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4 min read | अपडेटेड August 20, 2026, 14:06 IST
सारांश
भारत में क्विक कॉमर्स का बाजार काफी तेजी से बदल रहा है। ब्लिंकिट की पेरेंट कंपनी इटरनल लिमिटेड इस बिजनेस में स्विगी के इंस्टामार्ट से काफी आगे निकलती दिख रही है। पिछले एक साल में इटरनल के शेयर ने 0.38% का पॉजिटिव रिटर्न दिया है, जबकि स्विगी का शेयर 33.16% गिरा है।

क्विक कॉमर्स सेक्टर में इटरनल का ब्लिंकिट और स्विगी का इंस्टामार्ट आमने सामने हैं।
भारत में क्विक कॉमर्स का बाजार बहुत तेजी से बदल रहा है और इस कड़े मुकाबले में कंपनियां एक दूसरे को पछाड़ने में लगी हुई हैं। क्विक कॉमर्स मार्केट की लीडर कंपनी इटरनल लिमिटेड, जो ब्लिंकिट की पेरेंट कंपनी है, अपने विशाल साइज के बावजूद स्विगी के इंस्टामार्ट के मुकाबले काफी बेहतर ग्रोथ दिखा रही है। शेयर बाजार के रिटर्न से लेकर डार्क स्टोर्स और रेवेन्यू के आंकड़ों तक, इटरनल ने स्विगी पर अपनी मजबूत बढ़त बना ली है।
अगर पिछले एक साल के शेयर रिटर्न की तुलना करें, तो इटरनल लिमिटेड के शेयर ने निवेशकों को पॉजिटिव रिटर्न दिया है। इटरनल का शेयर 327.80 रुपये के स्तर पर कारोबार कर रहा है और पिछले एक साल में इसमें 0.38% यानी 1.25 रुपये की तेजी आई है। दूसरी तरफ, स्विगी लिमिटेड के शेयर का प्रदर्शन काफी कमजोर रहा है। स्विगी का शेयर 281.45 रुपये पर है और पिछले एक साल में यह 33.16% यानी 139.60 रुपये नीचे गिर चुका है। शेयर बाजार के ये आंकड़े बताते हैं कि निवेशक इटरनल के बिजनेस मॉडल पर ज्यादा भरोसा जता रहे हैं।
हालिया तिमाही के नतीजों में इटरनल के क्विक कॉमर्स सेगमेंट का रेवेन्यू 15,664 करोड़ रुपये रहा, जिसमें तिमाही दर तिमाही आधार पर 18.4% की ग्रोथ देखी गई। नेट आर्डर वैल्यू यानी एनओवी के मामले में इटरनल का क्विक कॉमर्स बिजनेस 17,132 करोड़ रुपये पर पहुंच गया, जो कि चौथी तिमाही के 14,386 करोड़ रुपये से 19.08% जियादा है। इसके विपरीत स्विगी के इंस्टामार्ट की ग्रोथ काफी सुस्त रही है। इंस्टामार्ट का ग्रॉस आर्डर वैल्यू यानी जीओवी हालिया तिमाही में 7,907 करोड़ रुपये रहा, जो पिछली तिमाही के 7,881 करोड़ रुपये के मुकाबले केवल 0.2% ही बढ़ा है।
इटरनल ने हालिया तिमाही में 200 नए डार्क स्टोर जोड़कर अपनी कुल संख्या 2,443 कर ली है, जो तिमाही आधार पर 8.9% की बढ़ोतरी है। कंपनी का लक्ष्य साल 2026 के अंत तक अपने डार्क स्टोर की संख्या 3,000 के करीब ले जाने का है। दूसरी तरफ स्विगी ने इस तिमाही में केवल 28 नए डार्क स्टोर जोड़े, जिससे उसके कुल स्टोर की संख्या 1,171 हो गई है। इटरनल का डार्क स्टोर नेटवर्क 131 शहरों में फैले स्विगी के मुकाबले घने मेट्रो क्लस्टर्स पर केंद्रित है, जिससे उसे तेज डिलीवरी का फायदा मिलता है।
इटरनल के अगले पांच सालों में मजबूत रिटर्न देने की पहली वजह उसका मजबूत डार्क स्टोर नेटवर्क है। जियादा डार्क स्टोर होने से कंपनी के प्रति स्टोर आर्डर की वैल्यू और डिलीवरी की रफ्तार बढ़ी है। दूसरी वजह कुशल डिलीवरी और स्केल का फायदा है। हालिया तिमाही में इटरनल के क्विक कॉमर्स सेगमेंट ने 102 करोड़ रुपये का एडजस्टेड EBITDA प्रॉफिट दर्ज किया, जबकि स्विगी के इंस्टामार्ट को 778 करोड़ रुपये का एडजस्टेड EBITDA लॉस हुआ। तीसरी वजह इस सेक्टर की अपार संभावनाएं हैं। भारत का कुल रिटेल बाजार 1 ट्रिलियन डॉलर यानी 1,00,00,000 करोड़ रुपये का होने का अनुमान है, जिसके सामने इटरनल का एनओवी अभी 1% से भी कम है।
कंसोलिडेटेड लेवल पर इटरनल ने हालिया तिमाही में 31,120 करोड़ रुपये का एनओवी दर्ज किया, जो सालाना आधार पर 54% जियादा है। कंपनी का कंसोलिडेटेड एडजस्टेड EBITDA 223% बढ़कर 555 करोड़ रुपये रहा और नेट प्रॉफिट 92 करोड़ रुपये दर्ज किया गया। वहीं स्विगी का ओवरऑल रेवेन्यू 34% बढ़कर 7,112 करोड़ रुपये रहा, लेकिन उसका कंसोलिडेटेड एडजस्टेड EBITDA माइनस 651 करोड़ रुपये पर रहा और कंपनी घाटे में बनी रही। इटरनल के पास 18,288 करोड़ रुपये का कैश बैलेंस है, जो उसे फ्यूचर में विस्तार करने में बड़ी मदद देगा।
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