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4 min read | अपडेटेड May 11, 2026, 09:55 IST
सारांश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शादियों के लिए सोना न खरीदने की अपील के बाद सोमवार को ज्वेलरी कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट आई। टाइटन, कल्याण ज्वेलर्स और सेनको गोल्ड जैसे बड़े शेयर 9 पर्सेंट तक टूट गए।
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शेयर बाजार में सोमवार को ज्वेलरी सेक्टर के लिए दिन काफी बुरा रहा। | Image: Shutterstock
सोमवार को शेयर बाजार खुलते ही ज्वेलरी कंपनियों के शेयरों में जोरदार गिरावट देखने को मिली। टाइटन से लेकर सेनको गोल्ड तक, हर बड़े शेयर के दाम धड़ाम हो गए। इस गिरावट की सबसे बड़ी और अहम वजह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वह बयान है, जिसमें उन्होंने देशवासियों से अगले एक साल तक शादियों के लिए सोना न खरीदने की अपील की है। प्रधानमंत्री की इस बात ने निवेशकों के बीच घबराहट पैदा कर दी, जिससे बाजार खुलते ही इन कंपनियों के शेयरों से पैसा निकाला जाने लगा।
बाजार में कारोबार शुरू होते ही ज्वेलरी सेक्टर के निवेशकों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। सबसे ज्यादा नुकसान सेनको गोल्ड के निवेशकों को उठाना पड़ा, जिसका शेयर करीब 9 पर्सेंट तक टूटकर 333 रुपये के स्तर पर आ गया। वहीं कल्याण ज्वेलर्स के शेयर में भी 8 पर्सेंट की बड़ी गिरावट आई और यह 389 रुपये तक गिर गया। टाटा ग्रुप की दिग्गज कंपनी टाइटन के शेयर भी इससे बच नहीं पाए और इसमें 5 पर्सेंट की गिरावट दर्ज की गई।
मार्केट में आज सिर्फ बड़ी कंपनियां ही नहीं, बल्कि छोटे और मझोले ज्वेलरी स्टॉक्स में भी भारी बिकवाली देखी जा रही है। स्काई गोल्ड एंड डायमंड्स के शेयर में सबसे बड़ी 10.60 पर्सेंट की गिरावट आई है, जिससे इसका मार्केट प्राइस 483.90 रुपये पर आ गया है। इसके साथ ही सेनको गोल्ड 9.29 पर्सेंट और कल्याण ज्वेलर्स 7.67 पर्सेंट की कमजोरी के साथ कारोबार कर रहे हैं। थंगमयिल ज्वेलर्स के शेयर में भी 7.17 पर्सेंट की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। टाइटन कंपनी जैसी दिग्गज कंपनी का मार्केट कैप 3.82 लाख करोड़ रुपये होने के बावजूद इसके शेयर 6 पर्सेंट तक टूट गए हैं। पीसी ज्वेलर, ब्लूस्टोन ज्वेलरी, गोल्डियम इंटरनेशनल, राजेश एक्सपोर्ट्स और वैभव ग्लोबल जैसे अन्य स्टॉक्स भी 3 से 5 पर्सेंट की गिरावट के साथ लाल निशान में बने हुए हैं।
हैदराबाद में आयोजित एक जनसभा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए कुछ कड़े सुझाव दिए थे। उन्होंने कहा था कि देश की विदेशी मुद्रा को बचाने के लिए लोगों को फिलहाल सोने की खरीदारी से बचना चाहिए। उन्होंने खासकर शादियों के सीजन में होने वाली भारी खरीदारी को एक साल के लिए टालने की बात कही। पीएम का मानना है कि इससे भारत का इंपोर्ट बिल कम होगा और कीमती विदेशी मुद्रा की बचत होगी। पीएम मोदी ने इसके साथ ही वर्क फ्रॉम होम और कम सफर करने की भी वकालत की है ताकि तेल की खपत को कम किया जा सके।
भारत दुनिया में सोने का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार है और अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए भारी मात्रा में विदेशों से सोना मंगाता है। आंकड़ों के मुताबिक भारत हर महीने औसतन 60 टन सोना इंपोर्ट करता है, जिसके लिए देश को लगभग 6 अरब डॉलर का भुगतान करना पड़ता है। प्रधानमंत्री ने इसी भारी भरकम खर्च को कम करने के उद्देश्य से यह अपील की है। उनका कहना है कि मौजूदा वैश्विक अनिश्चितता के दौर में विदेशी मुद्रा भंडार को बचाना देशहित में बहुत जरूरी है। जब लोग सोना कम खरीदेंगे तो सरकार को बाहर से सोना कम मंगाना पड़ेगा और डॉलर की बचत होगी।
ज्वेलरी सेक्टर पर सिर्फ पीएम के बयान का ही असर नहीं है, बल्कि गोल्ड इंपोर्ट से जुड़ी खबरों ने भी निवेशकों को परेशान किया है। रिपोर्टों के मुताबिक अप्रैल के महीने में भारत का गोल्ड इंपोर्ट पिछले तीन दशकों के सबसे निचले स्तर पर पहुंच सकता है। इसकी एक बड़ी वजह बैंकों पर अचानक आई टैक्स की मांग भी बताई जा रही है। इसके अलावा कई बड़ी ज्वेलरी कंपनियों के चौथी तिमाही के नतीजे भी उम्मीद के मुताबिक नहीं रहे हैं। इन सभी कारणों ने मिलकर ज्वेलरी सेक्टर के लिए एक बहुत ही मुश्किल माहौल तैयार कर दिया है, जिससे आज बाजार में भारी गिरावट देखने को मिल रही है।
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