return to news
  1. Edible Oil Price: सनफ्लावर तेल की किल्लत से बढ़ा सोयाबीन तेल का दबदबा, जानिए क्यों बदल रहा रिफाइनर्स का रुख

बिजनेस न्यूज़

Edible Oil Price: सनफ्लावर तेल की किल्लत से बढ़ा सोयाबीन तेल का दबदबा, जानिए क्यों बदल रहा रिफाइनर्स का रुख

Upstox

3 min read | अपडेटेड August 18, 2026, 10:48 IST

सारांश

काला सागर में रूस और यूक्रेन के बीच जारी तनाव से सनफ्लावर तेल की सप्लाई प्रभावित हुई है। इस वजह से भारतीय रिफाइनर्स सोयाबीन तेल का रिकॉर्ड आयात कर रहे हैं। अगस्त 2026 में सोयाबीन तेल का आयात बढ़कर 6.2 लाख मीट्रिक टन पर पहुंचने का अनुमान है, जो इस मार्केटिंग वर्ष के औसत से 46% अधिक है।

india-soybean-oil-import-record-august

भारत में अगस्त 2026 के दौरान सोयाबीन तेल के आयात में रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई।

ब्लैक सी क्षेत्र में रूस और यूक्रेन के बीच जारी सैन्य संघर्ष का सीधा असर भारत के खाद्य तेल आयात पर दिखाई दे रहा है। सनफ्लावर तेल यानी सूरजमुखी के तेल की सप्लाई में आ रही रुकावटों के कारण भारतीय रिफाइनर्स ने अब बड़े पैमाने पर सोयाबीन तेल का रुख किया है। एक अनुमान के मुताबिक अगस्त 2026 में भारत का सोयाबीन तेल आयात बढ़कर 6.2 लाख मीट्रिक टन के ऑल-टाइम हाई स्तर पर पहुंच सकता है। यह आंकड़ा नवंबर से शुरू हुए चालू मार्केटिंग वर्ष के दौरान दर्ज किए गए 4.24 लाख टन के मासिक औसत से लगभग 46% अधिक है।

Open FREE Demat Account within minutes!
Join now

सनफ्लावर तेल की दिख रही है कमी

भारत अपनी सनफ्लावर तेल की अधिकांश जरूरतों के लिए रूस और यूक्रेन पर निर्भर रहता है। दोनों देशों के बीच बंदरगाहों और समुद्री इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाए जाने के कारण ब्लैक सी रूट से जहाजों का आवागमन काफी कठिन हो गया है। कारोबारियों के मुताबिक अगस्त और सितंबर महीने की डिलीवरी के लिए निर्धारित करीब 1.5 लाख टन सनफ्लावर तेल की खेप में देरी हुई है। इसके चलते अगस्त में सनफ्लावर तेल का आयात जुलाई के मुकाबले 28% घटकर 1.8 लाख टन पर आ सकता है, जो फरवरी के बाद का सबसे निचला स्तर होगा। इस किल्लत की वजह से दक्षिण भारत के रिफाइनर्स, जहां सनफ्लावर तेल काफी पसंद किया जाता है, अब सोयाबीन तेल मंगा रहे हैं। पश्चिमी बंदरगाहों कांदला और जेएनपीटी के साथ-साथ अब कृष्णपटनम और काकीनाडा जैसे दक्षिणी बंदरगाहों पर भी सोयाबीन तेल की खेप पहुंच रही है।

पाम तेल से घटा कीमतों का अंतर

सोयाबीन तेल की मांग बढ़ने का एक बड़ा कारण इसकी कीमतें भी हैं। पाम तेल के मुकाबले सोयाबीन तेल का प्रीमियम जो अप्रैल में 100 डॉलर प्रति टन से अधिक था, वह अब घटकर लगभग 50 डॉलर प्रति टन रह गया है। खराब मौसम की आशंकाओं और इंडोनेशिया द्वारा बायोफ्यूल के लिए पाम तेल का इस्तेमाल बढ़ाने के फैसले से पाम तेल महंगा हो गया है। कीमतों का यह अंतर कम होने से भारतीय खरीदारों के लिए सोयाबीन तेल ज्यादा किफायती हो गया है। इसके अलावा आगामी त्योहारी सीजन को देखते हुए भी खाद्य तेल की खरीदारी बढ़ी है। जुलाई में कुल खाद्य तेल का आयात 10 महीने के उच्चतम स्तर 14.8 लाख टन पर पहुंच गया था, जिसमें सोयाबीन तेल का आयात 31% बढ़कर करीब 4.98 लाख टन रहा था।

आगे भी बना रह सकता है सोयाबीन तेल का दबदबा

सोयाबीन तेल की यह बंपर खरीदारी केवल अगस्त तक ही सीमित नहीं रहने वाली है। रिफाइनर्स ने सितंबर से दिसंबर की अवधि के लिए करीब 14 लाख टन सोयाबीन तेल की अग्रिम बुकिंग पहले ही कर ली है। बाजार के जानकारों का मानना है कि सितंबर में भी सोयाबीन तेल का आयात 6 लाख टन के स्तर से ऊपर बना रह सकता है। भारत मुख्य रूप से अर्जेंटीना और ब्राजील से सोयाबीन तेल मंगाता है, लेकिन मौजूदा स्थिति को देखते हुए रिफाइनर्स चीन, मिस्र, थाईलैंड और तुर्की से भी तत्काल खेप जुटा रहे हैं। इसके साथ ही देश में घरेलू तिलहन उत्पादन पर अल नीनो के संभावित प्रभाव की चिंता ने भी आयात की रफ्तार को तेज कर दिया है।

लेखकों के बारे में

Upstox
Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

अगला लेख