनीय विस्तार किया है। दोनों कंपनियों की ताकत मिलकर वित्तीय सेवाओं की पहुंच बढ़ाने और भारत की आर्थिक वृद्धि को समर्थन देने में मदद करेगी।’
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