मार्केट न्यूज़

4 min read | अपडेटेड August 12, 2026, 12:13 IST
सारांश
टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। वह फरवरी 2027 में अपना मौजूदा कार्यकाल पूरा करने के बाद इस पद से हट जाएंगे और दोबारा जिम्मेदारी नहीं लेंगे। इस पुष्टि के बाद टाटा ग्रुप की प्रमुख आईटी कंपनी टीसीएस के शेयर नेशनल स्टॉक एक्सचेंज पर 5% तक गिर गए।

टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन के पद छोड़ने की पुष्टि के बाद टीसीएस के शेयरों में भारी गिरावट आई।
देश के सबसे बड़े और प्रतिष्ठित कारोबारी समूह टाटा ग्रुप से एक बहुत बड़ी खबर सामने आई है। 400 अरब डॉलर वाले विशाल टाटा ग्रुप की मुख्य प्रमोटर कंपनी टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इस खबर की पुष्टि होते ही भारतीय शेयर बाजार में हलचल मच गई और समूह की सबसे बड़ी आईटी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज यानी टीसीएस के शेयरों में जोरदार बिकवाली देखने को मिली। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज पर टीसीएस का शेयर सुबह के कारोबार में 5% तक लुढ़क कर 2,322 रुपये के निचले स्तर पर आ गया।
शेयर बाजार खुलते ही TCS के शेयरों पर बिकवाली का भारी दबाव देखा गया। कंपनी का शेयर शुरुआती कारोबार में ही 4% से ज्यादा टूट गया और दिन के निचले स्तरों पर 5% तक गिर गया। टाटा ग्रुप में टीसीएस सबसे अहम और ज्यादा वैल्यू वाली कंपनी है, इसलिए चेयरमैन के हटने की खबर का सीधा असर इसके शेयरों पर पड़ा है। टाटा संस के पास समूह की 30 से ज्यादा कंपनियों का मालिकाना हक है, जिनमें टीसीएस के साथ टाटा मोटर्स, टाटा स्टील और एयर इंडिया जैसी दिग्गज कंपनियां शामिल हैं। वहीं टाटा संस में सबसे बड़ी हिस्सेदारी टाटा ट्रस्ट्स के पास है, जो करीब 66% शेयर रखती है।
400 अरब डॉलर वाले विशाल टाटा ग्रुप की मूल प्रमोटर कंपनी टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने अपने पद को लेकर एक बड़ा और आधिकारिक बयान जारी किया है। उन्होंने साफ कर दिया है कि वह 20 फरवरी 2027 को अपना मौजूदा कार्यकाल समाप्त होने के बाद दोबारा इस पद की जिम्मेदारी नहीं संभालेंगे। एन चंद्रशेखरन ने अपने बयान में कहा कि उन्होंने टाटा ग्रुप में अपने पेशेवर जीवन के 40 साल पूरे कर लिए हैं। इस प्रतिष्ठित संस्थान में योगदान देने का अवसर उनके लिए बेहद संतोषजनक रहा है। उन्होंने बताया कि पिछले एक दशक से टाटा संस का नेतृत्व करना उनके लिए बहुत बड़े सम्मान और गहरी जिम्मेदारी की बात रही है। टाटा ग्रुप के कर्मचारियों, निवेशकों, सहयोगियों और सभी भागीदारों के निरंतर सहयोग के लिए उन्होंने दिल से आभार व्यक्त किया।
चंद्रशेखरन ने अपने कार्यकाल को आगे न बढ़ाने के पीछे की पूरी वजह भी सामने रखी है। उन्होंने बताया कि सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट ने सर्वसम्मति से उनके अगले कार्यकाल को पांच साल के लिए बढ़ाने की सिफारिश की थी। इसके बाद टाटा संस की नॉमिनेशन एंड रेम्यूनरेशन कमेटी और बोर्ड ने भी इसे रिकॉर्ड कर आगे बढ़ाने की सिफारिश की। 24 फरवरी 2026 को इस प्रस्ताव को बोर्ड की बैठक में पेश किया गया था। हालांकि बोर्ड के एक सदस्य ने इस प्रस्ताव का समर्थन नहीं किया। बोर्ड में सर्वसम्मति न होने के कारण उन्होंने उस समय इस फैसले को टालने का निर्णय लिया था। उस बैठक के बाद छह महीने का समय बीत जाने पर भी इस पर कोई आम सहमति नहीं बन सकी।
उन्होंने अपने बयान में कहा कि टाटा संस एक बहुत बड़ा संस्थान है और इसके कई रणनीतिक प्रोजेक्ट्स इस समय बेहद महत्वपूर्ण दौर में हैं। ऐसे में फरवरी 2027 के बाद ग्रुप को आगे ले जाने के लिए न केवल एक लीडर का होना जरूरी है, बल्कि कर्मचारियों, निवेशकों और पार्टनर्स के लिए लीडरशिप की स्पष्टता होना भी बहुत आवश्यक है। इसी स्थिति को देखते हुए उन्होंने टाटा संस बोर्ड को औपचारिक रूप से सूचित कर दिया है कि वह 20 फरवरी 2027 को कार्यकाल समाप्त होने पर पुनर्नियुक्ति की पेशकश नहीं करेंगे। इसके साथ ही उन्होंने बोर्ड से जल्द नए उत्तराधिकारी के चयन की प्रक्रिया पूरी करने को कहा है ताकि लीडरशिप का बदलाव सुचारू रूप से हो सके।
टीसीएस और टाटा ग्रुप में लंबा सफर
नटराजन चंद्रशेखरन अक्टूबर 2016 में टाटा संस के बोर्ड में शामिल हुए थे और जनवरी 2017 में उन्हें चेयरमैन नियुक्त किया गया था। टाटा संस का पद संभालने से पहले वह 30 साल तक टीसीएस में रहे, जहां उन्होंने आठ साल तक कंपनी के सीईओ और मैनेजिंग डायरेक्टर के रूप में काम किया। उनके नेतृत्व में टीसीएस देश की सबसे मूल्यवान आईटी कंपनी बनी। वर्तमान में वह टाटा स्टील, टाटा मोटर्स, टाटा पावर, एयर इंडिया, टाटा कंज्यूमर और इंडियन होटल्स जैसी प्रमुख कंपनियों के बोर्ड की भी अगुवाई कर रहे हैं।
लेखकों के बारे में

अगला लेख