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क्रिटिकल मिनरल प्रोसेसिंग के लिए 2,814 करोड़ की कैपेक्स स्कीम मंजूरी का किन स्टॉक्स पर दिखा असर? ये है डीटेल

Upstox

4 min read | अपडेटेड November 05, 2026, 13:24 IST

सारांश

केंद्रीय कैबिनेट ने देश में क्रिटिकल मिनरल प्रोसेसिंग को बढ़ावा देने के लिए 2,814 करोड़ रुपये की कैपेक्स सपोर्ट स्कीम को मंजूरी दी है। इसके तहत लिथियम और निकल के चार प्रोसेसिंग प्लांट लगाने पर 30% कैपिटल सब्सिडी मिलेगी।

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केंद्रीय कैबिनेट ने क्रिटिकल मिनरल प्रोसेसिंग के लिए 2,814 करोड़ रुपये की कैपेक्स सपोर्ट स्कीम को मंजूरी दी।

आज सुबह से शेयर बाजार में मेटल, माइनिंग और मिनरल प्रोसेसिंग कंपनियों के शेयरों पर निवेशकों की खास नजर देखने को मिल रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने देश में क्रिटिकल मिनरल प्रोसेसिंग को बढ़ावा देने के लिए 2,814 करोड़ रुपये की कैपेक्स सपोर्ट स्कीम को मंजूरी दे दी है। यह वित्तीय सहायता अगले पांच सालों की अवधि के लिए दी जाएगी। सरकार के इस बड़े ऐलान से वेदांता, हिंदुस्तान जिंक और गुजरात मिनरल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन यानी जीएमडीसी जैसी कंपनियों पर सीधा असर पड़ेगा। आज हिंदूस्तान जिंक का शेयर 3 फीसदी की तेजी के साथ कारोबार करते नजर आया। यही हाल वेदांता शेयर में भी दो फीसदी तेजी के साथ देखी गई। इसके अलावा GMDC भी हरे निशान में कारोबार करते दिखा।

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चार बड़े प्रोसेसिंग प्लांट और 30% सब्सिडी

आधिकारिक घोषणा के अनुसार केंद्र सरकार इस योजना के तहत देश में चार क्रिटिकल मिनरल प्रोसेसिंग प्लांट लगाने के लिए पात्र निवेश पर 30% की कैपिटल सब्सिडी देगी। इन चार में से दो प्लांट लिथियम प्रोसेसिंग के लिए होंगे, जिनकी न्यूनतम प्रोडक्शन कैपेसिटी 30 किलो टन प्रति वर्ष होगी। वहीं बाकी दो प्लांट निकल प्रोसेसिंग के लिए होंगे, जिनकी न्यूनतम प्रोडक्शन कैपेसिटी 50 किलो टन प्रति वर्ष रखी गई है। कैबिनेट के मुताबिक लिथियम के लिए प्रति लाभार्थी अधिकतम 500 करोड़ रुपये और निकल के लिए प्रति लाभार्थी अधिकतम 900 करोड़ रुपये की सहायता राशि तय की गई है। इस पूंजीगत मदद से देश में मिनरल प्लांट्स को तेजी से स्थापित करने में मदद मिलेगी।

फोकस में हैं ये कंपनियां

इस योजना का सीधा असर वेदांता, हिंदुस्तान जिंक और GMDC जैसी कंपनियों पर पड़ेगा, क्योंकि इन सभी ने क्रिटिकल मिनरल माइनिंग और प्रोसेसिंग की क्षमताएं विकसित की हैं। इसके साथ ही अडाणी एंटरप्राइजेज, कोल इंडिया, नेशनल एल्युमीनियम कंपनी यानी नाल्को, NMDC और ग्रेविटा इंडिया जैसी कंपनियां भी अपने पोर्टफोलियो में क्रिटिकल मिनरल्स को शामिल करने और विस्तार करने पर ध्यान दे रही हैं। सरकारी सहायता मिलने से इन कंपनियों की क्षमता विस्तार योजना को बड़ा बल मिल सकता है।

केंद्रीय कैबिनेट ने बताया कि योजना के लाभार्थियों का चयन दो चरणों वाली प्रक्रिया के जरिए किया जाएगा। पहले चरण में आवेदनों की तकनीकी योग्यता की जांच होगी और केवल तकनीकी रूप से पास होने वाले आवेदक ही दूसरे चरण की वित्तीय बोली में शामिल हो सकेंगे। हर मिनरल के लिए दो लाभार्थियों का चयन सबसे कम लागत के आधार पर किया जाएगा, यानी जो बोलीदाता सबसे कम कैपेक्स सपोर्ट की मांग करेगा, उसे चुना जाएगा। इसके अलावा तय किए गए लक्ष्यों और माइलस्टोन्स को पूरा करने के आधार पर वित्तीय प्रोत्साहन की रकम तीन किस्तों में जारी की जाएगी।

आयात पर निर्भरता घटाने के लिए शुरू हुई योजना

भारत वर्तमान में रिफाइंड और उच्च शुद्धता वाले क्रिटिकल मिनरल्स के लिए पूरी तरह आयात पर निर्भर है। देश में लिथियम, निकल और कोबाल्ट जैसे जरूरी खनिजों के प्रोसेसिंग का इंफ्रास्ट्रक्चर और क्षमता अभी काफी सीमित है। इस योजना के जरिए सरकार का लक्ष्य घरेलू प्रोसेसिंग क्षमता को बढ़ाना, वैल्यू एडिशन करना, आयात पर निर्भरता घटाना और वैल्यू चेन को मजबूत करना है। इस योजना का सीधा फायदा इलेक्ट्रिक मोबिलिटी यानी इलेक्ट्रिक गाड़ियां बनाने वाले सेक्टर, बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक्स, डिफेंस और स्पेशलिटी स्टील निर्माण से जुड़ी कंपनियों को मिलेगा।

(डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें।)

लेखकों के बारे में

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Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

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