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3 min read | अपडेटेड August 18, 2026, 09:52 IST
सारांश
इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय ने ईसीएमएस योजना के तहत 31 नए प्रस्तावों को मंजूरी दी है, जिससे कुल स्वीकृत प्रोजेक्ट्स की संख्या 106 हो गई है। 69,548 करोड रुपये के निवेश वाली इस योजना से स्वदेशी मैन्यूफैक्चरिंग और सप्लाई चैन को मजबूती मिलेगी।

ईसीएमएस योजना के तहत 106 प्रोजेक्ट्स की मंजूरी के बाद भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स और शेयर बाजार के सेक्टर्स को मिलेगी नई रफ्तार।
भारत को इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्यूफैक्चरिंग के क्षेत्र में आत्मनिर्भर और वैश्विक हब बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक प्रमुख कदम उठाया है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स मैन्यूफैक्चरिंग स्कीम (ECMS) के तहत 6,844 करोड रुपये के अनुमानित निवेश वाले 31 नए प्रस्तावों को हरी झंडी दे दी है। इसके साथ ही ईसीएमएस योजना के तहत स्वीकृत कुल प्रोजेक्ट्स की संख्या पहुंचकर 106 हो गई है।
17 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इन मंजूरियों को सौंपा। इस योजना के तहत स्वीकृत 106 परियोजनाओं से देश के 15 राज्यों में कुल 69,548 करोड रुपये का निवेश होगा। इससे 74,628 डायरेक्ट और लगभग 2.5 लाख इनडायरेक्ट रोजगार पैदा होंगे। अब तक 38 विनिर्माण प्लांट में उत्पादन शुरू भी हो चुका है, जबकि 16 अन्य प्रोजेक्ट्स निर्माण और मशीनरी लगाने के उन्नत चरणों में हैं।
ईसीएमएस योजना का मुख्य उद्देश्य असेंबली से आगे निकलकर क्रिटिकल कंपोनेंट्स और कच्चे माल का भारत में ही निर्माण करना है। नए स्वीकृत प्रस्तावों में पहली बार देश के भीतर ही फिल्टर्स, कॉइल्स, स्पीकर्स जैसे कंपोनेंट्स और एसिटिलीन ब्लैक व इलेक्ट्रोलाइट एडिटिव्स जैसे जरूरी कच्चे माल का निर्माण शुरू हो रहा है। कई प्रमुख क्षेत्रों में देश की उत्पादन क्षमता घरेलू मांग से भी अधिक हो गई है। उदाहरण के लिए एनोड मैटेरियल में घरेलू मांग का लगभग 110%, ऑप्टिकल ट्रांसीवर (SFP) में 350%, रिले में 200% और एनक्लोजर में लगभग 100% उत्पादन क्षमता हासिल कर ली गई है।
सरकार के इस कदम से भारतीय शेयर बाजार में लिस्टेड कई सेक्टर्स को बड़ा बूस्ट मिलने की उम्मीद है। इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स एवं ईएमएस (EMS) सेक्टर में लोकल मैन्यूफैक्चरिंग से आयात पर निर्भरता कम होगी और असेंबली मार्जिन सुधरेगा। कैपिटल गुड्स और इंडस्ट्रियल ऑटोमेशन सेक्टर में मशीनरी निर्माण के लिए 5 कंपनियों को मंजूरी मिलने से घरेलू मशीन विनिर्माण को प्रोत्साहन मिलेगा। इसके अलावा एसिटिलीन ब्लैक और एनोड मैटेरियल जैसे स्पेशल केमिकल्स का घरेलू निर्माण शुरू होने से केमिकल्स व लिथियम-आयन बैटरी मैटेरियल्स सेक्टर को सीधा फायदा होगा। वहीं ऑप्टिकल ट्रांसीवर बनने से टेलीकॉम व नेटवर्किंग इक्विपमेंट सेक्टर का इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत होगा।
शेयर बाजार की बात करें तो इस योजना से कई प्रमुख लिस्टेड कंपनियों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लाभ मिलेगा। सिरमा एसजीएस टेक्नोलॉजी लिमिटेड (Syrma SGS Technology Ltd) को योजना के तहत कॉइल्स के निर्माण की मंजूरी मिली है। सेंटम इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (Centum Electronics Ltd) को ट्रांसड्यूसर्स और फिल्टर्स के विनिर्माण की स्वीकृति दी गई है। इसके अलावा आरपी-सजीव गोयनका ग्रुप की पीसीबीएल लिमिटेड (PCBL Ltd) को लिथियम-आयन सेल के लिए जरूरी एसिटिलीन ब्लैक बनाने की मंजूरी मिली है। कैपिटल गुड्स कैटेगरी में ज्योति सीएनसी ऑटोमेशन लिमिटेड (Jyoti CNC Automation Ltd) के प्रोजेक्ट को स्वीकृति मिली है। पूरे इलेक्ट्रॉनिक्स इकोसिस्टम के मजबूत होने से डिक्सन टेक्नोलॉजीज, कायन्स टेक्नोलॉजी और एंबर एंटरप्राइजेज जैसी दिग्गज ईएमएस कंपनियों को भी कच्चे माल की सुलभता का बड़ा फायदा मिलेगा।
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