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Horizon Industrial Parks IPO: आ रहा ₹2600 करोड़ का आईपीओ, पूरा फ्रेश इश्यू, ₹100 से भी कम है प्राइस

Shubham Singh Thakur

5 min read | अपडेटेड August 12, 2026, 13:19 IST

सारांश

Horizon Industrial Parks IPO का लॉट साइज 250 शेयर है। यानी अपर प्राइस बैंड ₹60 के हिसाब से रिटेल निवेशक को एक लॉट के लिए ₹15,000 का निवेश करना होगा। इसके बाद 250-250 शेयरों के मल्टीपल में बोली लगाई जा सकती है।

Horizon Industrial IPO

Horizon Industrial IPO: कंपनी ने इसके लिए ₹57 से ₹60 प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया है।

ब्लैकस्टोन के निवेश वाली कंपनी Horizon Industrial Parks Limited का IPO आने वाला है। यह आईपीओ 17 अगस्त 2026 से खुलने जा रहा है। इस आईपीओ के जरिए कंपनी की योजना 2600 करोड़ रुपये जुटाने की है। कंपनी ने इसके लिए ₹57 से ₹60 प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया है। यह इश्यू 19 अगस्त को बंद होगा। एंकर निवेशकों के लिए यह इश्यू 14 अगस्त को खुलेगा। यहां हमने इस आईपीओ के बारे में पूरी जानकारी दी है।

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कितना पैसा लगाना होगा?

Horizon Industrial Parks IPO का लॉट साइज 250 शेयर है। यानी अपर प्राइस बैंड ₹60 के हिसाब से रिटेल निवेशक को एक लॉट के लिए ₹15,000 का निवेश करना होगा। इसके बाद 250-250 शेयरों के मल्टीपल में बोली लगाई जा सकती है।

कंपनी ने IPO में योग्य संस्थागत निवेशकों (QIB) के लिए अधिकतम 75% शेयर रिजर्व किए हैं। वहीं, गैर-संस्थागत निवेशकों (NII) के लिए कम से कम 15% और रिटेल निवेशकों के लिए कम से कम 10% हिस्सा रखा गया है।

₹2,600 करोड़ का पूरा IPO

Horizon Industrial Parks IPO के जरिए ₹2,600 करोड़ जुटाने की योजना है। यह पूरा इश्यू फ्रेश इक्विटी शेयरों का होगा। इसमें कोई ऑफर फॉर सेल (OFS) शामिल नहीं है। यानी IPO से मिलने वाला पूरा पैसा कंपनी के पास जाएगा।

कंपनी IPO से मिले ₹2250 करोड़ का इस्तेमाल कर्ज चुकाने या पहले से लिए गए कर्ज की रकम का भुगतान करने में करेगी। 31 मार्च 2026 तक कंपनी पर कुल ₹6,884.34 करोड़ का कर्ज था। IPO से पहले कंपनी ने प्री-IPO फंडरेज के जरिए ₹1,650 करोड़ जुटाए हैं।

कब होगा अलॉटमेंट और लिस्टिंग?

IPO का अलॉटमेंट 20 अगस्त को फाइनल होने की उम्मीद है। 21 अगस्त को सफल निवेशकों के डीमैट अकाउंट में शेयर क्रेडिट किए जा सकते हैं और इसी दिन रिफंड की प्रक्रिया शुरू होगी। Horizon Industrial Parks के शेयरों की BSE और NSE पर लिस्टिंग 24 अगस्त 2026 को होने की संभावना है।

Horizon Industrial Parks में फिलहाल अमेरिकी निवेश कंपनी Blackstone की करीब 89% हिस्सेदारी है। IPO के बाद कंपनी में Blackstone की हिस्सेदारी कम हो जाएगी। IPO के लिए JM Financial, Axis Capital, IIFL Capital Services, SBI Capital Markets और 360 ONE WAM को मर्चेंट बैंकर नियुक्त किया गया है।

क्या कारोबार करती है कंपनी?

Horizon Industrial Parks मुख्य रूप से वेयरहाउस, फुलफिलमेंट सेंटर, इंडस्ट्रियल फैसिलिटी और इन-सिटी लॉजिस्टिक्स सेंटर विकसित और संचालित करती है। कंपनी इन सुविधाओं को अलग-अलग ग्राहकों को लंबे समय के लिए लीज पर देती है। इसके लीज एग्रीमेंट आमतौर पर कई वर्षों के होते हैं।

कंपनी के पास 10 शहरों में 45 एसेट्स हैं, जो कुल 58.58 मिलियन वर्ग फुट क्षेत्र में फैले हुए हैं। Narsapura में Vision Softech Facilities Pvt Ltd में 49% हिस्सेदारी को शामिल करने पर कंपनी का नेटवर्क 46 एसेट्स और 61.13 मिलियन वर्ग फुट तक पहुंच जाता है।

Horizon Industrial Parks के पास 118 से ज्यादा ग्राहक हैं। आमतौर पर ग्राहकों के साथ कॉन्ट्रैक्ट की अवधि 5 से 10 साल होती है। इनमें लॉक-इन पीरियड सामान्य तौर पर 1 से 5 साल का रहता है। कंपनी के रेंटल कॉन्ट्रैक्ट में आमतौर पर हर साल 4.5-5% की किराया बढ़ोतरी का प्रावधान होता है। यानी करीब तीन साल में किराया लगभग 15% तक बढ़ सकता है।

कैसा है फाइनेंशियल?

Horizon Industrial Parks के वित्तीय आंकड़ों के मुताबिक, कंपनी की कुल आय वित्त वर्ष 2026 में बढ़कर ₹767.84 करोड़ हो गई, जो वित्त वर्ष 2025 में ₹439.35 करोड़ थी। इससे पहले वित्त वर्ष 2024 में कंपनी की कुल आय ₹245.52 करोड़ थी।

हालांकि, आय बढ़ने के बावजूद कंपनी का मुनाफा अभी भी घाटे में है। वित्त वर्ष 2026 में कंपनी का PAT यानी टैक्स के बाद मुनाफा ₹203.65 करोड़ का घाटा रहा। वित्त वर्ष 2025 में यह घाटा ₹178.78 करोड़ था। यानी घाटा करीब 14% बढ़ गया। वित्त वर्ष 2024 में कंपनी का PAT घाटा ₹162.21 करोड़ था।

क्या हैं कंपनी के बड़े जोखिम?

कंपनी के सामने सबसे बड़े जोखिमों में से एक ग्राहकों पर ज्यादा निर्भरता है। वित्त वर्ष 2026 में कंपनी के टॉप 10 ग्राहकों से कुल प्रो-फॉर्मा रेवेन्यू का 42.6% आया था। अगर इनमें से किसी बड़े ग्राहक का कारोबार कम होता है या वह कॉन्ट्रैक्ट खत्म करता है, तो कंपनी के रेवेन्यू पर असर पड़ सकता है।

इसके अलावा, करीब 30 msf का डेवलपमेंट अभी पूरा किया जाना बाकी है। इन प्रोजेक्ट्स को समय पर बनाना, उनमें ग्राहक लाना और उनसे कमाई शुरू करना कंपनी के लिए अहम चुनौती होगी। कंपनी का EBITDA मार्जिन करीब 80% है, लेकिन इसके बावजूद कंपनी अभी भी टैक्स के बाद मुनाफा यानी PAT के स्तर पर घाटे में है। इससे पता चलता है कि ऑपरेटिंग प्रॉफिट के बाद ब्याज, डेप्रिसिएशन और अन्य खर्चों का कंपनी के मुनाफे पर काफी असर पड़ रहा है।

(डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें।)

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