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4 min read | अपडेटेड September 09, 2026, 10:57 IST
सारांश
NSE आईपीओ की खबरों के बीच IFCI के शेयरों में भारी प्रॉफिट बुकिंग देखने को मिली है। लगातार दो सेशन की गिरावट में कंपनी के शेयर लगभग 14% तक टूट चुके हैं।

IFCI के शेयरों में लगातार दूसरे दिन मुनाफावसूली के कारण भारी गिरावट दर्ज की गई। Image: Shutterstock
हालिया दिनों में शानदार तेजी दिखाने वाले IFCI लिमिटेड के शेयरों में अब भारी मुनाफावसूली देखने को मिल रही है। बुधवार 9 सितंबर को लगातार दूसरे कारोबारी सेशन में कंपनी के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। मंगलवार को शेयर में लगभग 10% की बड़ी गिरावट आई थी, जिसके बाद बुधवार को IFCI का शेयर 4.5% से ज्यादा गिरकर 88.40 रुपये के इंट्राडे लो पर पहुंच गया। इस तरह पिछले दो ही दिनों में यह शेयर कुल मिलाकर लगभग 14% तक फिसल चुका है।
IFCI के शेयरों में हाल के दिनों में आई जोरदार तेजी की मुख्य वजह NSE यानी नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का आईपीओ रहा है। दरअसल IFCI की स्टॉक होल्डिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया में 50% से ज्यादा की कंट्रोलिंग हिस्सेदारी है। वहीं एसएचसीआईएल के पास देश के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज NSE की 4% से ज्यादा की हिस्सेदारी है। इस होल्डिंग स्ट्रक्चर के कारण IFCI के शेयरधारकों को NSE में अप्रत्यक्ष रूप से हिस्सेदारी का फायदा मिलता है। यही वजह है कि NSE आईपीओ से जुड़ी हर खबर का असर सीधे IFCI के शेयर प्राइस पर पड़ता है।
हालिया गिरावट से पहले IFCI के शेयर जबरदस्त तेजी के दौर से गुजर रहे थे। पिछले छह महीनों में इस शेयर ने 72% का शानदार रिटर्न दिया है। 4 सितंबर 2026 को शेयर ने 107.45 रुपये का 52 हफ्ते का हाई लेवल छुआ था, जबकि 9 दिसंबर 2025 को यह 46.20 रुपये के 52 हफ्ते के लो पर था। अप्रैल से अगस्त तक हर महीने यह शेयर हरे निशान में बंद हुआ और इस दौरान इसमें कुल 87% की बढ़त दर्ज की गई। मंगलवार की गिरावट से पहले यह शेयर एक महीने में 40% से ज्यादा और साल 2026 में 100% से अधिक चढ़ चुका था।
मार्केट रेगुलेटर सेबी ने नेशनल स्टॉक एक्सचेंज को 30,000 करोड़ रुपये के बहुप्रतीक्षित आईपीओ के लिए मंजूरी दे दी है। सेबी की वेबसाइट पर शुक्रवार को जारी अपडेट के मुताबिक एक्सचेंज को आईपीओ के साथ आगे बढ़ने के लिए ऑब्जर्वेशन लेटर मिल गया है। यह देश का अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ हो सकता है। पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक NSE इसी हफ्ते आईपीओ का प्राइस बैंड और अन्य जरूरी जानकारियां घोषित कर सकता है। सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि यह पब्लिक इश्यू 15 सितंबर को लॉन्च हो सकता है और 24-25 सितंबर तक इसकी लिस्टिंग का टारगेट रखा गया है, जो 26 सितंबर से शुरू हो रहे पितृ पक्ष से ठीक पहले है। इस लिस्टिंग के बाद NSE मार्केट कैप के हिसाब से देश की 10 सबसे मूल्यवान कंपनियों में शामिल हो जाएगा।
IFCI लिमिटेड की स्थापना 1948 में उद्योगों को मीडियम और लॉन्ग टर्म फाइनेंस देने के लिए एक वैधानिक निगम के रूप में हुई थी। 1993 में इंडस्ट्रियल फाइनेंस कॉर्पोरेशन एक्ट निरस्त होने के बाद यह एक पब्लिक लिमिटेड कंपनी बन गई। यह आरबीआई के साथ नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनी यानी एनबीएफसी के रूप में रजिस्टर्ड है। वहीं NSE की बात करें तो इसकी स्थापना 1992 में हुई थी और 1994 से इसने कामकाज शुरू किया था। 31 मार्च 2026 तक इक्विटी कैश मार्केट टर्नओवर में NSE की हिस्सेदारी लगभग 93% और इक्विटी फ्यूचर्स टर्नओवर में 99.8% थी। NSE ने पहली बार दिसंबर 2016 में आईपीओ के लिए आवेदन किया था, लेकिन को-लोकेशन विवाद के कारण इसमें देरी हुई। अब करीब एक दशक के लंबे इंतजार के बाद इसे मंजूरी मिली है।
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