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4 min read | अपडेटेड August 18, 2026, 13:43 IST
सारांश
अमेरिकी शेयर बाजार में भारतीय निवेशकों की पहली पसंद अब भी एआई चिप मेकर एनवीडिया बनी हुई है। हालांकि अब निवेशक एआई चिप्स के बजाय माइक्रॉन, सैनडिस्क और वेस्टर्न डिजिटल जैसे मेमोरी और स्टोरेज शेयरों में पैसा लगा रहे हैं।

अमेरिकी शेयर बाजार में भारतीय निवेशकों का रुझान एआई चिप्स से मेमोरी और स्टोरेज कंपनियों की ओर तेज हो रहा है।
अमेरिकी शेयर बाजार में निवेश करने वाले भारतीय निवेशकों की पसंद में एक नया बदलाव देखने को मिल रहा है। अंतरराष्ट्रीय ब्रोकरेज प्लेटफॉर्म्स एप्रिशिएट और वेस्टेड फाइनेंस के नए डेटा के अनुसार, भारतीय निवेशकों के बीच अमेरिकी चिप मेकर एनवीडिया सबसे पसंदीदा शेयर बना हुआ है। हालांकि, अब निवेशकों की रणनीति में धीरे-धीरे बदलाव आ रहा है। भारतीय निवेशक अब केवल एआई चिप्स बनाने वाली कंपनियों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उनका पैसा एआई चिप्स से निकलकर मेमोरी और स्टोरेज बनाने वाली कंपनियों की ओर ट्रांसफर हो रहा है।
एप्रिशिएट प्लेटफॉर्म के डेटा के मुताबिक, इस साल टॉप 10 सबसे ज्यादा खरीदे गए शेयरों में अकेले एनवीडिया की हिस्सेदारी लगभग 20% रही है। यह दूसरे स्थान पर मौजूद शेयर के मुकाबले 1.6 गुना अधिक है। एनवीडिया के बाद अल्फाबेट, एप्पल और टेस्ला का नंबर आता है। हालांकि, प्लेटफॉर्म के कुल टॉप 10 बाय ऑर्डर्स में 51% हिस्सेदारी सेमीकंडक्टर और मेमोरी कंपनियों की है। वहीं वेस्टेड फाइनेंस पर पिछले छह महीनों में एनवीडिया, माइक्रॉन, मेटा, माइक्रोसॉफ्ट, एमेजॉन, एएमडी, सैनडिस्क, ब्रॉडकॉम, गूगल और टेस्ला टॉप 10 शेयरों में शामिल रहे हैं।
मार्केट डेटा से सबसे प्रमुख ट्रेंड यह सामने आया है कि निवेशक अब कंप्यूट चिप्स के बजाय मेमोरी और स्टोरेज सेगमेंट की ओर रुख कर रहे हैं। एप्रिशिएट के डेटा के अनुसार, सैनडिस्क, माइक्रॉन और वेस्टर्न डिजिटल जैसी कंपनियों में कुल निवेश का लगभग 37% पैसा लगा है, जो एनवीडिया में लगे पैसों से 1.7 गुना अधिक है। वेस्टेड फाइनेंस पर जून से माइक्रॉन ने एनवीडिया को पीछे करके पहला स्थान हासिल कर लिया है, जबकि सैनडिस्क ने भी टॉप 10 में अपनी जगह बनाई है। अब वेस्टेड प्लेटफॉर्म पर कुल स्टॉक वॉल्यूम का 18% हिस्सा केवल मेमोरी और स्टोरेज सेगमेंट से आ रहा है।
12 जून को लिस्ट होने के बाद से ही एयरोस्पेस कंपनी स्पेसएक्स ने भारतीय निवेशकों का ध्यान आकर्षित किया है। एप्रिशिएट पर लिस्टिंग के बाद से स्पेसएक्स हर ट्रेडिंग डे में सबसे ज्यादा ट्रेड होने वाला अमेरिकी शेयर बन गया है, जहां इसका ट्रेडिंग वॉल्यूम एनवीडिया से भी एक तिहाई अधिक है। वेस्टेड पर स्पेसएक्स का कुल ट्रेडिंग में 3.8% शेयर रहा है। हालांकि, भारतीय निवेशक स्पेसएक्स में बहुत विशाल दांव लगाने के बजाय इसे अपने पोर्टफोलियो में एक छोटे सैटेलाइट पोजीशन की तरह शामिल कर रहे हैं। इसके साथ ही रॉकेट लैब और डिफेंस सेक्टर्स में भी निवेशकों की रुचि अधिक हुई है।
ग्लोबल मार्केट में निवेश के सही अनुपात को लेकर एक्सपर्ट्स का मानना है कि दुनिया का 97% मार्केट कैप भारत के बाहर है। एप्रिशिएट के अनुसार लंबे समय के निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो का 35 से 40% हिस्सा अमेरिकी और वैश्विक एसेट्स में रखना चाहिए। इसका मुख्य कारण यह है कि भारतीय और अमेरिकी बाजारों का कोरिलेशन केवल 0.4 है और 1991 के बाद से रुपया डॉलर के मुकाबले हर साल औसतन 4.5% कमजोर हुआ है, जिससे डॉलर एसेट्स का रिटर्न अधिक होता है। वहीं वेस्टेड फाइनेंस शुरुआती निवेशकों के लिए 10 से 15% और अनुभवी निवेशकों के लिए 20 से 30% ग्लोबल एलोकेशन की सलाह देता है, खासकर उन लोगों के लिए जिनके भविष्य में डॉलर से संबद्ध वित्तीय लक्ष्य जैसे बच्चों की विदेश में शिक्षा शामिल हैं।
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